हरियाणा के सियासी दंगल में तीन लालों के नाम से मशहूर बंसी लाल, देवी लाल और भजन लाल को मुख्यमंत्री रहने के बाद लोकसभा चुनाव में जनता ने सिर आंखों पर बिठाने के बजाय नकार दिया था। अतीत के झरोखे में देखें तो पूर्व मुख्यमंत्री बंसी लाल 1977 में आपातकाल के गुस्से का शिकार हुए और भिवानी लोकसभा सीट पर भारतीय लोकदल की चंद्रावती ने 1, 61, 242 वोटों से उन्हें पटखनी दे दी। चंद्रावती को 2,89,135 और कांग्रेस उम्मीदवार बंसी लाल को 1,27,893 वोट मिले थे।
जबकि, बंसी लाल को इससे ठीक पहले प्रदेश का तीसरा मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल हुआ था और वह 22 मई 1968 से 30 नवंबर 1975 तक मुख्यमंत्री रहे। हालांकि, इसके बाद 1980 और 1983 में बंसी लाल ने भिवानी से ही बड़े अंतर से जीत भी दर्ज की। बंसीलाल 11 मई 1996 से 23 मई 1999 तक भी प्रदेश के सीएम रहे। ताऊ देवीलाल को दो बार सीएम बनने का गौरव हासिल हुआ। पहली बार वह 21 जून 1977 से 28 जून 1979 तक और दूसरी बार 17 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 1989 तक मुख्यमंत्री रहे।
इसके बाद देवी लाल को तीन बार रोहतक लोकसभा सीट पर हार का मुंह भी देखना पड़ा। उन्हें कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 1991, 1996 व 1998 के लोकसभा चुनाव में हराया। 1999 में हालांकि हुड्डा को भी इनेलो के इंद्र सिंह से मात खानी पड़ी, मगर 2004 में कैप्टन अभिमन्यु को हराकर हुड्डा एक बार फिर कांग्रेस सांसद बने और दिल्ली से मुख्यमंत्री की कुर्सी पाकर हरियाणा लौटे। इसके बाद हुड्डा लगातार दो बार 2014 तक हरियाणा के सीएम रहे।
आईडी स्वामी से हार चुके हैं भजन लाल
वर्तमान में हुड्डा गढ़ी सांपला से विधायक हैं। सीएम रहे भजन लाल को भी लोकसभा चुनाव में लोगों ने आईना दिखा दिया और उन्हें 1999 में करनाल लोकसभा सीट पर हार झेलनी पड़ी। उन्हें भाजपा नेता आईडी स्वामी ने हराया था। इससे पहले 1998 में भजन लाल इसी सीट पर आईडी स्वामी को हरा चुके थे। इससे पहले भजन लाल 1989 में फरीदाबाद से भी सांसद रहे। केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, कुमारी सैलजा और आईडी स्वामी को भी हरियाणा में हार का सामना करना पड़ चुका है।
सुषमा स्वराज, कुमारी सैलजा को भी मतदाता दिखा चुके आईना
वर्तमान में केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज भी 1980 में करनाल लोकसभा सीट पर में चिरंजी लाल, 1984 में चिरंजी लाल और 1989 में चिंरजीत लाल के हाथों पराजित हो चुकी हैं। 1998 के चुनाव कुमारी सैलजा को सिरसा में डॉ. सुशील इंदौरा के हाथों हार झेल चुकी हैं। आईडी स्वामी को करनाल में ही 1998 में हार का मुंह देखना पड़ा था। 2004 में इनेलो नेता अभय चौटाला भी कुरुक्षेत्र सीट पर नवीन जिंदल के मुकाबले हार गए थे। 1980 में रामबिलास शर्मा को महेंद्रगढ़ सीट पर कांग्रेस के बीरेंद्र सिंह ने हराया था।