चुनावी बेला में किसानों ने राजनीतिक दलों की चुनौती बढ़ा दी है। पंजाब के कई गांवों में पोस्टर लगे हैं, सभी राजनीतिक पार्टियों की एंट्री भी बैन कर दी गई है।
पंजाब में लोकसभा चुनाव का प्रचार जोर पकड़ने लगा है, लेकिन इसके साथ ही किसानों का विरोध भी तेज हो गया है। किसानों की कई मांगें हैं, जिनको लेकर वे सड़क पर उतरे हुए हैं। कई गांवों में सभी राजनीतिक दलों की एंट्री तक बैन कर दी गई है। गांवों के बाहर पोस्टर लगा दिए गए हैं कि किसी भी पार्टी का राजनेता गांव में प्रवेश न करे।
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प्रचार के दौरान भी नेताओं को काले झंडों के साथ विरोध का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में किसान राजनीतिक दलों की मुश्किलें और बढ़ाने वाले हैं। पटियाला के शंभू बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में किसानों ने एलान किया है कि वे नौ अप्रैल को ट्रेनें रोकेंगे। इसके साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान संघर्ष मोर्चा ने लगातार रैलियां करने का निर्णय भी लिया है। इसमें वे अपनी मांगें उठाएंगे और राजनेताओं से सवाल करेंगे।
सरकारी मंडियों को कॉरपोरेट घरानों को सौंपने का आरोप
पंजाब सरकार ने पिछले वर्ष की तरह इस साल भी पंजाब के नौ जिलों में 11 निजी साइलो को गेहूं खरीद, भंडारण और प्रसंस्करण के लिए घोषित किया है। इसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा था कि वो राज्य सरकार के इस कदम का विरोध करेगा। मोर्चा का कहना है कि राज्य सरकार का यह कदम किसान विरोधी है।
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इस कदम से सरकार सरकारी मंडियों को कॉरपोरेट घरानों को सौंपने का है। संयुक्त किसान मोर्चा ने यह भी कहा कि कॉरपोरेट्स के लाभ के लिए साइलो क्षेत्रों में आने वाली 26 कृषि उपज बाजार समितियों को भंग करने के पंजाब सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा।
गेहूं खरीद के लिए कॉरपोरेट घरानों को खरीद परमिट देने से बढ़ा आक्रोश
किसान यूनियन बीकेयू (एकता उगराहां) ने पंजाब सरकार से राज्य के सभी निजी साइलो को अपने कब्जे में लेने का अनुरोध किया है। साथ ही मांग की है कि गेहूं खरीद के लिए कॉरपोरेट घरानों को दी गई परमिट को रद्द किया जा जाए।
किसान यूनियन बीकेयू (एकता उगराहां) ने यह भी कहा कि किसान अपनी इन मांगों को आगे बढ़ाने के लिए 11 अप्रैल को साइलो पर विरोध प्रदर्शन भी करेंगे। पंजाब में एमएसपी पर गेहूं की खरीद जारी है. गेहूं खरीद के लिए राज्य सरकार ने सरकारी संस्थाओं के आलावा निजी साइलो (निजी भंडारण केंद्र) को भी जिम्मेदारी दी है।
इसके अलावा कई कॉरपोरेट घरानों को भी गेहूं खरीद के लिए परमिट दिया गया है, जिसका किसान संगठन विरोध कर रहे हैं. किसान यूनियन बीकेयू (एकता उग्राहा) ने पंजाब सरकार से राज्य के सभी निजी साइलो को अपने कब्जे में लेने का अनुरोध किया है। साथ ही मांग की है कि गेहूं खरीद के लिए कॉरपोरेट घरानों को दी गई परमिट को रद्द किया जा जाए।
