लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर आनंदरपुर साहिब संसदीय क्षेत्र के लोगों को इस बार वादे करने वाले नहीं, बल्कि काम करने वाला सांसद चाहिए। सिखों की ऐतिहासिक धार्मिक नगरी श्री आनंदपुर साहिब। यहां दशम पातशाही श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिख पंथ का सृजन किया था। 1951 में भारत के पहले लोकसभा चुनाव के समय आनंदपुर साहिब संयुक्त पंजाब में होशियारपुर संसदीय सीट के अधीन आता था।
2008 में श्री आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट घोषित होने के बाद 2009 में हुए चुनाव में कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू सांसद चुने गए थे। उस समय बिट्टू ने अकाली दल के डॉ. दलजीत सिंह चीमा को 67204 वोटों के अंतर से हराया था। बीते पांच साल से अकाली दल के प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा क्षेत्र के सांसद हैं और अकाली दल ने इस बार भी उन्हें ही उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने मनीष तिवारी को टिकट दिया है। वहीं आम आदमी पार्टी ने नरिंदर सिंह शेरगिल को फिर से अपना प्रत्याशी बनाया है।
शेरगिल 2014 के चुनाव में 3,06,008 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। तब चंदूमाजरा (3,47,394) ने कांग्रेस की अंबिका सोनी (3,23,697) को हराया था। मनीष तिवारी 2009-2014 तक लुधियाना संसदीय सीट से कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं। श्री आनंदपुर साहिब सीट पर उनकी एंट्री बाहरी प्रत्याशी के रूप में स्थानीय कांग्रेसियों को हजम नहीं हो रही। हालांकि यह सिख बहुल इलाका है, फिर भी अन्य वर्गों के लोगों की तादाद भी निर्णायक भूमिका योग्य है। मनीष तिवारी के साथ हिंदू प्रत्याशी की छवि भी जुड़ी है।
महंगी पड़ सकती है आप से अनदेखी
इस बार भी मुख्य मुकाबला कांग्रेस और अकाली दल के बीच ही माना जा रहा है लेकिन आम आदमी पार्टी (आप) के नरिंदर शेरगिल को अनदेखा नहीं किया जा सकता क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तीन लाख से अधिक वोट लेकर विजेता चंदूमाजरा की कांग्रेस पर जीत के मार्जिन को मात्र दो फीसदी कर दिया था।
चंदूमाजरा का वोट प्रतिशत 31.94 रहा था जबकि अंबिका सोनी का 29.77 फीसदी था। शेरगिल ने तब 28.14 फीसदी वोट हासिल किए थे। भले ही प्रदेश में आप की स्थिति वर्तमान में बहुत अच्छी न कही जाए, लेकिन शेरगिल की अपने हलके में छवि आज भी अच्छी है।
इस संसदीय क्षेत्र से हैं विधानसभा स्पीकर, दो कैबिनेट मंत्री
आनंदपुर साहिब संसदीय क्षेत्र के तहत नौ विधानसभा क्षेत्र- गढ़शंकर, बंगा, नवांशहर, बलाचौर, आनंदपुर साहिब, रूपनगर, चमकौर साहिब, खरड़ और मोहाली हैं। इनमें से पांच सीटों पर कांग्रेस, तीन पर आप और एक पर अकाली दल के विधायक हैं।
खास बात यह है कि प्रदेश का यह एकमात्र ऐसी संसदीय सीट है, जहां से नेताओं को मौजूदा राज्य सरकार के दौरान अधिक प्रतिनिधित्व मिला है। पंजाब विधानसभा के मौजूदा स्पीकर राणा केपी सिंह आनंदपुर साहिब विधानसभा सीट से हैं जबकि पशुपालन मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू मोहाली से और तकनीकी शिक्षा मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी चमकौर साहिब सीट से चुने गए हैं।
मतदाताओं को दोनों बड़े दलों से शिकायत
