राव इंद्रजीत सिंह, भूपेंद्र सिंह और दुष्यंत चौटाला
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हरियाणा में कांग्रेस की गुटबाजी और विपक्ष के बिखराव ने ब्रांड मोदी को वाकओवर दे दिया। सर्जिकल स्ट्राइक और बालकोट ऑपरेशन के बाद बनी राष्ट्रवाद की फिजा में बेरोजगारी, किसानों की असंतुष्टि और जाट आरक्षण जैसे मुद्दे धूमिल पड़ गए। भाजपा सभी दस सीटें जीतने में कामयाब हो गई। राव इंदरजीत सिंह सहित पहली बार चुनाव लड़े केंद्रीय मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह के पुत्र बृजेंद्र सिंह व कुछ दिन पहले भाजपा में आए अरविंद शर्मा भी जीत गए।
उधर, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का जाट नेता के तौर पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की जगह रणदीप सिंह सुरजेवाला को तरजीह देना भारी भूल साबित हुई। नाराज हुड्डा ने अपनी सोनीपत सीट और अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा की रोहतक सीट के अलावा कहीं ध्यान नहीं दिया। हालांकि पिता-पुत्र जीत नहीं सके। चौटाला परिवार के झगड़े के नतीजे में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) भी दो-फाड़ हो गई। इनेलो से टूटकर जननायक जनता पार्टी बनने से यह तय हो गया कि जाट वोट बंटेंगे। ब्यूरो
हरियाणा कुल सीटें: 10
भाजपा कांग्रेस इनेलो एचजेसीबीएल
2019 10 00 00 00
2014 07 01 02 00
2009 00 09 00 01