इनकार किया जब साकी ने तो सारे पैमाने टूट गए...इलेक्शन में शराब तो एक बहाना है, वास्तविक कारण तो वोट बढ़ाना है, लेकिन इस बार जाम छलकाने पर आयोग सख्ती बरतने जा रहा है। शहर के सभी बॉटलिंग प्लांट को निर्देश दिए गए हैं कि मांग से अधिक उत्पादन न किया जाए। कुल मिलाकर कहा जाए तो इस बार चुनावी समर में प्रोडक्शन को कंट्रोल करके शराब परोसने पर लगाम कसने की तैयारी है। पढ़िए रिपोर्ट...
एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट ने चुनाव के मद्देनजर शराब का स्टॉक रखने और कम रेट में शराब बेचे जाने पर नकेल कसने को रणनीति बनाई है। इस बार लोकसभा चुनाव में शराब की खरीद-फरोख्त पर आयोग की पैनी नजर रहेगी। इसके लिए बॉटलिंग प्लांट से लेकर ठेकों तक पर एक्साइज विभाग ने शिकंजा कस दिया है। अब बॉटलिंग प्लांट प्रतिदिन जितना उत्पादन करेंगे, उसकी रिपोर्ट रोज एक्साइज डिपार्टमेंट को उपलब्ध कराएंगे। प्रतिदिन प्रोडक्शन का डाटा आयोग को नहीं उपलब्ध कराने पर बॉटलिंग प्लांट का लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है।
डिपार्टमेंट ने चंडीगढ़ के 88 शराब ठेकों पर निगाह रखने के लिए तीन टीमें बनाई हैं। टीमों का काम सभी ठेकों की रेगुलर चैकिंग के साथ-साथ एक्साइज एक्ट के वॉयलेशन पर भी निगरानी रखना होगा। ठेकों के साथ टीमें शहर के बॉटलिंग प्लांट भी चेक करेंगी। वहीं, शराब की तस्करी पर रोक लगाने के लिए नाके भी लगाए जाएंगे। असिस्टेंट एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर आरके चौधरी ने बताया कि एक्साइज एक्ट का वॉयलेशन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोई भी एक्ट का वॉयलेशन करता है तो उसका लाइसेंस कैंसिल कर दिया जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी।