सिद्धू ने पार्टी के प्रचार अभियान के दौरान असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में चुनाव सभाएं कीं। कांग्रेस को सिद्धू के प्रचार वाली केवल- किशनगंज (बिहार), कोझिकोड (केरल), वडकारा (केरल), वायनाड (केरल), छिंदवाड़ा (एमपी), रायबरेली (यूपी), वेस्ट सिंहभूम (झारखंड) सीटों पर ही जीत हासिल हुई।
इसके उलट, पंजाब में बठिंडा सीट पर तो सिद्धू के विवादास्पद बयानों को कांग्रेस की हार का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। बठिंडा में सिद्धू आए तो कांग्रेस प्रत्याशी राजा वड़िंग के समर्थन में प्रचार करने थे, लेकिन उन्होंने चर्चा बादल परिवार और कैप्टन अमरिंदर सिंह के संबंधों की छेड़ दी और यहां तक कह डाला कि बेअदबी के मामलों पर पंजाब सरकार ने अब तक बादलों को जेल में नहीं डाला और बादलों व कैप्टन के बीच फ्रेंडली मैच चल रहा है।
सिद्धू ने मुख्यमंत्री को ही चुनौती दे डाली कि अगर बादलों के खिलाफ कार्रवाही नहीं हुई तो वे मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। हालांकि अब तक न तो सिद्धू ने प्रदेश सरकार में मंत्री पद ही छोड़ा है और अमेठी में राहुल गांधी की हार को लेकर राजनीति से संन्यास का ही एलान किया है।