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लोकसभा चुनाव 2019: पंजाब की सियासत से एनआरआई का मोहभंग, 'आप' का हाल देख टूटा दिल

Thu, 09 May 2019 11:17 AM IST
खुशबू गोयल अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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लोकसभा चुनाव 2019 के तहत पंजाब में 19 मई को मतदान है, लेकिन प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले एनआरआई का इससे मोह भंग हो गया है। मतदान में सिर्फ दस दिन बचे हैं और प्रवासी पंजाबी अब तक चुनाव प्रचार के लिए नहीं पहुंचे हैं। पंजाब में कोई भी चुनाव हो, सभी सियासी दलों के लिए एनआरआई महत्वपूर्ण होते हैं। उनके यहां वोट चुनिंदा ही हैं, लेकिन रसूख और पैसा काफी मददगार साबित होता है। सूबे में सबसे ज्यादा एनआरआई दोआबा से हैं। वे अपने गांवों और आसपास के इलाकों में विकास कार्य भी करते हैं।
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इसके चलते उनका क्षेत्र में एक रुतबा होता है। उनके कहने पर उस क्षेत्र के वोट मिल सकते हैं। इसलिए सभी पार्टियां चुनावों में अपने समर्थक एनआरआई को पंजाब बुलाती हैं। कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के ज्यादातर देशों में एनआरआई विंग हैं। आम आदमी पार्टी ने तो इस वर्ग में सबसे अच्छा नेटवर्क बनाया था। सभी पार्टियों के समर्थक एनआरआई चुनावी सीजन में पंजाब आकर उनकी मदद करते हैं। लेकिन यह पहला मौका है जब चुनावी माहौल में एनआरआई नजर नहीं आ रहे हैं।

यूएस के पंजाब फाउंडेशन के संस्थापक चेयरमैन सुक्खी चाहल ने वहां से फोन पर अमर उजाला को बताया कि विधानसभा चुनाव में एनआरआई ज्यादा सक्रिय होते हैं। पर लोकसभा में भी काफी संख्या में आते हैं, जो इस बार नहीं आए। दरअसल एनआरआई का विश्वास टूटा है। चाहल ने कहा कि एनआरआई कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल की मदद करते आए हैं। मनप्रीत बादल ने पीपीपी बनाई तो उनकी भी मदद की। पर 2014 में उन्होंने आप के लिए पूरी ताकत झोंक दी। अपने कामकाज छोड़ दिए, आप को बेतहाशा फंड इकट्ठा कर के दिए। अपने लोगों को फोन कॉल्स की।
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आप की हरसंभव मदद की। फिर 2017 में भी उन्होंने आप की मदद की। पर उसके बाद आप का जो हाल हुआ, उसे देख कर वे खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। अब उन्हें किसी भी पार्टी पर भरोसा नहीं है, न ही चुनाव में उनकी कोई दिलचस्पी बची है।
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इंडियन ओवरसीज कांग्रेस एक्टिव

कांग्रेस की अप्रवासी विंग इंडियन ओवरसीज कांग्रेस एक्टिव हो गई है। अपने प्रमुख सैम पित्रोदा की अगुवाई में इसके सदस्य अलग-अलग देशों से पंजाब पहुंच गए हैं। पित्रोदा खुद दो दिन चंडीगढ़ और अमृतसर में रहे। यूएस इकाई के प्रधान महिंदर सिंह गिलजियां ने अपने खर्च पर जागरूकता बसें चलाई हैं, जो गांवों में जा रही हैं। न्यूयार्क निवासी करमजीत धालीवाल और उनके साथी संगरूर हलके में केवल ढिल्लों के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं। कनाडा इकाई के प्रधान अमरप्रीत औलख आनंदपुर साहिब हलके में मनीष तिवारी के लिए प्रचार कर रहे हैं। उधर, जालंधर से शिअद उम्मीदवार डॉ. चरनजीत अटवाल के बेटे इंदर इकबाल अटवाल ने बताया कि उनकी पार्टी के पक्ष में भी कई एनआरआई पहुंचे हैं। पार्टी की यूएस यूथ विंग के प्रधान अरविंदर सिंह लाखन जालंधर में डटे हैं।

खैरा को अंदरखाते समर्थन
आप से बगावत कर पंजाबी एकता पार्टी बनाने वाले सुखपाल खैरा को अंदरखाते समर्थन मिल रहा है। खैरा ने जब बगावत का एलान किया था, तभी बड़ी संख्या में एनआरआई उनके साथ आ गए थे। इसी से उनकी मुहिम को बल मिला था। एनआरआई ने उनको फंड देने के साथ-साथ विधायक और वॉलंटियर जोड़ने में भी मदद की। अभी भी एनआरआई अंदरखाते खैरा का समर्थन क रहे हैं, लेकिन खुल कर सामने नहीं आ रहे। एनआरआई का सबसे ज्यादा प्रभाव जालंधर और होशियारपुर सीटों पर है। दोनों जगह से खैरा के पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस के झंडे तले बसपा के उम्मीदवार लड़ रहे हैं। जिन्हें एनआरआईज की काफी मदद मिल रही है। उन्हें सिर्फ फोन आ रहा है कि इस गांव में इस व्यक्ति से मिलें, उसके बाद फंड और समर्थन का इंतजाम हो रहा है।

आप को फंड की किल्लत
एनआरआई के दम पर मजबूत सियासी जमीन तैयार करने वाली आम आदमी पार्टी इस बार मुश्किल में है। खैरा की बगावत के बाद पार्टी के एनआरआई विंग भी दोफाड़ हो गया था। बड़ी संख्या में लोग खैरा के हक में आ गए थे। जिसके बाद आप ने सारी इकाइयां भंग कर दी थीं। आप से नाराज एनआरआई इस बार कोई मदद नहीं कर रहे हैं। सिर्फ बठिंडा की रहने वाली कनाडा वासी जसकीरत कौर मान एक्टिव हैं। एनआरआईज की नाराजगी के चलते आप को फंड की काफी किल्लत झेलनी पड़ रही है।
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