1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में अमृतसर से कांग्रेस उम्मीदवार ज्ञानी गुरमुख सिंह मुसाफिर ने जीत हासिल की थी। आगे चलकर वे मुख्यमंत्री भी बने। उसके बाद ज्ञानी 1957 और 1962 के चुनाव में जीत हासिल कर अमृतसर संसदीय हलके से हैट्रिक बनाने वाले पहले सांसद बने। इसी तरह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रघुनंदन लाल भाटिया ने छह बार चुनाव जीतकर रिकॉर्ड बनाया। भाजपा ने पहली बार 2004 में जट सिख नवजोत सिंह सिद्धू को चुनाव मैदान में उतारा। सिद्धू ने छह बार एमपी रहे भाटिया को पराजित किया।
सिद्धू ने एक उपचुनाव सहित तीन बार चुनाव जीता। इसके बाद 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेता अरुण जेटली मोदी की लहर के बावजूद कैप्टन अमरिदर सिंह से एक लाख से अधिक मतों से चुनाव हार गए। गुरु नगरी के पहले सांसद ज्ञानी गुरमुख सिंह नेता होने के साथ-साथ उच्चकोटि के पंजाबी साहित्यकार और कहानीकार भी थे। ज्ञानी मुसाफिर को साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार के साथ-साथ पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था।
ज्ञानी अमृतसर से चुने गए पहले ऐसे सांसद थे, जो 1967 से 1968 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। 1966 में पंजाबी सूबा आंदोलन के विरोध में मरणव्रत पर बैठे तत्कालीन जनसंघ के नेता वीर यज्ञ दत्त शर्मा ने 1967 के लोकसभा चुनाव में ज्ञानी मुसाफिर के वर्चस्व को तोड़ा और पहली बार यह सीट गैर कांग्रेसी दल के हिस्से में आई।