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पुरानी रार खत्म: एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे रिंकू-अंगुराल अब भाजपा में बने दोस्त, दो माह पहले लिखी गई थी पटकथा

Thu, 28 Mar 2024 08:43 AM IST
शाहरुख खान सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर

सार

एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रिंकू और अंगुराल अब बीजेपी में दोस्त बन गए हैं। दो माह पहले पटकथा लिखी गई थी। एक बड़े नेता ने दोनों के बीच समझौता करवाया था। दिल्ली में भाजपा हाईकमान के साथ मीटिंग फिक्स कराई थी।
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Lok Sabha Elections 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजनीति ऐसा खेल है, जहां धुर विरोधी कब एक हो जाएं, कहा नहीं जा सकता। जालंधर की राजनीतिक बिसात इसका बेहतरीन उदाहरण बन गई है। जालंधर से सांसद सुशील रिंकू व विधायक शीतल अंगुराल वर्षों से एक-दूसरे के राजनीतिक विरोधी रहे हैं। राजनीति ने ऐसी करवट ली कि दोनों दोस्त बन कर आप को अलविदा कह भाजपा में चले गए। 
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यह सारी पटकथा दो माह पहले लिखी गई थी। दो माह में कहानी बिल्कुल पलट गई। रिंकू और शीतल के बीच एक दमदार व्यक्ति ने समझौता करवाया। दोनों के बीच पुरानी रार खत्म कर नया अध्याय लिखने की पटकथा तैयार की गई। इसको लेकर कई तरह के पक्के वादे भी किए गए, जिसके बाद दिल्ली में भाजपा हाईकमान के साथ मीटिंग फिक्स की गई और अंतत: दोनों भाजपा में शामिल हो गए।

दरअसल, यह किसी से छिपा नहीं है कि सुशील रिंकू के स्वर्गीय पिता पार्षद राम लाल व विधायक शीतल अंगुराल के पिता चौधरी परस राम के बीच गहरी मित्रता दी। दोनों एक ही परिवार के सदस्य के रूप में शहर में जाने जाते थे, लेकिन इस बीच छोटी सी कड़वाहट ने दोनों परिवार के बीच न केवल दूरियां बना दीं, बल्कि दोनों परिवारों में खूनी टकराव तक हो गया। 
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शीतल अंगुराल व उसके परिवार ने भाजपा का दामन थाम लिया, लेकिन दोनों के बीच रार बरकरार रही। 2017 में रिंकू को कांग्रेस से विधायक की टिकट मिल गई तो दूसरी तरफ शीतल अंगुराल का भी राजनीति में कद बढ़ गया। वह केंद्रीय मंत्री विजय सांपला के निकटवर्ती बन गए। वह भाजपा एससी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी तक पहुंच गए।

2017 में कांग्रेस सत्तासीन थी, तो उस दौरान शीतल अंगुराल व उनके पारिवारिक सदस्यों पर कई केस दर्ज हुए, जिसका सीधा आरोप रिंकू पर लगाया गया। शीतल अंगुराल के साथ विजय सांपला के खड़े होने के कारण वह मजबूत रहे। 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में जबरदस्त मोड़ आया। शीतल अंगुराल ने भाजपा को अलविदा कहकर आप का दामन थाम लिया। 


 

रिंकू व शीतल दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा। दोनों के बीच चुनाव प्रचार में तल्खी भी हुई और आप के शीतल अंगुराल ने सीट जीत ली। सत्ता पलट गई। रिंकू के स्थान पर शीतल विधायक बन गए, लेकिन दोनों के बीच दरार और चौड़ी हो गइ।

2023 में चौधरी संतोख सिंह के निधन के बाद सीट पर उपचुनाव हुआ, तो आप ने सुशील रिंकू को संसदीय चुनाव में उतारा। शीतल अंगुराल ने इसका डटकर विरोध किया, लेकिन पार्टी हाईकमान के आगे उनकी एक नहीं चली।

आप लीडरशिप दोनों के बीच के टकराव से काफी परेशान थी, लेकिन भगवंत मान के लिए जालंधर का उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ था। लिहाजा भगवंत मान ने दोनों के बीच न केवल सुलह करवाई, बल्कि चुनाव में खुद मॉनिटरिंग की और प्रचार का जिम्मा संभाला। आप उम्मीदवार रिंकू 58 हजार मतों से जीत गए।

रिंकू सांसद बन गए और शीतल विधायक, लेकिन दोनों के बीच पावरगेम को लेकर जंग जारी रही। एक बार तो शीतल ने कहा कि जो भी व्यक्ति उनके पास आता है, रिंकू अपनी तरफ खींचने के लिए उसे पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बनवाना शुरू कर देते हैं।

ऐसे कई कार्यकर्ता हैं, जो कि पहले उनके पास आते थे, तब उन्हें केस दर्ज किए जाने की धमकी देकर डराया जाता था। उन्होंने कहा था कि मेरे परिवार को टारगेट किया जा रहा है। मेरे करीबियों पर वे पुलिस और प्रशासन से दबाव डलवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं, पिता और भाई घर के पांच सदस्य हैं। एक मर भी जाएगा तो कोई दिक्कत नहीं है। मगर मैं संघर्ष की लड़ाई जारी रखूंगा।

राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ से की मुलाकात
जालंधर के सांसद सुशील कुमार रिंकू और विधायक शीतल अंगुराल ने भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ से मुलाकात की। साथ में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ भी मौजूद थे।

 
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इस दौरान तरुण चुघ ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी पंजाब में निरंतर मजबूती से आगे बढ़ रही हैं, आए दिन भाजपा परिवार बढ़ रहा है। सुशील कुमार रिंकू और शीतल अंगुराल के आने से पंजाब में भारतीय जनता पार्टी और अधिक मजबूत होगी। पार्टी लोकसभा चुनाव में 13 सीटों पर मजबूती से लड़ेगी और अधिक से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करेगी। 
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