आम आदमी पार्टी के 78 वर्षीय उम्मीदवार हरमोहन धवन साल 1989 में किए अपने कार्यों को गिनाकर लोकसभा चुनाव 2019 जीतने के लिए जनता से वोट मांग रहे हैं। उनका कहना है कि जनता उनके काम को भूली नहीं है। उनके पास शहर के विकास का ऐसा एजेंडा है, जो किसी और दल के पास नहीं है। सिटी ब्यूटीफुल से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर उन्होंने अमर उजाला से बातचीत करते हुए अपना विजन पेश किया। पेश हैं उनसे की गई बातचीत के अंश।
चुनाव में सिर्फ पांच दिन बचे हैं। धवन चुनाव में कहां खड़े हैं
मैं चुनाव जीत रहा हूं। इसके पीछे लॉजिक भी बताता हूं। पवन बंसल इतनी बार जीते, लेकिन एक भी वादा पूरा नहीं कर पाए। साल 1999 में उन्होंने वादा किया था कि नीड बेस्ड चेंज और लीज होल्ड को ठीक कर देंगे। मालिकाना हक दिलवा देंगे। ठेकेदारी प्रथा खत्म कर देंगे। मेट्रो ले आएंगे।
आप देख लीजिए आज भी वे इसी मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं। यदि उन्होंने काम किया होता तो किरण खेर को साल 2014 में 60 वादे न करने पड़ते। अब मैडम भी उन्हीं मुद्दों पर चुनाव लड़ रही हैं, जो उन्होंने पिछले चुनाव में किए थे। मेरे पास तो कई प्लस प्वाइंट हैं। मेरे काम भी दिखते हैं। मेरी उपलब्धता भी हर समय है। इन कारणों की वजह से मैं चुनाव जीत रहा हूं।
आपकी नजर में चंडीगढ़ का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा क्या है
बजट। इस पर कोई बात नहीं कर रहा। इतने सालों में चंडीगढ़ के बजट में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई। आम आदमी की कोई भागीदारी नहीं होती। मैं जनता के सहयोग से चंडीगढ़ का बजट तैयार कराऊंगा। जनता का आशीर्वाद मिला तो साल 2019-20 में जनता का बजट तैयार कराऊंगा और चंडीगढ़ का पुराना गौरव वापस लौटाऊंगा।
चंडीगढ़ में ट्रैफिक भी एक बड़ा मुद्दा है, इसका क्या सॉल्यूशन है
आपने 11-15 का अंडरपास देखा है। यदि इस तरह के अंडरपास बने होते तो शहर में कोई दिक्कत नहीं आती। यहां पर बाहर का ट्रैफिक ज्यादा है। उसके लिए सरकुलर रोड बनाने का आइडिया है। मेट्रो को भी लाएंगे।
क्या अरविंद केजरीवाल आ रहे हैं?
बातचीत चल रही है। एक दो दिन में फाइनल हो जाएगा। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया आ रहे हैं।
शहर में इस बार मोदी फैक्टर काम कर रहा है
कहीं नहीं। उनके एक भी वादे पूरे नहीं हुए। क्या आपके खाते में 15 लाख आए। मेरे खाते में तो नहीं आए। क्या दो करोड़ युवाओं को रोजगार मिला। उल्टा जीएसटी-नोटबंदी कर व्यापारियों की कमर तोड़ दी। जब बातें सच नहीं हुई तो किस काम का मोदी फैक्टर।
आप प्रचार में बंसल-किरण पर निशाना साधते हैं, लेकिन वे आपका नाम नहीं लेते
मेरे खिलाफ बोलने के लिए उनके पास कुछ भी नहीं है। जब मैं सत्ता में था तो मैंने काम किया। मेडिकल कालेज, कजौली वाटर वर्क्स, सेक्टर में रेहड़ी मार्केट, पुनर्वास कालोनी ये सब मेरे ही काम हैं। उनके खिलाफ बोलने के लिए मेरे पास बहुत कुछ है। मैं यह भी कहता हूं कि यदि दो साल में अपने वादे पर खरा नहीं उतरा तो मैं अपनी सांसदी से इस्तीफा दे दूंगा।
विरोधी कहते हैं कि आप जल्दी जल्दी पार्टी बदल देते हैं
बिलकुल ठीक कह रहे हैं। पार्टी तभी छोड़ी जाती है, जब आपका दल जनता की उम्मीदों पर खरा न उतर रहा हो। और मैंने यही किया। जब कांग्रेस और भाजपा की मदद कर उन्हें जिताया तो सब कहते रहे कि धवन साहब तो बहुत अच्छे आदमी हैं। अलग हो गए तो इस तरह की बात कर रहे हैं। जब मैं सांसद रहा तो उस दौरान के कार्यकाल पर मेरे ऊपर एक भी व्यक्ति अंगुली नहीं उठा सकता।
आप 78 साल के हैं। इतनी उम्र में चुनाव कैसे मैनेज करते हैं
आज भी मैं न तो कोई गोली खाता हूं और न ही दवा। बंसल और किरण के सामने मुझे खड़ा कर दीजिए फिर बताना किसकी पर्सनालिटी है। जनता का प्यार है कि आज मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं।