चंडीगढ़ कांग्रेस में इतिहास एक बार फिर दोहराया गया है। किसी कार्यकर्ता को पार्टी ऑफिस में जाने से रोकने के लिए भवन पर ताला जड़ना कांग्रेस में पहली बार नहीं हुआ है। ठीक 27 साल पहले 1992 में लोकसभा चुनाव के वक्त भी कुछ ऐसा ही हुआ था। उस समय कांग्रेस पार्टी में विनोद शर्मा और पवन बंसल में गुटबाजी चरम पर थी। पार्टी दो धड़ों में बंट गई थी।
विरोध इस कदर बढ़ गया कि उम्मीदवार का एलान होने के बाद तत्कालीन यूथ कांग्रेस के प्रधान विजयपाल सिंह डिंपी ने कुछ घंटों के लिए कांग्रेस भवन पर ताला जड़ दिया, ताकि पवन बंसल दाखिल न हो सकें। समय बदला और अब बंसल पर आरोप लग रहे हैं कि उनके इशारों पर ही कांग्रेस भवन में नवजोत कौर सिद्धू के लिए ताला जड़ा गया।