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लोकसभा चुनाव 2019: पंजाब में दावा सभी 13 सीटें जीतने का, पांच हॉट सीटों पर कांटे की टक्कर

Sun, 05 May 2019 12:46 PM IST
खुशबू गोयल हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
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Punjab Congress - फोटो : File Photo
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पंजाब की 13 लोकसभा सीटों के लिए नामांकन पत्र संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी जंग का मैदान पूरी तरह सज गया है। कुल 278 प्रत्याशी अपनी-अपनी सीटों पर प्रतिद्वंद्वियों को मात देने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे। प्रदेश में सभी प्रमुख दल- कांग्रेस, अकाली-भाजपा गठबंधन और आम आदमी पार्टी सभी 13 सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं।
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कांग्रेस ने इसे मिशन-13 नाम दिया है, जबकि अकाली दल और आम आदमी पार्टी प्रदेश की कांग्रेस सरकार की नाकामियां गिनाकर चुनाव जीत जाने की तैयारी में हैं। इन प्रमुख पार्टियों के दावों का अगर हलकेवार आकलन किया जाए तो इतना साफ है कि कोई भी दल क्लीन स्वीप करने की स्थिति में नहीं है और न ही प्रदेश में किसी दल के समर्थन में कोई लहर ही चल रही है।

सत्ताधारी कांग्रेस जहां अपनी उपलब्धियां गिनाने के साथ अकाली दल को बेअदबी और बरगाड़ी कांड में पछाड़ने की योजना बना रही है, वहीं विधानसभा चुनाव का मैनिफेस्टों ही कांग्रेस के गले की फांस बन रहा है। कांग्रेस अब तक मैनिफेस्टो में जनता से किए अनेक बड़े वादे पूरे नहीं कर सकी है और जिन्हें पूरा करने की शुरुआत की गई है, उसके लिए सरकार के खजाने में पर्याप्त पैसा नहीं है।
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दूसरी ओर अकाली दल बेअदबी और बहिबल कलां व कोटकपुरा में पुलिस फायरिंग के मामले में पिछले साल जिस तरह से घिरा था, उससे उभरता दिखाई दे रहा है। पार्टी लोकसभा चुनाव में अपनी सरकार की उपलब्धियों के साथ-साथ कांग्रेस सरकार की नाकामियों को मुद्दा बना रही है।

वहीं, अकाली दल की सहयोगी भाजपा के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों का हवाला देने के अलावा और कुछ नहीं है। वैसे 19 मई को मतदान से पहले नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे की तैयारी है, जिससे अकाली-भाजपा गठबंधन को काफी आस है।

आम आदमी पार्टी की जो हवा 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रदेश में बनी थी, वह 2017 के विधानसभा चुनाव में ही बिखर कर रह गई। पार्टी अंदरूनी फूट की इस हद तक शिकार हो चुकी है कि इससे से अलग हुए नेता अपनी पार्टियां बनाकर चुनाव मैदान में उतर गए हैं। वैसे, मौजूदा चुनाव में आम आदमी पार्टी के निशाने पर कांग्रेस और अकाली दल दोनों हैं।

पांच हॉट सीटों पर रहेगी सबकी नजर

पंजाब की 13 में से पांच सीटों पर वीवीआईपी चुनाव लड़ रहे हैं और सबकी नजरें इन सीटों के परिणामों पर लगी रहेंगी। इनमें पहली प्रमुख सीट है बठिंडा की, जहां से अकाली दल की मौजूदा सांसद हरसिमरत कौर को तीन मौजूदा विधायक चुनौती दे रहे हैं। ये हैं कांग्रेस के राजा वड़िंग, आम आदमी पार्टी की बलजिंदर कौर और पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस के सुखपाल सिंह खैरा। खैरा ने भुलत्थ सीट से अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को भेज दिया है लेकिन वह अभी मंजूर नहीं हुआ है।

दूसरी मुख्य सीट फिरोजपुर है। इस सीट से अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल को अकाली दल के पूर्व सीनियर नेता और दो बार से इस सीट पर सांसद शेर सिंह घुबाया चुनौती दे रहे हैं। घुबाया हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं। इस सीट पर बीते 25 वर्षों से अकाली दल का ही कब्जा रहा है, लेकिन इस बार मुकाबला दो अकालियों के बीच ही है। राय सिख बहुल इस सीट पर वैसे घुबाया का पलड़ा भारी रहा है लेकिन सुखबीर बादल को कमजोर प्रत्याशी नहीं कहा जा सकता। देखना होगा, अब तक घुबाया का साथ देते रहे राय सिख बिरादरी के लोग इस बार क्या फैसला लेंगे।

तीसरी अहम सीट संगरूर है। इस सीट से आम आदमी पार्टी के राज्य प्रधान व सांसद भगवंत मान को कांग्रेस से सबसे अमीर प्रत्याशी केवल सिंह ढिल्लों चुनौती दे रहे हैं। अकाली दल की ओर से पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा भी मुकाबले में हैं। भगवंत मान की छवि इस हलके में काफी अच्छी मानी जा रही है। इसके अलावा यह सीट भगवंत मान के साथ-साथ पंजाब में आम आदमी पार्टी के अस्तित्व का भी फैसला करेगी।
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चौथी प्रमुख सीट गुरदासपुर है, जहां से कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ चुनाव मैदान में हैं। उनके मुकाबले भाजपा की ओर से बालीवुड अभिनेता सनी देओल को चुनाव में उतारने से मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। हलके में सनी के रोड शो भीड़ जुटाने में सफल हो रहे हैं। हालांकि यह भीड़ वोट में कितनी परिवर्तित होगी, यह कहना जल्दबाजी होगी। वैसे भाजपा इस सीट पर विनोद खन्ना के रूप में बालीवुड अभिनेता को आजमा चुकी है, जो दो बार यहां से सांसद बने थे। विनोद खन्ना के निधन के बाद हुए उपचुनाव में सुनील जाखड़ विजयी रहे थे।

पांचवीं वीवीआईपी सीट पटियाला है, जहां से मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर कांग्रेस की प्रत्याशी हैं। गृह क्षेत्र होने के नाते यह सीट कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न है। वैसे 2014 में परनीत कौर पर आप प्रत्याशी धर्मवीर गांधी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इस बार स्थिति कुछ अलग है। धर्मवीर गांधी आप से अलग होकर अपनी पार्टी बनाकर चुनाव में उतरे हैं जबकि आप ने भी अपना प्रत्याशी उतारा है। इनके साथ ही, अकाली दल ने पूर्व मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा को इस सीट पर टिकट दिया है।
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