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लोकसभा चुनाव 2019: अमृतसर के पहले सांसद मुख्यमंत्री भी बने और छह बार जीत का रिकॉर्ड भी बना

Tue, 26 Mar 2019 12:22 PM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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Navjot Singh Sidhu - फोटो : twitter
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1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में अमृतसर से कांग्रेस उम्मीदवार ज्ञानी गुरमुख सिंह मुसाफिर ने जीत हासिल की थी। आगे चलकर वे मुख्यमंत्री भी बने। उसके बाद ज्ञानी 1957 और 1962 के चुनाव में जीत हासिल कर अमृतसर संसदीय हलके से हैट्रिक बनाने वाले पहले सांसद बने। इसी तरह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रघुनंदन लाल भाटिया ने छह बार चुनाव जीतकर रिकॉर्ड बनाया। भाजपा ने पहली बार 2004 में जट सिख नवजोत सिंह सिद्धू को चुनाव मैदान में उतारा। सिद्धू ने छह बार एमपी रहे भाटिया को पराजित किया।
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सिद्धू ने एक उपचुनाव सहित तीन बार चुनाव जीता। इसके बाद 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेता अरुण जेटली मोदी की लहर के बावजूद कैप्टन अमरिदर सिंह से एक लाख से अधिक मतों से चुनाव हार गए। गुरु नगरी के पहले सांसद ज्ञानी गुरमुख सिंह नेता होने के साथ-साथ उच्चकोटि के पंजाबी साहित्यकार और कहानीकार भी थे। ज्ञानी मुसाफिर को साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार के साथ-साथ पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था।

ज्ञानी अमृतसर से चुने गए पहले ऐसे सांसद थे, जो 1967 से 1968 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। 1966 में पंजाबी सूबा आंदोलन के विरोध में मरणव्रत पर बैठे तत्कालीन जनसंघ के नेता वीर यज्ञ दत्त शर्मा ने 1967 के लोकसभा चुनाव में ज्ञानी मुसाफिर के वर्चस्व को तोड़ा और पहली बार यह सीट गैर कांग्रेसी दल के हिस्से में आई।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद चुनाव में कई फेरबदल हुए

केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार द्वारा चार साल पूरे होने पर गरीबी हटाओ के नारे पर चुनाव करवाए गए थे। उस समय अमृतसर म्युनिसिपल कमेटी के तत्कालीन मुखिया दुर्गा दास भाटिया ने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीता था। सांसद भाटिया की एक साल बाद ही मौत हो गई थी। इसके बाद कांग्रेस ने उनके भाई रघुनंदन लाल भाटिया को उपचुनाव में मैदान में उतारा। भाटिया ने यज्ञ दत्त शर्मा को हराया। इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में तत्कालीन जनता पार्टी के उम्मीदवार डॉ. बलदेव प्रकाश ने रघुनंदन लाल भाटिया को मात दी।

1980 लोकसभा चुनाव में रघुनंदन लाल भाटिया ने भाजपा के डॉ. बलदेव प्रकाश को शिकस्त दी। 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार और दिल्ली दंगों के बावजूद रघुनन्दन लाल भाटिया चुनाव जीत गए थे। 1989 चुनाव के दौरान प्रदेश में आतंक की काली परछाई बहुत गहरी थी, तब चीफ खालसा दीवान के तत्कालीन प्रधान किरपाल सिंह बतौर आजाद उम्मीदवार मैदान में उतरे और आरएल भाटिया को हराया। 1991 और 1996 के चुनाव में भी भाटिया को जीत मिली। अमृतसर से 1952 में ज्ञानी गुरमुख सिंह मुसाफिर पहले जट सिख उम्मीदवार थे।

इसके लगभग 31 साल बाद 1998 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एक शहरी सिख दया सिंह सोढ़ी को चुनाव मैदान में उतारा। सोढ़ी ने आरएल भाटिया के वर्चस्व को तोड़ते हुए यह सीट जीती। 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब प्रदेश में अकाली-भाजपा की सरकार थी, तब दया सिंह सोढ़ी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की कार्यप्रणाली पर बयान दिए। सोढ़ी उस चुनाव में नहीं जीत पाए।
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