पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के अमृतसर संसदीय हलके से चुनाव लड़ने की अटकलों के बाद भाजपा को एक ऐसे उम्मीदवार की तलाश है, जो खोई जमीन को दोबारा फतेह करने की कुव्वत रखता हो। कुछ नेता प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर चुनावी दौर पार करने का जुगाड़ करते हुए टिकट की दावेदारी पेश कर रहे हैं। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जो पिछले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में अपने घर का बूथ तक नहीं जीत पाए थे। नवजोत सिद्धू के कांग्रेस में शामिल हो जाने के बाद अमृतसर सीट जीतना भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
श्वेत मलिक भी अपना घर तक नहीं जीत पाए
बता दें, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद श्वेत मलिक 2012 नगर निगम चुनाव उस समय हार गए थे, जब वे पांच साल तक गुरुनगरी के मेयर पद पर विराजमान थे। चुनाव हारने के बाद वे 2012 से 2014 तक राजनीतिक वनवास पर चले गए थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली अमृतसर से चुनाव मैदान में उतरे। तब श्वेत मलिक का राजनीतिक वनवास खत्म हुआ था। हालांकि उस चुनाव में भी मलिक अपने घर का बूथ और वार्ड नहीं जीत पाए थे।
तरुण चुघ केंद्रीय नेतृत्व में, फिर भी हार गए
टिकट के अन्य दावेदार तरुण चुघ राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। चुघ दो बार 2012 और 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। दोनों चुनाव में उन्हें अमृतसर सेंट्रल हलके से करारी शिकस्त मिली। बाद में उन्हें अरुण जेटली के चुनाव संगठन का काम सौंपा गया, लेकिन वे अपने घर का बूथ तक नहीं जीत पाए। केंद्रीय नेतृत्व में होने के बावजूद चुघ ने पार्टी संगठन को मजबूत करने और स्थानीय नेताओं के बीच छिड़े विवाद को हल करने का कभी कोई प्रयास नहीं किया।