ट्रेजडी किंग के नाम से मशहूर कद्दावर जाट नेता और सर छोटू राम के नाती चौधरी बीरेंद्र सिंह ने अपनी अगली पीढ़ी को आखिरकार हरियाणा की सक्रिय राजनीति में उतार ही दिया। आईएएस बेटे बृजेंद्र सिंह को राजनीति में लाने की तैयारी बीरेंद्र सिंह लंबे समय से कर रहे थे, लेकिन उन्होंने मौका 2019 के आम चुनाव का चुना और हिसार से बेटे को चुनावी रण में उतार दिया।
बीरेंद्र के लिए बेटे को जिताकर संसद में भेजना किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि उन्होंने बेटे को देवीलाल और भजन लाल के गढ़ में चक्रव्यूह भेदने के लिए भेजा है तो संघर्ष करना ही होगा। कांग्रेस के साथ बीरेंद्र सिंह 42 साल तक रहे और उन्हें वहां ट्रेजडी किंग का खिताब मिला। लेकिन बीरेंद्र को भाजपा के दामन में फूल ही फूल मिले हैं।
अगस्त 2014 में भाजपा ज्वॉइन करने के बाद बीरेंद्र सिंह राज्यसभा से संसद पहुंचे और केंद्रीय मंत्री का पद भी पाया। 2014 के विधानसभा चुनाव में जींद के उचाना कलां से पत्नी प्रेमलता के लिए टिकट पाया और उन्हें विधायक भी बनवाया। अब बारी बेटे की थी, जिसके लिए टिकट पाने में भी बीरेंद्र सिंह सफल हो गए।
कांग्रेस में रहते बीरेंद्र सिंह की हरियाणा का सीएम व केंद्र में मंत्री बनने की हसरत पूरी नहीं हो सकी। हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री बीरेंद्र सिंह वैसे तो रिश्ते में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के भाई हैं, लेकिन दोनों में छत्तीस का राजनीतिक आंकड़ा है। हुड्डा विरोध के चलते ही उन्होंने 2014 में भाजपा का दामन थामा था। बीरेंद्र पांच बार हरियाणा विधानसभा में भी पहुंचे हैं।