लोकसभा चुनाव से पहले आखिर शिरोमणि अकाली दल को पंजाब में अपने जूनियर गठबंधन पार्टनर भाजपा की याद आई। गठबंधन के इतिहास में पहली बार दोनों दलों के जिला प्रधानों की सांझी बैठक हुई। पहली बार शिअद नेतृत्व ने भाजपा मुख्यालय में जाकर बैठक की। 10 साल तक सत्ता में रहने के बावजूद भाजपा के नेता हमेशा यही आरोप लगाते रहे हैं कि उनकी अपनी ही सरकार में सुनवाई नहीं होती है।
भाजपा के मंत्रियों का यही हाल था, जिलास्तरीय वर्कर तो बेहद निराश ही रहा था। यह फीडबैक भाजपा हाईकमान के पास भी था। पिछले दिनों दोनों पार्टियों के नेताओं की बैठक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ हुई थी। चुनावी रणनीति के माहिर शाह जानते थे कि अगर निचले स्तर पर तालमेल न हुआ जीत मुश्किल है।
इसलिए उन्होंने शिअद नेतृत्व को साफ शब्दों में कहा था कि जिला स्तर पर दोनों पार्टियों के बीच तालमेल यकीनी बनाया जाना चाहिए। इसी का असर था कि पहली बार भाजपा मुख्यालय में दोनों जिला प्रधानों की बैठक हुई, जिसमें प्रदेश पदाधिकारी भी शामिल हुए। शिअद प्रधान सुखबीर बादल और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्वेत मलिक ने सभी को तालमेल का पाठ पढ़ाया।
इस दौरान दोनों दलों के जिला प्रधानों की कोऑर्डिनेशन कमेटियां गठित करने का एलान कर दिया गया। जो साप्ताहिक बैठक कर चुनावी तैयारी की समीक्षा करेंगी। यह भी फैसला किया गया कि सभी 13 सीटों पर गठबंधन की सांझी कैंपेन चलेगी। इससे पहले भाजपा अपनी तीन सीटों पर जोर लगाती थी, शिअद का जोर अपनी दस सीटों पर रहता था।