इस क्षेत्र के लोगों को हमेशा सार्वजनिक एवं मूलभूत सुविधाओं को लेकर शिकायत बनी रही है। बेरोजगारी, शिक्षा और बिजली-पानी को लेकर जो मांगे दस साल पहले उठाई जा रही थीं, वही आज भी कायम हैं। मोहाली-खरड़ एलिवेटिड ब्रिज का निर्माण पूरा नहीं हो सका है जबकि मोहाली में एकमात्र एयर कंडीशंड बस टर्मिनल भी शुरू नहीं हो सका। मोहाली को कांग्रेस सरकार ने नो-पावर कट जोन घोषित कर दिया लेकिन इस संसदीय सीट के बाकी हलकों में बिजली कट की समस्या बनी हुई है। इसका सीधा असर उद्योगों पर पड़ रहा है और कोई बड़ी इंडस्ट्री इस क्षेत्र में नहीं आ रही। क्षेत्र में स्किल प्रशिक्षण केंद्रों की मांग भी अभी पेंडिंग है। नंगल में नेशनल फर्टिलाइजर्स में छंटनी ने स्थानीय लोगों की चिंता और सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ाया है।
संदोआ के दलबदल का गुस्सा कांग्रेस पर
आम आदमी पार्टी के रोपड़ के विधायक अमरजीत सिंह संदोआ ने कांग्रेस में शामिल हो जाने से इलाके के लोग खासे नाराज हैं। उधर, संदोआ के पार्टी में आने को कांग्रेस भले ही बड़ी उपलब्धि मान रही है, क्योंकि उसे लग रहा है कि संदोआ के पक्ष के वोट भी कांग्रेस को मिलेंगे। लेकिन रोपड़ के अधिकांश गांव मलिकपुर, चंदपुर, बलावलपुर, ढकाला, लौरीमाजरां, फिड्डियां, दबुर्जी, नूहों के लोगों में न सिर्फ संदोआ के प्रति गुस्सा है, बल्कि कांग्रेस को भी वे दोषी मान रहे हैं। दरअसल विधानसभा चुनाव में संदोआ की झोली में जो वोट आए थे, उनमें ज्यादातर कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के थे। संदोआ के अब कांग्रेस में चले जाने से यह वोट फिर से कांग्रेस को जाएंगे, इसमें संदेह है।
अकाली प्रत्याशी पर भारी बेअदबी का मुद्दा
पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और शांतिपूर्ण धरना दे रहे सिखों पर पुलिस फायरिंग के मामले का जिन्न इस संसदीय सीट पर भी अकाली दल का पीछा नहीं छोड़ रहा। श्री आनंदपुर साहिब में ही अकाली प्रत्याशी को सिखों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। इस हालत में अकाली दल के प्रत्याशी को तो नुकसान हो सकता है लेकिन नाराज वोटर कांग्रेस के साथ जाएंगे या आप के साथ, यह स्थिति साफ नहीं है, क्योंकि मनीष तिवारी के लिए प्रचार में जुटे कांग्रेस वर्कर इन दिनों मतदाताओं को यह भी समझाते दिखाई दे रहे हैं कि आप तिवारी को वोट दो, केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी तो वे मंत्री जरूर बनेंगे और हलके के काम कराएंगे।
मैं वादा करता हूं कि मैंने बीते पांच साल भी क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं पर काम कराया है। अब मेरा इरादा सबसे पहले दशमेश नहर बनवाने का है, जिसके लिए मैं केंद्र से तालमेल कर काम शुरू कराऊंगा। मोहाली एयरपोर्ट से कार्गों सर्विस शुरू कराना भी मेरी प्राथमिकता है, ताकि लोगों को रोजगार मिले। इस बार रोजगार पर खासतौर पर ध्यान दूंगा।
प्रेम सिंह चंदूमाजरा, प्रत्याशी, अकाली दल।
मैं पंजाब का रहने वाला हूं। मुझे बाहरी कहना गलत है। चुनाव जीतने के बाद मेरी प्राथमिकता कंडी क्षेत्र को इंडस्ट्रियल जोन के रूप में विकसित करना होगी, ताकि क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ें। कंडी क्षेत्र लंबे समय से शिक्षा, सड़कें, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है, जिन्हें पूरा कराया जाएगा। राज्य में कैप्टन सरकार के अधीन जो भी काम होने हैं, उन्हें तुरंत शुरू कराया जाएगा।
मनीष तिवारी, प्रत्याशी, कांग्रेस।
मैं इसी हलके का निवासी हूं और मेरा बचपन भी यहीं बीता है। यहां उद्योगों, किसानों, सरकारी कर्मचारियों, कंडी क्षेत्र से जुड़ी तमाम समस्याओं को मैं बचपन से देखता रहा हूं। किसी भी उम्मीदवार ने चुनाव जीतने के बाद यहां शक्ल नहीं दिखाई और न ही जनता के लिए कोई काम किया। इन सारी समस्याओं से निपटना ही मेरी प्राथमिकता है। क्षेत्र के जितने प्रोजेक्ट पेंडिंग हैं, उन्हें पूरा कराने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के समक्ष उन्हें जोरशोर से उठाया जाएगा और अनुमति ली जाएगी।
नरदिंर सिंह शेरगिल, प्रत्याशी, आम आदमी पार्टी।