लोकसभा चुनाव 2019 के लिए गठबंधनों के दौर में पंजाब की आनंदपुर साहिब सीट सभी पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई। इसके चलते आम आदमी पार्टी और बसपा का गठबंधन नहीं हो सका। वहीं, पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस ने समझौता किया और बसपा को यह सीट दे दी, जिसके बाद गठबंधन बन गया। बसपा का वोट बैंक मुख्य तौर पर दोआबा में है। सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति की आबादी भी यहीं है।
इसमें जालंधर, होशियारपुर और आनंदपुर साहिब सीट का काफी इलाका आता है। बसपा शुरू से ही इस बात पर अड़ी थी कि अगर उसे किसी भी गठबंधन में तीन सीटों पर लड़ना है तो उसे दोआबा की तीनों सीटें ही चाहिए। क्योंकि पंजाब में बाकी जगह उसका उतना आधार नहीं है। बसपा इन तीनों सीटों पर अपने उम्मीदवार भी फाइनल कर चुकी थी। पहले पीडीए के साथ बातचीत चली।
लेकिन बसपा को आनंदपुर साहिब सीट देने पर सहमति नहीं बनी। जिसके बाद बसपा ने पीडीए छोड़ कर आप के साथ बातचीत शुरू कर दी। आप की पहले ही टकसालियों के साथ गठबंधन की बात चल रही थी। तीनों पार्टियों में बाकी तालमेल तो बन गया। समझौते के तहत आप ने जालंधर, होशियारपुर और साथ में विकल्प के तौर पर फिरोजपुर देने पर सहमति जताई। वहीं, टकसालियों को खडूर साहिब, फिरोजपुर और विकल्प के तौर पर गुरदासपुर देने की बात थी।
लेकिन आनंदपुर साहिब सीट पर पेंच फंसा रहा। आप, शिअद-टकसाली और बसपा, तीनों ही यह सीट चाहते थे। जिसके चलते कई दिनों से गतिरोध चल रहा था। इस बीच सुखपाल खैरा की अगुवाई वाले पीडीए ने फिर मंथन किया। दूसरी पार्टियों को आनंदपुर साहिब सीट बसपा को देने के लिए राजी किया। सोमवार को खैरा के आवास पर हुई बैठक में डील फाइनल हो गई। साथ ही बसपा दोबारा पीडीए का हिस्सा बन गई।