अभय सिंह चौटाला व अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पार्टी अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा कि 12 नवंबर को ओम प्रकाश चौटाला ने एक पत्र दिया था। जिसे जारी करने से पहले पार्टी के तमाम नेताओं ने यह प्रयास किया कि अजय सिंह चौटाला जींद की बैठक को रद्द करें और पार्टी पूरी एकजुटता के साथ विरोधी राजनीतिक दलों का मुकाबला करे।
अशोक अरोड़ा ने चौटाला के पत्र को सार्वजनिक करते हुए कहा कि बार-बार प्रयासों के बावजूद अजय सिंह चौटाला द्वारा न केवल 17 नवंबर को जींद में एक बैठक बुलाकर कार्यकर्ताओं व नेताओं को भ्रमित किया जा रहा है बल्कि अजय सिंह द्वारा पिछले कई दिनों से की जा कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि वह इनेलो के समानांतर एक संगठन चलाना चाहते हैं। इनेलो हाईकमान जींद में बुलाई गई बैठक को पूरी तरह से असंवैधानिक करार देती है और अजय सिंह चौटाला को पार्टी के प्रधान महासचिव पद से निष्कासित करती है।
7 अक्टूबर 2018 को चौधरी देवी लाल के जन्मदिवस के दौरान गोहाना में आयोजित कार्यक्रम में कुछ युवकों ने जमकर हूटिंग की थी। इसके बाद ओमप्रकाश चौटाला ने कार्रवाई करते हुए इस मामले को अनुशासन समिति को कार्यवाही के लिए सौंप दिया था। अनुशासन समिति की जांच के बाद दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
ओमप्रकाश चौटाला ने पार्टी कार्यालय को सूचित किया है कि वास्तव में इस मामले में उन्हें किसी भी बाहरी प्रमाण की आवश्यकता नहीं थी। वह स्वयं उस आयोजन में उपस्थित थे। उन्होंने अनुशासनहीनता और हुड़दंगबाजी की घटनाएं स्वयं देखी और यह भी देखा कि उनके भाषण में भी लगातार व्यवधान डाला गया था। फिर भी उन्होंने इस पूरे मामले को अनुशासन कार्रवाई समिति को सौंपा था। समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि दोनों उन आरोपों के दोषी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दुष्यंत और दिग्विजय सिंह उनके परिवार के ही सदस्य थे। इसलिए उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई करना उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन वे जीवनपर्यंत जन नायक चौधरी देवीलाल के सिद्धांतों और आदर्शों का पालन करते रहे हैं।
परिवार में चल रही थी खींचतान
इनेलो परिवार की खींचतान ओमप्रकाश चौटाला के जेल जाने के बाद शुरू हुई थी कि सत्ता किसे दी जाए। उनकी सत्ता के दो प्रमुख दावेदार हैं। उनमें एक छोटा बेटा अभय चौटाला और दूसरी बड़े बेटे की बहू नैना चौटाला थीं। चौटाला परिवार की सत्ता अभय चौटाला को मिली। इसके बाद कुछ मौकों पर पारिवारिक विवाद सामने आता रहा।
इनेलो में यदि विरासत का विवाद जल्द नहीं थमा तो आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी की चुनौतियां और अधिक बढ़ जाएंगी। हालांकि, अभी इस विवाद के थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं, लेकिन ऐसा ही चलता रहा तो चुनावों में इनेलो की डगर आसान नहीं होगी। पार्टी अब दोफाड़ हो गई है, क्योंकि दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला के बाद अब अजय चौटाला को भी पार्टी से निकाल दिया गया है।
इसकी शुरुआत हुई इनेलो की गोहाना रैली से, जो 7 अक्टूबर को ताऊ देवीलाल की जयंती पर आयोजित की गई थी। इस रैली में जब अजय चौटाला भाषण दे रहे थे, तो पंडाल में बैठे सांसद दुष्यंत और इनेसो अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला के समर्थकों ने जबरदस्त हूटिंग की। इससे रैली में मौजूद जेल से पेरोल पर आए इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश काफी खफा हुए और उन्होंने इनसो को भंग कर दिया और दिग्विजय व दुष्यंत को निलंबित कर दिया। विवाद और बढ़ा तो दुष्यंत को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
इस तरह बढ़ेगी चुनावी चुनौतियां
भर्ती घोटाले में सजा भुगत रहे पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला और उनके बड़े बेटे अजय चौटाला के जेल जाने के बाद पार्टी बिखरी गई थी। लेकिन छोटे बेटे अभय चौटाला ने वर्करों को बांधे रखा और वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में 19 सीटें भी जीती। अब 2019 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव फिर करीब हैं, लेकिन इनेलो में विरासत की जंग चल रही है। पार्टी टूट चुकी है, तो अब इनेलो की ताकत भी बंट जाएगी और मौजूदा विधायक भी बंट जाएंगे। उधर, विरोधी दल भी इस बिखराव का फायदा उठाने की पूरी फिराक में है। ऐसे में पिछले 14 साल से सत्ता से बाहर इनेलो के लिए ऐसे माहौल में चुनाव लड़ना आसान नहीं होगा।