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कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए किसी चुनौती से कम नहीं लोकसभा चुनाव 2019, स्पेशल इंटरव्यू पढ़ें

Sun, 19 May 2019 06:54 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
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देश भर में मोदी लहर के बीच पंजाब में कांग्रेस सरकार बनाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए लोकसभा चुनाव 2019 किसी चुनौती से कम नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान भी पंजाब से उम्मीदें लगाए बैठा है। पंजाब में पार्टी वही प्रदर्शन दोबारा दोहराना चाह रही है जो विधानसभा चुनाव में कैप्टन के नेतृत्व में हुआ था। ऐसे में कैप्टन ने दोबारा से एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। पंजाब सरकार के दो साल के कार्यकाल और विकास के ऐजेंडे को लेकर कैप्टन चुनावी समर में उतर चुके हैं। पेश हैं अमर उजाला से पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की बातचीत के मुख्य अंश।
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बठिंडा बादलों का गढ़ रहा है, हरसिमरत के मुकाबले राजा वड़िंग कमजोर तो नहीं साबित होंगे।
- मैं कहूंगा कि सुखबीर बादल और हरसिमरत कौर बादल समेत अकालियों की स्थिति बहुत खराब है। मोदी कैबिनेट में होने के बाद भी हरसिमरत पंजाब या अपने लोगों के लिए कुछ नहीं कर सकीं। वह स्वार्थी और अभिमानी महिला है, जो समझती है कि बादल नाम के सहारे जीत जाएगी। पर सच यह है कि बादल नाम ही उसे हराएगा क्योंकि उसके परिवार ने अपने शासन के दौरान जो किया, वह लोग जानते हैं। लोग हरसिमरत के झूठ से तंग आ चुके हैं। सच्चाई यह है कि पंजाब में अब बादलों का कोई गढ़ नहीं है, उनके पास छिपने के लिए कोई जगह नहीं बची है।

15 साल बाद सुखबीर एक बार फिर लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं, उनके सामने घुबाया कितने मजबूत हैं।
- सुखबीर की स्थिति भी अपनी पत्नी से अच्छी नहीं है। लोग अब तक नहीं भूले हैं कि बादलों ने दस साल के राज में उनके साथ क्या किया था। वे यह भी नहीं भूले हैं कि बादलों की अगुवाई में अकालियों ने लोगों का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने की कोशिश की। लोग अब तक बरगाड़ी समेत बेअदबी की घटनाओं, कोटकपूरा और बहिबल कलां में फायरिंग को भी नहीं भूले हैं। मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि बठिंडा और फिरोजपुर में लोग अकालियों का सफाया कर देंगे। इनका हाल 2017 के विधानसभा चुनाव जैसा होगा।

गुरदासपुर में भाजपा ने फिर बॉलीवुड स्टार को उतारा है। भाजपा पहले भी एक स्टार विनोद खन्ना के सहारे यह सीट जीत सकी थी।
- पिछले दो सालों के दौरान पंजाब में चीजें बदली हैं। लोगों ने विकास देखा है, सांप्रदायिक तनाव और डर की जगह शांति देखी है। वे कभी भी उस दौर में नहीं जाना चाहेंगे। एक तरफ कांग्रेस सरकार ने राज्य में बहुत काम किए हैं। तो दूसरी तरफ सुनील जाखड़ भी लोगों की बीच रह कर ग्रास रूट लेवल पर काम करते रहे हैं। वह लोगों से जुड़े हैं, उनकी समस्याएं समझते हैं। सनी देओल को क्या पता है। उन्हें बालाकोट तक के बारे में नहीं पता, जिस मुद्दे पर उनकी पार्टी चुनाव लड़ रही है। उनकी पंजाब में कोई जड़ें नहीं हैं, चुनाव के तुरंत बाद वह मुंबई लौट जाएंगे। सनी की विनोद खन्ना के साथ कोई तुलना नहीं हो सकती। विनोद परिपक्व और विनम्र इंसान थे। सनी एक अदाकार हैं, जिन्हें राष्ट्रीय मुद्दे तक नहीं पता। उनका घमंड इसी से पता चलता है कि वह गुरदासपुर के लोगों को बीच में छोड़ कर दूसरे राज्यों में प्रचार के लिए चले गए। उनके दिल में गुरदासपुर के लोगों के लिए कोई सम्मान नहीं है।

