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लोकसभा चुनाव 2019: इस बार मोबाइल एप से चुने जाएंगे कांग्रेस के उम्मीदवार, शुरू हो गया सर्वे

Mon, 25 Mar 2019 04:47 PM IST
खुशबू गोयल अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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राहुल गांधी
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कांग्रेस के उम्मीदवार इस बार शक्ति मोबाइल एप से चुने जाएंगे। लोगों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर ही पार्टी कैंडिडेट का फैसला करेगी। इसके लिए पहले चरण में तीन लोकसभा हलकों आनंदपुर साहिब, जालंधर और संगरूर में कॉलिंग का काम शुरू हो गया है। इसके बाद अन्य हलकों को कवर किया जाएगा।
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कांग्रेस ने कुछ माह पहले ही शक्ति एप पर ज्यादा से ज्यादा लोगों का रजिस्ट्रेशन करवाने को मुहिम चलाई थी। हर हलके में कई हजार लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। उनका डाटा पार्टी के पास आ चुका है। अब उनसे फीडबैक लेने का काम शुरू किया गया है।

इसके तहत हर लोकसभा हलकों में पांच हजार लोगों से उम्मीदवार के बारे में राय पूछी जाएगी। जो जवाब संतोषजनक नहीं होंगे, वे सर्वे में शामिल नहीं किए जाएंगे। यह सारा डाटा बंगलूरू में बनाए गए खास वार रूम में सेव किया जाएगा। इसके लिए कई नेशनल कोआर्डिनेटर बनाए गए हैं। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा की जिम्मेदारी कमल कांत शर्मा को दी गई है।
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सब कुछ टॉप सीक्रेट

सर्वे में इतनी एहतियात बरती जा रही है कि डाटा लीक होने की गुंजाइश नहीं रखी गई है। पंजाब में प्रोजेक्ट का इंचार्ज प्रदेश महासचिव कैप्टन संदीप संधू को बनाया गया था। लेकिन वह सिर्फ यह पता कर सकते हैं कि कितने रजिस्ट्रेशन हुए है। डाटा के बारे में वह नहीं जान सकते हैं। ऊपरी स्तर पर भी पूरी गोपनीयता रहेगी। जहां डाटा सेव होगा, वहीं हलके के बजाय एक कोड नंबर दिया जाएगा। जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की टीम मंथन करेगी, तभी पता लगेगा कि यह सर्वे किस हलके का है।

ये पूछे जा रहे हैं सवाल
सर्वे के लिए आने वाली कॉल्स में लोगों से पूछा जा रहा है कि वह किसे उम्मीदवार चाहते हैं और क्यों। क्या वह सामाजिक है, शिक्षित है या कोई एनजीओ चला रहा है। जहां मौजूदा सांसद कांग्रेस के हैं, वहां पूछा जा रहा है कि मौजूदा सांसद को क्यों नहीं चाहते। क्या वह लोगों से मिलता नहीं हैै, उसका व्यवहार ठीक नहीं है या वह भ्रष्ट है।
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सर्वे से निकला दिग्विजय का नाम

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का नाम भी इसी सर्वे से निकला है। उनका राज्यसभा का कार्यकाल पड़ा है। न तो उन्होंने भोपाल से लड़ने की इच्छा जताई थी, न पार्टी में ऐसी कोई बात चल रही थी। लेकिन सर्वे में नाम आने के बाद उन्हें भोपाल से लड़ाने का फैसला किया गया। पंजाब की इंचार्ज आशा कुमारी का नाम भी कांगड़ा से आया है। उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत को भी इसी आधार पर कैंडिडेट बनाया गया है।

सिफारिशों का दौर खत्म
कांग्रेस में चुनाव के समय दावेदारों को पंजाब से लेकर दिल्ली तक के नेताओं की खुशामद करनी होती थी। पैनल में अपना नाम डलवाने को सिफारिश लगवानी पड़ती थी। लेकिन मोबाइल एप के बाद वह दौर खत्म हो गया। इस बार अब तक पंजाब की स्क्रीनिंग कमेटी की भी सिर्फ एक ही बैठक हुई है। दिल्ली से कोई ऑब्जर्वर भी नहीं आए। माना जा रहा है कि पार्टी सर्वे के आधार पर ही उम्मीदवार तय करेगी।

तीन राज्यों में सफल रहा था प्रयोग
कांग्रेस ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में शक्ति मोबाइल एप का प्रयोग किया था। तीनों राज्यों में उम्मीदवारों का फैसला इसी सर्वे के आधार पर किया गया था। जिसके दम पर तीनों राज्यों में पार्टी की सरकार बनी। बाद में सीएम का फैसला भी इसी फीडबैक के जरिए किया गया था।
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