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लोकसभा चुनाव 2019 में हरियाणा के तीनों ‘लालों’ के परिवार से चौधर छीनने की लड़ाई, त्रिकोणीय मुकाबला

Fri, 03 May 2019 12:09 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
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फाइल फोटो
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राजस्थान से सटी बांगर बेल्ट का प्रमुख शहर हिसार। हरियाणा में जस्ती लोहे के कारोबार का बड़ा केंद्र होने के कारण शहर-ए-इस्पात के नाम से भी मशहूर। फिरोजशाह तुगलक ने सन 1354 में इसकी स्थापना की। किले के निर्माण से शहर का नाम हिसार-ए-फिरोजा पड़ा यानी फिरोज का शहर। अकबर के शासनकाल में शहर के नाम से फिरोजा हटा दिया गया और केवल हिसार रह गया। बांगर बेल्ट के इस शहर को अब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजन लाल के नाम से जाता है।
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वर्तमान में इसकी चौधर ताऊ देवीलाल की चौथी पीढ़ी से सांसद दुष्यंत चौटाला के हाथ है। आगे भी चौधर कायम रहे, इसलिए दुष्यंत यहीं से चुनावी रण में डटे हैं। इस बार उन्हें कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। उनकी टक्कर केंद्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह और भजनलाल के पोते भव्य बिश्नोई से है। भाजपा यहां देवीलाल और भजन लाल परिवार के हाथ से चौधर छीनने की लड़ाई लड़ रही है। पीएम नरेंद्र मोदी व बीरेंद्र के रसूख के सहारे भाजपा का सपना यहां पहली बार कमल खिलाने का है।

दुष्यंत पिछली बार इनेलो के टिकट पर सांसद बने थे पर अब हालात भिन्न हैं। 2018 में चौटाला परिवार व इनेलो टूट चुके हैं। दुष्यंत ने अब जननायक जनता पार्टी बना ली है, जिसके बैनर तले आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी व परिवार में टूट का उन्हें नुकसान हो सकता है, जिससे संसद पहुंचने की उनकी राह आसान नहीं दिख रही। बृजेंद्र और भव्य उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं, इससे सीट त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी है। कहीं दुष्यंत और बृजेंद्र में टक्कर है तो कहीं बृजेंद्र व भव्य में और कहीं भव्य और दुष्यंत के बीच।
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इनेलो ने यहां से जाट नेता सुरेश कौंथ को उतारा है। जिससे जाट वोट दुष्यंत, बृजेंद्र व कौंथ में बंट रहे हैं। भव्य नॉन जाट, कांग्रेस के परंपरागत वोटों और दादा भजनलाल के नाम के सहारे हैं तो दुष्यंत को पांच साल में कराए कामों और देवीलाल के नाम का सहारा है। बृजेंद्र के साथ जहां पिता बीरेंद्र सिंह व विधायक मां प्रेमलता का रसूख है, वहीं मोदी फैक्टर काम आ सकता है।

दुष्यंत ने कुलदीप को हराकर जीता था चुनाव

2014 लोकसभा चुनाव में चौ. देवीलाल के पड़पोते दुष्यंत चौटाला ने भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई को हराकर 26 साल की उम्र में संसद की दहलीज लांघी थी।  पिछला लोकसभा चुनाव भाजपा और हजकां ने मिलकर लड़ा था। बावजूद इसके कुलदीप बिश्नोई हार गए। 2011 में भजनलाल की मृत्यु के बाद यहां हुए उपचुनाव में कुलदीप ने दुष्यंत के पिता अजय चौटाला को मात दी थी। 2014 में दुष्यंत ने उसका हिसाब चुकता कर लिया। 2014 में दुष्यंत चौटाला को कुल 4,94,478 वोट मिले थे, जबकि कुलदीप बिश्नोई को 4,62,631 वोट पड़े। दुष्यंत ने हिसार लोकसभा क्षेत्र से 31,847 वोट से जीत हासिल की थी।

मंत्रियों-विधायकों पर जीत का दबाव
हिसार लोकसभा में कुल नौ विधानसभा क्षेत्र हैं। जिनमें हिसार जिला के सात विधानसभा क्षेत्र हांसी, नलवा, बरवाला, हिसार, आदमपुर, नारनौंद व उकलाना आते हैं। इनके अलावा भिवानी जिले का बवानीखेड़ा व जींद जिले का उचाना कलां विधानसभा क्षेत्र भी इसी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। इनमें से उचाना कलां में बृजेंद्र की मां प्रेमलता विधायक हैं। नारनौंद से वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु विधायक हैं। हिसार से चेयरमैन सार्वजनिक उपक्रम डॉ. कमल गुप्ता, बबानीखेड़ा से बिशंभर वाल्मीकि भाजपा विधायक हैं।

