शहरों में पंजाबी व वैश्य बहुतायत में हैं, उन्होंने अपनी बिरादरी के उम्मीदवार कांग्रेस से न होने पर भाजपा के साथ जाना ही उचित समझा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर पंजाबी व वैश्य को टिकट देने की पैरवी करते रहे लेकिन उनकी एक न सुनी गई। प्रदेश में कांग्रेस संगठन पांच साल में 2004 व 2009 की तुलना काफी सक्रिय रहा है।
विधानसभा चुनाव में न दोहराएं लोस चुनाव की गलती
पार्टी हाईकमान को विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण में लोकसभा चुनाव की गलती नहीं दोहरानी चाहिए। विधानसभा चुनाव में पार्टी पंजाबी, वैश्य, राजपूत, ओबीसी, ब्राह्मण, रोड़ व वाल्मीकि समुदाय को मद्देनजर रखते हुए जातीय संतुलन बैठाए।
कांग्रेस को सत्ता वापसी से कोई नहीं रोक पाएगा। भंडारी का कहना है कि कांग्रेस को शहरों में लोकसभा चुनाव के दौरान जितने वोट मिलने चाहिए थे, उतने नहीं मिले। एक बड़े नेता को एडजस्ट करने के लिए जातीय समीकरण बिगाड़े गए।
गुरुवार के बाद तेज होगा आरोप-प्रत्यारोप का दौर
गुरुवार को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस में सिर फुटौव्वल की स्थिति हो सकती है। चूंकि, हुड्डा व तंवर खेमा उम्मीद मुताबिक जीत न मिलने पर हार को लेकर एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ेगा।
अधिक सीटें न आने की स्थिति में हुड्डा खेमे की ओर से एक बार फिर प्रदेशाध्यक्ष को बदलने की मुहिम जोर पकड़ सकती है। हुड्डा पिता-पुत्र अगर दोनों जीत दर्ज करते हैं तो हाईकमान को उनकी राय मानना जरूरी हो जाएगा।