 

कुंवर विजय प्रताप के मामले में आपकी कोशिशों के बावजूद चुनाव आयोग ने अकाली दल की ही मानी
- यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चुनाव आयोग भी दूसरे लोकतांत्रिक संस्थानों की तरह मोदी सरकार का खिलौना बन गया है, पर उसके आदेश सिर्फ चुनाव आचार संहिता लागू रहने तक ही हैं। मैं पहले ही स्पष्ट कर चुका हूं कि चुनाव खत्म होते ही आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह को एसआईटी में वापस लाया जाएगा। वह जांच पूरी करेंगे और दोषियों के खिलाफ सबूत जुटाएंगे। दोषियों को उनके पापों की सजा मिलेगी। अकाली सिर्फ इसे कुछ दिन तक टालने में कामयाब जरूर हो गए हैं।

बरगाड़ी और बहिबल कलां की घटनाओं के बाद आप पर अकालियों के खिलाफ कट्टरपंथियों को बढ़ावा देने का आरोप है। क्या यह आपकी धर्मनिरपेक्ष साख को प्रभावित नहीं करता है
- दरअसल मुझे बताया गया है कि मुझ पर अकालियों के साथ नरमी बरतने के आरोप हैं। सच कहूं तो यह बरगाड़ी और बहिबल कलां मामलों पर नरम या कठोर होने का सवाल नहीं है। मैं सिर्फ बिना किसी राजनीतिक बदले की भावना के कानूनी प्रक्रिया के जरिए दोषियों को सजा दिलाने की कोशिश कर रहा हूं। एसआईटी अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी, वही तय करेगी कि दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाए। मैं हमेशा कट्टरपंथी राजनीति का विरोध करता रहा हूं।

2014 में करीब 25 प्रतिशत वोट और चार सीटें जीत कर धमाका करने वाली आम आदमी पार्टी इस बार चुनाव में कितना असर डालेगी। क्या किसी हलके में पार्टी निर्णायक भूमिका में लग रही है।
- आप पूरे देश में अपनी ताकत खो चुकी है। पंजाब में तो यह बंट गई है। अब इसके पास न तो कोई नेतृत्व है और न ही कोई जीतने योग्य उम्मीदवार। पंजाब के लोगों का आप से पूरी तरह मोह भंग हो चुका है। जो लोग विकास और कल्याण चाहते हैं, वे गली मोहल्ले की राजनीति कर रहे ऐसे नेताओं के साथ नहीं जुड़ेंगे। वास्तव में इन चुनाव में आप का कोई प्रभाव नहीं दिखता।

सुखपाल खैरा ने कुछ पार्टियों का अलायंस बनाया है, शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) भी मैदान में हैं। इनकी क्या भूमिका होगी। क्या ये कोई सीट जीतने की स्थिति में हैं। अगर नहीं, तो ये किसको नुकसान पहुंचाएंगे।
- किसी चुनाव से पहले आने वाले इन छिटपुट गुटों के पास न तो कोई आधार है, न ही टिके रहने की शक्ति। उनके पास लोगों में विश्वास पैदा करने के लिए पर्याप्त समय तक नहीं है। जब तक उनके पास वास्तव में कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं होगा, कोई भी ऐसी पार्टी के पक्ष में वोट नहीं डालना चाहेगा। मैं इन दलों में किसी भी नेता को एक सशक्त उम्मीदवार के रूप में नहीं देखता जो कांग्रेस जैसी स्थापित और विश्वसनीय पार्टी को चुनौती पेश कर सके।

क्या पंजाब की चुनावी जंग परंपरागत प्रतिद्वंद्वियों कांग्रेस और शिअद-भाजपा में ही होगी।
- सच कहूं, तो मुझे कांग्रेस के सामने कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं दिख रहा। आप और शिअद दोनों के पास अपने प्रचार को आगे बढ़ाने के लिए कोई नेतृत्व और रचनात्मक एजेंडा नहीं है। अगर दोनों पार्टियों में से किसी के टक्कर देने की थोड़ी बहुत संभावना है तो वह शिअद-भाजपा है। क्योंकि उसके पास पुराने और स्थापित नेता हैं। इसके अलावा चूंकि केंद्र में भाजपा सत्ता में है इसलिए वह इन चुनावों में कुछ भूमिका निभाएगी।