किसान यूनियन बीकेयू (एकता उगराहां) ने यह भी कहा कि किसान अपनी इन मांगों को आगे बढ़ाने के लिए 11 अप्रैल को साइलो (निजी भंडारण केंद्र) पर विरोध प्रदर्शन भी करेंगे। किसान चाहते हैं कि सभी साइलो पर सरकार नियंत्रण होना चाहिए। सरकार यह दावा करती है कि सरकार ने रबी सीजने के लिए खरीद केंद्रों के रूप में 12 साइलो की अधिसूचना वापस ले ली थी, पर कॉरपोरेट घरानों को गेहूं खरीद की जिम्मेंदारी सौंपकर सरकार के इरादे सामने आ गए हैं कि सरकार किस तरह से सार्वजनिक वितरण प्रणाली को ध्वस्त करना चाहती है। सभी किसान इसका विरोघ करते हैं। किसान यूनियन के नेताओं ने कहा कि सभी किसान इसका विरोध करेंगे।
पार्टी का इसलिए हो रहा विरोध
आप: सरकार ने गेहूं खरीद के लिए कॉरपोरेट घरानों को खरीद का परमिट दिया है। किसान इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही खनौरी बॉर्डर में किसान शुभकरण की मौत के मामले में हरियाणा के गृहमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग भी की जा रही है।
भाजपा: सबसे ज्यादा विरोध भाजपा को सहना पड़ रहा है। किसान आंदोलन के दौरान बॉर्डर पर हरियाणा सरकार की ओर से लाठीचार्ज, फायरिंग, पानी की बौछारों और आंसू गैस के गोलों के इस्तेमाल और किसानों की मौत से किसान गुस्से में हैं। भाजपा नेताओं से इन मुद्दों पर सवाल पूछा जा रहा है।
शिअद: शिअद का पिछले किसान आंदोलन में पहले भाजपा का साथ देने का आक्रोश किसानों में अब तक है। उनका कहना है कि शिअद ने भाजपा पर दबाव नहीं बनाया। सुखबीर बादल समेत अन्य नेताओं को पंजाब बचाओ यात्रा के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा है।
कांग्रेस: किसान कांग्रेस से भी नाराज हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया। साथ ही राज्य की ओर से अपनी एमएसपी देने के मामले में भी ढिलाई दिखाई। कांग्रेस नेता भी विरोध का शिकार हो रहे हैं।
क्या कहते हैं किसान नेता
एक रिपोर्ट के अनुसार एसकेएम राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसी) के सदस्य बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि पंजाब मंडी बोर्ड के मुताबिक पिछले साल भी सरकार ने साइलो को गेहूं का खरीद केंद्र घोषित किया था। सरकार के कदम का विरोध करते हुए बीकेयू (उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने कहा था कि इससे पंजाब मंडी बोर्ड के 26 एपीएमसी प्रभावित हो रहे हैं, उनका काम इन निजी साइलो में स्थानांतरित हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस कारण से 2020 में कृषि कानूनों पर आपत्ति जताई। अब पंजाब सरकार भी वही कर रही है। हम इस कदम का विरोध करेंगे। इससे पहले किसान नेताओं जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवण सिंह पंधेर ने एलान किया था कि किसानों की मांगों को लेकर लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान जहां कहीं भी भाजपा के उम्मीदवार जाएंगे।
उनसे सवाल पूछे जाएंगे, अगर जवाब दिए तो ठीक है। वरना उम्मीदवारों को काले झंडे दिखाकर उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी के प्रधान रणजीत सिंह सवाजपुर ने बताया कि पंजाब में सभी जिला हेडक्वार्टरों पर पुतला फूंक प्रदर्शन किए जाएंगे।
एमएसपी की कानूनी गारंटी देने और गिरफ्तार किसान नेताओं की रिहाई की मांग
आने वाले समय में किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) की ओर से पूरे देश में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ पुतला फूंककर जोरदार रोष प्रदर्शन किए जाएंगे। किसान नेताओं के मुताबिक देशभर में जहां भी उनकी सहयोगी किसान जत्थेबंदियां हैं, वह इस प्रोग्राम को सफल करने में पूरा योगदान देंगी। इस दौरान प्रमुख तौर से जेलों में डाले वाटर कैनन ब्वाय के नाम से मशहूर नवदीप सिंह समेत तीन किसान नेताओं की रिहाई करने की मांग उठाई जाएगी।
