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लोकसभा 2019: हरियाणा के चुनावी दंगल में पुरुषों का दबदबा, लागू नहीं होता 33 फीसदी का फॉर्मूला

Tue, 09 Apr 2019 03:37 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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Kumari shailja - फोटो : ANI
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हरियाणा के चुनावी दंगल में आधी आबादी पर पुरुष आज भी प्रधान हैं। क्योंकि कोई भी दल लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत सीटें नहीं देता। एक या दो टिकट देकर ही महिला नेताओं को चुप करा दिया जाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही होने जा रहा है। भाजपा ने दस में से आठ सीटों पर चेहरे घोषित कर दिए हैं। दो सीटों पर घोषणा बाकी है, जिनमें एक भी महिला उम्मीदवार नहीं होगी। आठ सीटों पर सात पुरुष और एक महिला उम्मीदवार सिरसा से सुनीता दुग्गल उतारी गई हैं।
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कांग्रेस ने अभी अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, लेकिन अंबाला से कुमारी सैलजा और भिवानी से श्रुति चौधरी का चुनावी रण में ताल ठोकना तय है। ऐसे में कांग्रेस ही ऐसी पार्टी होगी, जिससे सबसे अधिक दो महिला उम्मीदवार मैदान में उतरेंगी। इनेलो, आप, जजपा व बसपा-लोसुपा से भी महिला उम्मीदवारों में महिलाएं कम संख्या में, या न के बराबर होंगी। पिछले 40 वर्षों में केवल पांच महिलाएं ही लोकसभा चुनाव की नैया पार कर पाई हैं, वह भी पारिवारिक सियासी रसूख और राष्ट्रीय दलों की टिकट के बल पर।

आजाद उम्मीदवार के तौर पर कोई महिला आज तक हरियाणा से संसद का रास्ता नहीं तय कर पाई है। कांग्रेस से सबसे ज्यादा तीन बार व इनेलो से दो बार महिला सांसद बनीं। कांग्रेस से संसद पहुंचने वालों में कुमारी सैलजा के अलावा श्रुति चौधरी भी हैं। भाजपा की सुधा यादव और इनेलो से 1998 में प्रो. कैलाशो देवी व 1999 में भी कैलाशो देवी लोकसभा पहुंचीं। प्रदेश से पहली महिला सांसद बनने का गौरव चंद्रावती के नाम है। उन्होंने भारतीय लोक दल की टिकट पर 1977 में चुनाव जीता था। करनाल, रोहतक, हिसार, फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोनीपत की जनता ने आज तक एक बार भी किसी महिला को संसद में नहीं भेजा है।
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सैलजा तीन व कैलाशो देवी दो बार पहुंची संसद

महिला सांसदों की बात करें तो सबसे ज्यादा तीन बार कांग्रेस की कुमारी सैलजा संसद पहुंची। वह दो बार अंबाला और एक बार सिरसा आरक्षित सीट पर चुनी गईं। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के टिकट पर कैलाशो देवी दो बार कुरुक्षेत्र से जीतीं तो पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पौत्री श्रुति चौधरी भिवानी-महेंद्रगढ़ और भाजपा की सुधा यादव महेंद्रगढ़ से एक-एक बार लोकसभा पहुंचने में सफल रहीं। कैलाशो देवी अब कांग्रेस में हैं।

1999 में दो महिलाएं बनी सांसद
वर्ष 1999 में ही प्रदेश ने पहली बार दो महिला सांसदों महेंद्रगढ़ से भाजपा की सुधा यादव और कुरुक्षेत्र से इनेलो की कैलाशो को लोकसभा में भेजा था। महिलाओं के लिए वर्ष 2014 सबसे निराशाजनक रहा, जब एक भी महिला प्रदेश से संसद नहीं पहुंच पाई। अंबाला से इनेलो की कुसुम शेरवाल, भिवानी-महेंद्रगढ़ से कांग्रेस की श्रुति चौधरी और कुरुक्षेत्र से आम आदमी पार्टी की बलविंदर कौर को हार का मुंह देखना पड़ा था। पिछले आम चुनाव में भाजपा ने एक भी महिला उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा था।
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