पंजाब में लोकसभा चुनाव के लिए पक्ष और विपक्ष ने मौजूद विधायक उतारे हैं और अगर वे सभी जीत गए तो विधानसभा की छह सीटें खाली हो जाएंगी। सभी 13 सीटों पर वोटों के समीकरण बैठाते हुए विभिन्न सियासी दलों ने कहीं नए चेहरे तो कहीं मौजूदा सांसदों को टिकट थमा दिए हैं। इसके साथ ही कुल नौ मौजूदा विधायकों को भी पार्टियों ने चुनाव मैदान में उतार दिया है। इनमें कांग्रेस ने दो, शिरोमणि अकाली दल ने दो, भाजपा ने एक, आम आदमी पार्टी ने दो, लोक इंसाफ पार्टी ने एक और पंजाब एकता पार्टी ने एक विधायक को टिकट दिया है।
लोकसभा चुनाव में उतरे इन विधायकों का भविष्य क्या रहेगा, यह तो 23 मई को साफ होगा लेकिन इन विधायकों में से बठिंडा सीट पर कांग्रेस के गिद्दड़बाहा से विधायक राजा वड़िंग और आप की तलवंडी साबो से विधायक बलजिंदर कौर आमने-सामने हैं जबकि होशियारपुर सीट पर भी कांग्रेस के चब्बेवाल से विधायक डा. राजकुमार चब्बेवाल और भाजपा के फगवाड़ा से विधायक सोमप्रकाश में मुकाबला है।
इनके अलावा, अकाली दल के प्रधान और जलालाबाद से विधायक सुखबीर सिंह बादल फिरोजपुर संसदीय सीट से, अकाली दल के लहरा से विधायक परमिंदर सिंह ढींढसा संगरूर से, लोक इंसाफ पार्टी के प्रधान और आत्मनगर से विधायक सिमरजीत सिंह बैंस लुधियाना से और पंजाब एकता पार्टी के प्रधान व भुलत्थ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा बठिंडा सीट से चुनाव मैदान में हैं। इस तरह विभिन्न सीटों पर अगर विधायकों को जीत मिली तब छह विधानसभा सीटें खाली हो जाएंगी।
बठिंडा की जंग सांसद और विधायकों के बीच
विभिन्न लोकसभा सीटों पर विधायकों की स्थिति का आकलन करें तो बठिंडा संसदीय सीट पर इस बार मुकाबला सबसे रोचक रहने वाला है। यहां अकाली दल की मौजूदा सांसद हरसिमरत कौर बादल को कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और पंजाब एकता पार्टी के विधायक अपने-अपने दम पर चुनौती देने वाले हैं। अगर हरसिमरत बादल अपनी सीट नहीं बचा पाईं तो तीनों विधायकों में से किसी एक की जीत, राज्य विधानसभा में एक सीट खाली करेगी।
ऐसा ही हाल होशियारपुर सीट पर रहेगा, जहां भाजपा के सोमप्रकाश या कांग्रेस के चब्बेवाल में से किसी एक को जीत हासिल हुई तो विधानसभा में एक ओर सीट खाली होगी। हालांकि इस सीट पर आम आदमी पार्टी ने भी काफी मजबूत प्रत्याशी को उतारा है। संगरूर सीट पर परमिंदर सिंह ढींढसा को आप के मौजूदा विधायक भगवंत मान और कांग्रेस के केवल ढिल्लों का सामना करना है, जबकि फिरोजपुर में सुखबीर बादल को कांग्रेस में गए पूर्व अकाली नेता शेर सिंह घुबाया से मुकाबला करना है।
इस तरह फिरोजपुर सीट पर भी मुकाबला रोचक होगा, क्योंकि 25 साल से अकाली दल के एकछत्र वर्चस्व वाली सीट पर इस बार दोनों छोर पर अकाली (मौजूदा और पूर्व) नेता ही हैं। लोक इंसाफ पार्टी के सिमरजीत बैंस अपने विधानसभा हलके में तो मजबूत पकड़ रखते हैं लेकिन लुधियाना संसदीय हलके में उनके लिए कांग्रेस के मौजूदा सांसद रवनीत बिट्टू आसान प्रतिद्वंद्वी साबित नहीं होंगे।
दो साल की अवधि में प्रदेश में चार चुनाव
पंजाब में 2017 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार बनने के बाद से प्रदेश की जनता चार विभिन्न चुनाव/उपचुनाव में हिस्सा ले चुकी है। यानी बीते दो साल के दौरान राज्य के लोगों के लिए लोकसभा चुनाव पांचवीं कवायद है। इस अवधि के दौरान राज्य में नगर निगम चुनाव, पंचायत/ब्लाक समिति चुनाव, अकाली दल के विधायक अजीत सिंह कोहाड़ के निधन से खाली हुई शाहकोट विधानसभा सीट पर उपचुनाव और भाजपा सांसद विनोद खन्ना के निधन से खाली हुई गुरदासपुर संसदीय सीट पर उपचुनाव में मतदाता हिस्सा ले चुके हैं।
इस दौरान खास बात यह भी रही कि उक्त चारों चुनाव के दौरान राज्य के संबंधित हिस्सों में चुनाव आचार संहिता के चलते विकास योजनाओं का कामकाज लंबित रहा। कुल मिलाकर यह अवधि लगभग आठ माह की रही, जिसमें जनता के जुड़े कामकाज रुके रहे। अब लोकसभा चुनाव में अब अगल विधायक जीत जाते हैं तो विधानसभा की खाली होने वाली छह सीटों पर अगले छह महीने में उपचुनाव के लिए संबंधित हलकों के वोटरों को वोट डालने होंगे।