लोकसभा चुनाव 2019 में हारे पंजाब कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ को कांग्रेस फिर से चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। जाखड़ को प्रदेश में आने वाले दिनों में सात विधानसभा सीटों में से किसी एक पर उतारा जा सकता है। गुरदासपुर संसदीय सीट पर भाजपा के सनी देओल से हारने के बाद जाखड़ ने प्रदेशाध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा पार्टी आलाकमान को ई-मेल के जरिए भेज दिया था।
लेकिन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और अन्य विधायकों ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर आलाकमान को भेजते हुए मांग की है कि जाखड़ को प्रदेशाध्यक्ष पद पर बनाए रखा जाए। फिलहाल आलाकमान ने जाखड़ के इस्तीफे पर अभी फैसला नहीं लिया है लेकिन माना जा रहा है कि कैप्टन की सिफारिश को आलाकमान अवश्य महत्व देगा।
इस दौरान प्रदेश कांग्रेस ने जाखड़ को विधानसभा चुनाव जिताकर राज्य मंत्रिमंडल में जगह दिलाने की कोशिशों पर काम शुरू कर दिया है।
दरअसल, लोकसभा चुनाव में दो विधायक अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल और भाजपा के सोमप्रकाश के चुनाव जीतने से क्रमश: जलालाबाद और फगवाड़ा आरक्षित विधानसभा सीटें खाली हो गई हैं। सुखबीर ने तो विधायक पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है जबकि सोमप्रकाश भी जल्द ही अपना इस्तीफा दे देंगे।
इसके साथ ही इन दोनों सीटों पर अगले छह महीने में उपचुनाव भी तय हो गए हैं। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी से अलग हुए सात विधायकों के इस्तीफे भी विधानसभा स्पीकर के पास मंजूरी के लिए लंबित हैं। इनमें, अपनी पंजाब एकता पार्टी बनाकर बठिंडा संसदीय सीट से चुनाव लड़ने वाले भुलत्थ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा का इस्तीफा भी शामिल है,
वहीं 84 दंगों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के विरोध में सियासत छोड़ने वाले दाखा से आप विधायक एचएस फूलका का इस्तीफा भी विचाराधीन है। इनके अलावा आप से अलग हुए विधायकों के इस्तीफे भी विचाराधीन हैं। प्रदेश कांग्रेस इन्हीं खाली हो रही सीटों का अवलोकन कर रही है कि इनमें से किस सीट पर जाखड़ को चुनाव में उतारना सही रहेगा।
कांग्रेस पार्टी सूत्रों के अनुसार, एचएस फूलका का इस्तीफा अगर स्वीकार कर लिया जाता है तो खाली होने वाली दाखा सीट को सुनील जाखड़ के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। यह विधानसभा क्षेत्र लुधियाना संसदीय सीट के तहत आता है, जहां से कांग्रेस से रवनीत सिंह बिट्टू लगातार दूसरी चुनाव जीते हैं।
पार्टी का यह भी मानना है कि यह क्षेत्र कांग्रेस समर्थकों का रहा है और जाखड़ को इस हलके से चुनाव जीतने में कोई कठिनाई नहीं होगी। इस बीच सुनील जाखड़ के करीबियों का कहना है कि जाखड़ फिलहाल विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं और उनकी ओर से कोई पेशकश भी नहीं की गई है।
फिर भी, कुछ कांग्रेस नेताओं का मानना है कि जाखड़ के लिए पांच साल इंतजार करने की बजाए विधानसभा चुनाव में उतरना ज्यादा अच्छा रहेगा और पार्टी उन्हें इसके लिए मना लेगी।