फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लोकसभा चुनाव 2019: भाजपा के नए गढ़ करनाल में कांग्रेस की डगर पथरीली, बदल चुके हालात

Thu, 09 May 2019 11:31 AM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
मनोहर लाल खट्टर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर देखें तो कांग्रेस का गढ़ रहा करनाल अब भाजपा के कब्जे में है। सत्ताधारी दल अब इसे अपना गढ़ बना चुका है। सीएम मनोहर लाल के यहां से होने के कारण जिले में ही नहीं पूरे संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस की पकड़ कमजोर पड़ी है। करनाल और पानीपत जिले में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है। 1999 के बाद 2014 में भाजपा ने करनाल संसदीय क्षेत्र में जीत हासिल की थी। इससे पहले यहां भाजपा सिर्फ 1996 में ही जीती। 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत का असर उसी साल हुए विधानसभा चुनाव पर इतना पड़ा कि कांग्रेस यहां धराशायी हो गई।
विज्ञापन


अब कांग्रेस अपने पुराने गढ़ में फिर से वापसी की कोशिश में है। भाजपा प्रत्याशी संजय भाटिया के मुकाबले में कांग्रेस के गन्नौर से विधायक कुलदीप शर्मा हैं। उनके पिता चिरंजी लाल शर्मा इस सीट से 1980, 1984, 1989 और 1991 में लगातार चार बार सांसद रहे हैं। 1967 से 2014 तक हुए चुनाव में कांग्रेस कुल नौ बार जीती तो भाजपा मात्र तीन बार। लेकिन, 2014 के बाद हालात बदले हुए हैं। सीएम मनोहर लाल के करनाल से होने के कारण कांग्रेस कमजोर हुई है। इससे कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा की संसद पहुंचने की राह आसान नहीं दिख रही।

कुलदीप का मुकाबला यहां संजय भाटिया से ही नहीं, पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम मनोहर लाल से भी है। चूंकि, भाजपा यहां चुनाव मोदी-मनोहर के नाम पर लड़ रही है। कुलदीप शर्मा को मुश्किल यह भी पेश आ रही है कि उन्होंने गन्नौर को कर्मक्षेत्र बनाने के बाद करनाल की राजनीति से ज्यादा नाता रखा ही नहीं। भाजपा के पंजाबी चेहरे के मुकाबले कांग्रेस ने ब्राह्मण चेहरे पर दांव खेला है। ब्राह्मण बहुल इस सीट पर यह कितना खरा उतरता है, ये 23 मई को ही तय होगा। इनेलो ने धर्मबीर पाढ़ा तो जजपा-आप ने कृष्ण कुमार अग्रवाल पर भरोसा जताया है, दोनों ही मुकाबले में नहीं दिख रहे। 
विज्ञापन

स्टार प्रचारकों की नहीं उतारी फौज

करनाल में जीत दर्ज करने के लिए कांग्रेस हाईकमान भी कोई ज्यादा गंभीर नहीं दिख रहा। कुलदीप शर्मा को चुनावी दंगल में झोंकने के बाद पार्टी की ओर से यहां कोई खास रणनीति नहीं तैयार की गई। अभी तक न तो राहुल गांधी न ही प्रियंका गांधी ने कोई जनसभा की है। अन्य स्टार प्रचारकों में भी कोई बड़ा चेहरा प्रचार करने नहीं पहुंचा है। कुलदीप को कांग्रेस ने एक तरह से अकेले ही मैदान में छोड़ दिया है।

उलटफेर के लिए मशहूर यह सीट
करनाल लोकसभा सीट गठन के बाद से ही बड़े उलटफेर के लिए जानी जाती है। हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भजनलाल एक बार यहां से सांसद बने और एक बार हारे भी। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रहे आईडी स्वामी करनाल से दो बार जीते और दो बार हारे। जबकि भाजपा की बड़ी नेता सुषमा स्वराज को यहां दो बार हार मिली।

3,60,147 वोटों से जीती थी भाजपा
2014 में करनाल से भाजपा के अश्विनी कुमार ने बड़ी जीत हासिल की थी। उन्होंने यहां से दो बार लगातार कांग्रेस सांसद रहे डॉ. अरविंद कुमार को 3,60,147 वोटों से हराया था। अश्विनी को कुल 5,94,817 वोट मिले थे, जबकि अरविंद कुमार को 2,34,670 वोट।
विज्ञापन

भाजपा के कब्जे में आठ विधानसभा, एक आजाद विधायक

करनाल लोकसभा क्षेत्र में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं। इनमें नीलोखेड़ी, इंद्री, करनाल, घरौंदा, असंध, पानीपत ग्रामीण, पानीपत सिटी, इसराना और समालखा शामिल हैं। आठ सीटें भाजपा के कब्जे में हैं, जबकि समालखा से आजाद विधायक रविंद्र मछरौली हैं। सीएम के अलावा इस लोकसभा क्षेत्र से परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार व राज्य मंत्री कर्णदेव कांबोज आते हैं। सभी भाजपा विधायकों को बड़ी लीड देते हुए अपनी साख बरकरार रखनी होगी।

राजा कर्ण के नाम से बना करनाल
करनाल का तरावड़ी क्षेत्र धान के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। यहां से अनेक देशों को चावल का निर्यात होता है। अनेक बड़ी फैक्ट्रियां हैं, जिसमें वनस्पति तेल, इत्र और शराब बनती है। पर्यटन के नजरिये से कलंदर शाह गुंबद, छावनी चर्च और सीता माई मंदिर खास हैं। यही वह स्थान है जहां सीता धरती की गोद में समा गईं थी। करनाल शहर के बीचोबीच 100 फुट ऊंचा चर्च भी आकर्षण का केंद्र है, इसका निर्माण सेंट जेम्स ने कराया था। करनाल शहर को महाभारत के राजा कर्ण ने बसाया था, राजा कर्ण के नाम पर ही शहर का नाम करनाल पड़ा। यह शहर पृथ्वीराज चौहान का भी गढ़ रहा, आज भी शहर में चौहान का किला मौजूद है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें