खुदकुशी कर चुके दो किसानों की विधवाओं ने अब बठिंडा से शिअद और कांग्रेस उम्मीदवार को चुनौती देने के लिए सोमवार को अपने नामांकन पत्र दाखिल किए।
जिले के गांव ख्याला कलां की मंजीत कौर और गांव रल्ला की वीरपाल कौर ने नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि राजनेता उनके पतियों की खुदकुशी पर राजनीतिक रोटियां सेंक कर वोट हासिल करते हैं।
अब पहली बार खुदकुशी पीड़ित परिवारों की एक कमेटी गठित की गई है, जिसके तहत उन्होंने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में उतरी दोनों विधवाओं का कहना था कि पिछले दस साल से खुदकुशी पीड़ित किसान परिवार हरसिमरत कौर को वोट देते रहे हैं लेकिन हरसिमरत ने कभी उनका हाल नहीं जाना।
जब भी वे खुदकुशी पीड़ित परिवारों के मसले को लेकर सांसद बादल से मिलने जाते तो उन्हें मिलने नहीं दिया जाता था। दुखी होकर पीड़ित परिवारों ने अब निर्णय किया कि वे अपने ही किसी पीड़ित परिवार को चुनाव मैदान में उतारेंगे।
मंजीत कौर ने कहा कि खुदकुशी पीड़ित परिवारों को जिला प्रशासन एवं सांसद बादल की तरफ से यह तक नहीं पूछा गया कि पीड़ित परिवारों को दो वक्त की रोटी नसीब होती है या नहीं।