अमृतसर लोकसभा सीट से किसी हैवीवेट कैंडिडेट को उतारने के मकसद से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, बॉलीवुड अभिनेता सनी देयोल को मनाने पहुंचे। पुणे में हुई बैठक का नतीजा क्या निकला, यह तो नहीं पता, लेकिन इतना साफ है कि अमृतसर के लिए भाजपा और शाह कोई भी कसर बाकी नहीं रखना चाहते।
अमरोहा के भाजपा नेता तरुण राठी ने शुक्रवार शाम को अपनी फेसबुक वाल पर एक फोटो पोस्ट की जिसमें अमित शाह और सनी देयोल बैठे हैं, साथ ही राठी भी नजर आ रहे हैं। राठी ने लिखा कि ‘आज पुणे में प्रिय मित्र सनी देयोल व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी के साथ लोकसभा चुनाव को लेकर चर्चा की।’ राठी ने इस फोटो के बारे में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
लेकिन इतना तय है कि भाजपा किसी भी हालत में सनी को अमृतसर से लड़ाने की कोशिश में है। इससे पहले पार्टी के सीनियर नेताओं की कई बार सनी देओल से बात हो चुकी है। लेकिन वह फिलहाल राजनीति में आने को तैयार नहीं हैं जिसके बाद अमित शाह उन्हें मनाने पहुंचे। वह मना पाए या नहीं, यह आने वाले दिनों में पता चलेगा। वह मान गए तो अमृतसर में पार्टी की राह आसान होगी, वरना कैंडिडेट ढूंढना चुनौती होगी। प्रदेश के किसी भी नेता को फिलहाल मीटिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
होशियारपुर में भी फंसा पेंच
होशियारपुर सीट पर भी पार्टी अब तक फैसला नहीं कर सकी है। आंतरिक सर्वे में विजय सांपला की स्थिति थोड़ी कमजोर है। लेकिन दूसरे प्रमुख दावेदार सोम प्रकाश गुटबाजी का शिकार हो जाएंगे। अगर जीत गए तो उपचुनाव का सामना करना पड़ेगा। भाजपा का एक वर्ग आप से भाजपा में आए हरिंदर खालसा को भी विकल्प मान रहा है। हिंदू सीट पर सिख उम्मीदवार के सवाल पर उनकी दलील है कि वह रविदास बिरादरी से हैं, जिनका यहां वर्चस्व है। वहीं, गुरदासपुर सीट से कविता खन्ना की उम्मीदवारी लगभग तय है।
पार्टी ने शुरू की तैयारी
भाजपा नेतृत्व ने भले ही तीनों सीटों पर कैंडिडेट घोषित न किए हों, पर पार्टी ने तैयारी शुरू कर दी है। तीनों हलकों में चुनाव कार्यालय खोल दिए गए हैं। हालांकि होशियारपुर में कार्यालय विवादों में आ गया क्योंकि वहां सांपला का पहले से दफ्तर है। सारा वार रूम और कॉल सेंटर अमृतसर शिफ्ट कर दिया गया है। पार्टी ने तीनों हलकों में 39-39 मेंबरी चुनाव समितियां बनाई थीं, उनकी बैठकें लगातार हो रही हैं। सभी को कह दिया है कि कैंडिडेट कोई भी आए, बूथ स्तर पर अपनी पूरी तैयारी करें।
शिअद भी दो सीटों पर उलझी
भाजपा का सहयोगी शिरोमणि अकाली दल भी दो सीटों पर उलझी हुई है। चुनाव प्रचार कई दिन पहले शुरू होने के बाद भी पार्टी ने बठिंडा से अब तक हरसिमरत कौर बादल को औपचारिक तौर पर उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। पार्टी यहां से कांग्रेस कैंडिडेट का इंतजार कर रही है। वहीं, कांग्रेस को अब तक कोई कैंडिडेट नहीं मिला है। दावेदार उतने मजबूत नहीं हैं। सर्वे में मनप्रीत बादल मजबूत हैं, पर वह मना कर चुके हैं। नवजोत कौर सिद्धू भी मना कर चुकी हैं।
अमृतसर पर खत्म नहीं हो रहा असमंजस
अमृतसर में पिछली बार भाजपा के दिग्गज नेता अरुण जेटली को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने करीब एक लाख वोट से हराया था। पीएम नरेंद्र मोदी की प्रचंड लहर में इस हार को पार्टी अब तक पचा नहीं पाई है। पार्टी ने अमृतसर जीतना इस बार प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। हाल ही में अमृतसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की समन्वय बैठक हुई। उसमें भी अमृतसर से उम्मीदवार पर मंथन किया गया। संघ ने शहरवासियों से भी फीडबैक लिया है कि कैसा उम्मीदवार होना चाहिए। स्थानीय या बाहरी, पर वे भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके।
स्थानीय नेताओं पर दांव नहीं खेलना चाहती भाजपा
अमृतसर जीतने की उम्मीद के साथ भाजपा स्थानीय दावेदारों पर दांव नहीं खेलना चाहती क्योंकि वे गुटबाजी का शिकार हो जाएंगे। रजिंदर मोहन छीना तीन बार हार चुके हैं। अनिल जोशी के तो प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक ही खिलाफ हैं। यहां कोई बाहरी उम्मीदवार ही पार्टी की नैया पार लगा सकता है। इसलिए भाजपा शुरू से ही किसी सेलेब्रिटी की तलाश कर रही थी। सबसे पहले पूनम ढिल्लों, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के नाम चले। किरण खेर को अमृतसर से लड़ाने का मन भी बनाया, पर उन्होंने मना कर दिया।