इस चुनाव को कौन से प्रमुख मुद्दे प्रभावित कर सकते हैं।
- जैसा कि मैंने अभी कहा है कि मुख्य मुद्दा विकास का है। पिछले दो वर्षों में हमने दिखाया है कि कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो पंजाब को प्रगति की राह पर ले जा सकती है। हमने केवल दो साल में जो हासिल किया है, वह अकाली-भाजपा ने दस सालों में नहीं किया। केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार के फर्जी वादों से लोग थक गए हैं। ठीक उसी तरह जैसे वे दो साल पहले पंजाब में शिअद-भाजपा से थके हुए थे। विधानसभा चुनावों की तरह ही लोग विकास के लिए, अपने और पंजाब के बेहतर कल के लिए मतदान करना चाहते हैं।

आपकी सरकार ने दो साल में मिसाल देने वाला क्या काम किया है कि लोग फिर से कांग्रेस को वोट दें।
- यह एक लंबी सूची है। लेकिन अगर मैं इसे कुछ शब्दों में कहूं, तो हमने लोगों का मूड बदल दिया है। वे पूरी तरह से निराशा में जी रहे थे। असुरक्षित थे और अपने बच्चों के भविष्य के प्रति नाउम्मीद। हमने अर्थव्यवस्था और उद्योग को पटरी पर ला दिया। राज्य में निवेश किया जा रहा है। किसान अब एक उम्मीद में हैं। कानून-व्यवस्था एक दशक बाद वापस गई है। हमने ड्रग्स की रीढ़ तोड़ दी है और बेरोजगार युवाओं के लिए नौकरियां सुनिश्चित की हैं। सामाजिक रूप से हाशिए पर खड़े वर्गों के लिए बहुत सारे कल्याणकारी उपाय शुरू किए हैं। राज्य में ढांचागत विकास हो रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

ज्यादातर सर्वे रिपोर्टों में पंजाब में बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा माना जा रहा है। कांग्रेस वोटरों को कैसे समझा पाएगी
- पंजाब के लोग समझदार हैं, वे जानते हैं कि हमारी सरकार ने रोजगार की दिशा में दो सालों में वो किया है जो अकाली दस सालों में करने में नाकाम रहे। लोग जानते हैं कि अगर हम दो साल में 8.25 लाख नौकरियां दे सकते हैं तो अगले तीन सालों में इससे कहीं ज्यादा देंगे। यही वादा हमने लोगों से किया था।बेरोजगारी हमारी सरकार के लिए एक चिंता का विषय है। मुझे लगता है कि जब तक मेरा कार्यकाल पूरा होगा यह समस्या नहीं रहेगी।

 
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केंद्र में अगर कांग्रेस की सरकार आती है तो आप पंजाब के लिए क्या लाएंगे
- राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस पहले ही किसानों से कई वादे कर चुकी है। पंजाब में भी हमारी प्राथमिकता यही रहेगी। वे लंबे समय से इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। हमारी सरकार केंद्र से मिल कर यह सुनिश्चित करेगी किसानों को जल्द से जल्द उनका हक मिले। रोजगार दूसरा मुद्दा है, हम केंद्र की मदद से घर घर रोजगार कार्यक्रम को आगे बढ़ाएंगे। तीसरा मुद्दा जीएसटी का है। राहुल ने वादा किया है कि इसमें सिंगल स्लैब लाया जाएगा। जीएसटी रिफंड में देरी से पंजाब काफी नुकसान झेल चुका है। मुलाजिमों का वेतन तक लेट हुआ। 31000 करोड़ के फूड अकाउंट का बोझ सूबे पर है, हम इसमें केंद्र की मदद लेंगे। पंजाब के सीमांत जिलों की मोदी सरकार ने अनदेखी की, उनके विकास का प्रयास किया जाएगा। मुझे विश्वास है कि अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार आई तो जितना हम अपने बूते पर कर सकते हैं, पंजाब उससे कहीं ज्यादा तेजी से विकास की राह पर चलेगा।
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