जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आने लगी है, प्रत्याशियों के मोबाइल पर कॉल्स आने की संख्या भी बढ़ने लगी है। अधिकतर उम्मीदवार रोजाना औसतन दो सौ से ढाई सौ कॉल्स अटेंड कर रहे हैं।
नतीजतन, जनसभाओं में भी इसका असर दिखने लगा है। एक पार्टी के प्रत्याशी तो लगातार आने वाली कॉल्स को सिरदर्द बता रहे हैं, लेकिन वह फोन खुद भी अटेंड कर लेते हैं।
वहीं, कुछ पार्टियों के प्रत्याशियों ने बातचीत के लिए मोबाइल ही अपने साथी को सौंप दिया है। वहीं, डॉक्टरों की मुताबिक अधिक कॉल्स के कारण मानसिक परेशानी, चिड़चिड़ापन हो सकता है और संभव है कि कान या सिर में दर्द भी उठ जाए।
इससे बचने के लिए आउटगोइंग कॉल्स के लिए बेसिक फोन का इस्तेमाल करना चाहिए, जबकि अधिक कॉल्स अटेंड करने के लिए किसी और की भी सहायता ली जा सकती है।
एक प्रत्याशी ने बताया कि सुबह से शाम तक होने वाली रैली और जनसभाओं के दौरान भी फोन कॉल्स अटेंड करने का रात को असर महसूस होता है। कभी सिरदर्द तो कभी अन्य शारीरिक परेशानी। दूसरे प्रत्याशी ने भी माना कि रोजाना करीब ढाई सौ कॉल्स अटेंड किए जाते हैं, लेकिन बातचीत की ड्यूटी दो तीन व्यक्तियों की लगाई गई है।
एक प्रत्याशी ने बताया कि आम दिनों की तरह ही कॉल्स आते हैं, लेकिन प्रत्याशी को कम से कम परेशानी हो, इस लिहाज से दूसरे लोग ही फोन अटेंड कर रहे हैं।
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कोट
अधिक फोन कॉल्स के कारण सिरदर्द या कानों में भी दर्द की शिकायत हो सकती है। इससे बचने के लिए प्रत्याशी मोबाइल पर किसी को कॉल करने के बजाय बेसिक फोन का इस्तेमाल कर सकते हैं। लगातार मोबाइल पर बातचीत का सिलसिला अगर एक महीने तक चले तो इससे सिरदर्द और चिड़चिड़ापन की शिकायत हो सकती हैं।
- डॉ. विजय, रिटायर्ड डॉक्टर, जीएमएसएच-16, चंडीगढ़