नलवा से रणबीर गंगवा इनेलो विधायक पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। आदमपुर से कुलदीप बिश्नोई व हांसी से भव्य की मां रेणुका बिश्नोई विधायक हैं। उकलाना से अनूप धानक इनेलो विधायक थे, लेकिन अब जननायक जनता पार्टी का समर्थन कर रहे हैं। बरवाला से वेद नारंग इनेलो विधायक हैं। यहां पर सबसे अधिक दबाव भाजपा मंत्रियों व विधायकों पर बृजेंद्र को लीड दिलाने का है।

पांच साल के हिसाब के साथ वोट मांग रहे दुष्यंत

सांसद दुष्यंत चौटाला दूसरी बार जनता का समर्थन हासिल करने के लिए अपने पांच साल का रिपोर्ट कार्ड लेकर चुनावी दंगल में हैं। उन्होंने सबसे युवा सांसद के रूप में अच्छा काम कर दिखाने का प्रयास किया है। वह देश के उन चुनिंदा सांसदों की सूची में अपना नाम दर्ज करा पाए, जिन्होंने संसद के बाहर और अंदर दोनों जगह अपनी जिम्मेदारियों को पूरी गंभीरता के साथ निभाया। बृजेंद्र सिंह जाट वोटों में सेंध लगाकर दुष्यंत चौटाला को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

पिछली बार जाट वोटरों का 95 फीसदी समर्थन दुष्यंत चौटाला को हासिल हुआ था। दुष्यंत चौटाला को गैर जाट वोट भाजपा और कांग्रेस में बंटने में फायदा नजर आ रहा है। पिछली बार दुष्यंत चौटाला को सिर्फ उचाना, उकलाना और नारनौंद में ही जीत हासिल हुई थी। दुष्यंत समर्थकों के अनुसार इस बार गैर जाट वोटरों के बिखराव का फायदा उनको नलवा, हांसी, बवानीखेड़ा और बरवाला में भी होने की उम्मीद है।

तोहफा देने की भव्य को आस
कांग्रेस के सभी खेमों के समर्थन के बलबूते भव्य बिश्नोई जीत का दावा कर रहे हैं। हालांकि भव्य बिश्नोई को गैर जाट वोटरों के बंटने का नुकसान हो सकता है। अगर भाजपा प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह ज्यादा संख्या में गैर जाट वोट हासिल कर गए तो बिश्नोई की संसद पहुंचने की डगर कठिन होगी। भव्य समर्थकों का आकलन है कि जाट वोटरों में बंटवारे का फायदा कांग्रेस प्रत्याशी को मिलेगा। भव्य दादा भजन लाल के साथ रहे पंजाबी वोटरों को अपने साथ लाने के लिए पूरी ताकत लगाए हुए हैं।
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जीत की इबारत लिखने का दम भर रहे बृजेंद्र

भाजपा ने हिसार की कमजोर सीट को जीतने के लिए केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह पर दांव लगाया है। बृजेंद्र सिंह ने अपनी आईएएस की नौकरी छोड़कर बड़ा रिस्क लिया है। अपने परिवार के रसूख व मोदी मैजिक के आसरे ही उन्होंने यह चुनौती स्वीकारी है।

बृजेंद्र दिग्गज जाट नेता बीरेंद्र सिंह के बेटे और चौधरी छोटूराम के पड़दोहते हैं। इसका वह फायदा उठाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। बृजेंद्र को लगता है कि जींद उपचुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी गैर जाट वोटर भाजपा का साथ देंगे, जिससे उनकी चुनावी नैया पार हो जाएगी। उनके समर्थकों का कहना है कि उचाना के अलावा हिसार, हांसी, बरवाला, बवानीखेड़ा और उकलाना कस्बों में भी उन्हें जनसमर्थन मिलेगा।

15 लाख से अधिक मतदाता तय करेंगे भविष्य
हिसार संसदीय क्षेत्र में 15 लाख 80 हजार 349 मतदाता हैं। जिनमें 7 लाख 28 हजार 514 महिलाएं व 8 लाख 51 हजार 835 पुरुष मतदाता हैं।

नोहर सरकार के कामों से भाजपा को फायदे की आस
हिसार में भजनलाल के बाद मनोहर सरकार ने विकास को गति दी है। शहर को जाम से निजात, बाइपास का निर्माण, कालोनियों में पानी की सुविधा, शहर को फाटक रहित बनाने की दिशा में काम चल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास में तेजी आई है। बिना पर्ची और खर्ची के नौकरी से आमजन प्रभावित है। शहर के हुडा सेक्टर में एन्हांसमेंट की री-कैलकुलेशन बड़ा मुद्दा है।
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