वाल्मीकि समुदाय को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बोर्ड-निगमों की चेयरमैनी का भरोसा दिलाकर मना तो लिया है, लेकिन इससे मुख्यमंत्री के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। टिकट न मिलने से नाराज और बागवत पर उतरे नेताओं में यह आस जगने लगी है कि उनके विरोध को देखते हुए कैप्टन उन्हें भी अपनी सरकार में कोई उच्च पद या किसी बोर्ड-निगम की चेयरमैनी ऑफर कर सकते हैं।
पंजाबी कांग्रेस द्वारा जालंधर, होशियारपुर और फिर फतेहगढ़ साहिब व फरीदकोट संसदीय सीटों पर आरक्षित वर्ग के नेताओं को टिकट दिया गया। इसके बाद सूबे के वाल्मीकि संगठन कांग्रेस के खिलाफ उठ खड़े हुए थे। इन संगठनों को एतराज इस बात का था कि रिजर्व सीटों पर पार्टी ने रविदास समुदाय के नेताओं को तो टिकट दिए, लेकिन वाल्मीकि समुदाय से किसी नेता को तरजीह नहीं दी गई।
वाल्मीकि समाज के नेताओं ने केवल प्रदेश इकाई ही नहीं, बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी तक पहुंच करके न सिर्फ अपना एतराज जताया, बल्कि कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ की यह कहते हुए शिकायत भी की कि दोनों नेताओं ने आलाकमान को वाल्मीकि समुदाय के बारे में अंधेरे में रखते हुए चहेतों को टिकट बांटे हैं।
वाल्मीकि समुदाय की मांग थी कि दो सीटों फतेहगढ़ साहिब और फरीदकोट सीटों पर पार्टी प्रत्याशी बदलकर वाल्मीकि समुदाय के नेताओं को टिकट दें। आखिरकार नाराज समुदाय को मनाने के लिए कैप्टन को खुद आगे आना पड़ा और उन्होंने वाल्मीकि समुदाय की इस मांग को मान लिया कि अगर चार सीटें अन्य आरक्षित वर्गों को दी गई हैं, तो उतने ही बोर्ड-निगमों के चेयरमैन पद वाल्मीकि समुदाय को दिए जाएं।
दो दिन पहले हुई बैठक में कैप्टन ने दो चेयरमैन पद अलॉट करने पर तुरंत हामी भी भर दी। अब मामला बाकी सीटों पर असंतुष्टों को मनाने का है। कैप्टन ने वाल्मीकि समुदाय के लिए जो तरीका अपनाया, माना जा रहा है कि ऐसा ही तरीका अन्य असंतुष्टों को मनाने के लिए इस्तेमाल होगा। इसके तहत प्रत्येक सीट पर, टिकट न मिलने से नाराज नेता के कद को देखते हुए उन्हें चेयरमैनी या सरकार में उच्च पद ऑफर हो सकता है।
पांच सीटों पर अभी बगावत के हालात
फतेहगढ़ साहिब और फरीदकोट सीटों को लेकर उठे विरोध को दबाने के बाद कैप्टन के सामने संगरूर, पटियाला, आनंदपुर साहिब, होशियारपुर और जालंधर में बागी सुरों को साधने की चुनौती है। जालंधर और होशियारपुर में तो टिकट न मिलने से नाराज नेताओं में विधायक और सांसद स्तर के नेता हैं, जिनके बारे में आशंका यह है कि वे कांग्रेस प्रत्याशी के मुकाबले निर्दलीय भी चुनाव में उतर सकते हैं।
मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र पटियाला में काका रणदीप सिंह ने परनीत कौर को टिकट दिए जाने का विरोध शुरू कर दिया है जबकि जालंधर में मोहिंदर सिंह केपी कांग्रेस प्रत्याशी के समानांतर चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर चुके हैं। होशियारपुर में भी जालंधर जैसे हालात है जबकि संगरूर में सुरजीत सिंह धीमान अपने बेटे को टिकट नहीं दिए जाने से नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर चुके हैं।