साथ ही एमएसपी की कानूनी गारंटी देने समेत किसानों की बाकी जायज मांगों को उठाया जाएगा। अब किसानों ने मांगों को लेकर केंद्र के खिलाफ अपने आंदोलन को और तेज कर दिया है। विभिन्न हलकों से बड़ी गिनती में किसानों को पहुंचने की अपील की गई है। उन्होंने साफ किया कि किसानों का आंदोलन यही नहीं रुकेगा। जब तक मांगें पूरी नहीं होगी, यह जारी रहेगा।
उन्होंने मांग की कि सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए। साथ ही खेतीबाड़ी सेक्टर को प्रदूषण एक्ट से बाहर किया जाए। लखीमपुर खीरी कांड के पीडितों को मुआवजा मिले और आरोपियों को सजाएं दी जाएं। उन्होंने किसानों से रविवार को विभिन्न जिलों में होने वाले कार्यक्रमों में बड़ी गिनती में शामिल होने की अपील की।
फाजिल्का में हरियाणा के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का विरोध
भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर ने फाजिल्का के संजीव सिनेमा चौक पर एकत्रित होकर हरियाणा के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री का पुतला फूंका गया। इस दौरान किसानों ने खनौरी बॉर्डर पर किसानों पर अत्याचार करने का आरोप लगाते हुए एक युवा किसान की मौत के मामले में बीजेपी के खिलाफ चुनाव बहिष्कार का एलान किया। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के जिला प्रधान प्रगट सिंह चक्क पक्खी ने कहा कि भाजपा नेताओं को गांवों में घुसने नहीं दिया जाएगा। किसान नेता शुभकरण सिंह को गोली मारकर शहीद कर दिया गया क्योंकि वह भाजपा के विरोधी थे।
भगवंत मान, हंसराज हंस, परनीत कौर, सुखबीर बादल, तरनजीत संधू का हुआ विरोध
अमृतसर में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार पूर्व आईएफएफ अधिकारी तरणजीत सिंह संधू का दो बार विरोध हो चुका है। उन्हें काले झंडे दिखाए गए। कुछ दिन पहले पंजाबी गायक हंस राज हंस के काफिले का भी किसानों ने विरोध किया गया था। हालांकि हंसराज हंस उन पर फूल बरसाते रहे। पटियाला के पातड़ां में रविवार को चुनाव प्रचार के लिए पहुंची सांसद परनीत कौर के काफिले को किसानों ने घेर लिया और नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने बीच-बचाव कर परनीत कौर को भीड़ से बाहर निकाला और उन्हें सुरक्षित पैलेस के अंदर ले जाया गया।
किसानों ने सीएम भगवंत मान की सरकार के खिलाफ अभियान शुरू किया है। अमृतसर में हुए प्रदर्शन में किसानों ने बाजार समितियों से संबंधित राज्य सरकार के फैसलों पर असंतोष जाहिर किया। इस प्रदर्शन का समापन मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुतले भी जलाए गए। किसानों का कहना है कि भगवंत मान की सरकार ने पंजाब के किसानों को धोखा दिया है और उन्हें नुकसान पहुंचाया है।
लुधियाना में पंजाब बचाओ यात्रा के दौरान सुखबीर बादल को भी काले झंडे दिखाए गए। वहीं, हरियाणा सरकार की ओर से अवैध तरीके से गिरफ्तार किए गए प्रीतपाल को लेकर भी किसानों में आक्रोश है। हालांकि, अब उसे पंजाब को सौंप दिया है। वहीं, किसान नेता नवदीप जलबेड़ा और उसके साथी गुरकीरत को सीआईए-1 अंबाला ने गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी मोहाली के एयरपोर्ट से की गई। इसे लेकर भी किसान नाराज हैं।