नसीम के पिता चौधरी शकरुल्ला खान भी तीन बार फिरोजपुर झिरका से विधायक और दो बार मंत्री रहे। 1982 और 1991 में विधायक बनने के बाद उन्हें सरकार में बतौर मंत्री काम करने का मौका मिला। नसीम को सियायत पिता से विरासत में मिली है। उनके कांग्रेस में आने से मेवात में पार्टी को लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव में भी फायदा हो सकता है।
दो इनेलो विधायकों की हुई मृत्यु, चार जजपा के साथ गए
इनेलो विधायकों के लगातार टूटने से ही नेता प्रतिपक्ष का पद अभय सिंह चौटाला को गंवाना पड़ा। उन्होंने स्पीकर को सशर्त इस्तीफा भेजा था, लेकिन स्पीकर ने उसे स्वीकार करने के बजाए अभय को पद से ही हटा दिया। चूंकि, वह सशर्त इस्तीफा स्वीकार नहीं कर सकते थे। इनेलो की मुश्किलें जींद से विधायक हरिचंद मिड्ढा की मृत्यु के बाद ही बढ़ना शुरू हो गई थीं।
उनके पुत्र कृष्ण मिड्ढा ने भाजपा का दामन थाम लिया था। उसके बाद पार्टी का विघटन हुआ व चौटाला परिवार टूटा। उसके बाद जजपा बनी। इसके बाद पिहोवा से इनेलो विधायक जसविंद्र सिंह संधू की मौत हो गई।
जजपा के साथ विधायक नैना चौटाला, अनूप धानक, राजदीप फौगाट और पिरथी सिंह नंबरदार जा चुके हैं। अब इनेलो विधायकों की संख्या कुल दस रह गई है। और झटके भी इनेलो को लग सकते हैं। जिससे पार्टी का आंकड़ा विधानसभा में इकाई का हो जाएगा।
स्पीकर को इस्तीफा भेजेंगे नसीम, चौटाला से नहीं गिला
विधायक नसीम अहमद ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। वह विधायक पद से अपना इस्तीफा स्पीकर को भेज देंगे। उन्होंने कहा कि इनेलो सुप्रीमो ओपी चौटाला व वरिष्ठ नेता अभय सिंह चौटाला से उन्हें कोई गिला नहीं है। प्रदेश में इनेलो और जजपा मुकाबले में ही नहीं हैं। इसलिए अपने राजनीतिक व मेवात के भविष्य को देखते हुए कांग्रेस में शामिल होने का फैसला लिया।
कांग्रेस ही कर सकती है मोदी से मुकाबला
नसीम अहमद ने कहा कि देश व प्रदेश में मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही है। कांग्रेस ही पीएम नरेंद्र मोदी का मुकाबला कर सकती है। देश की परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस ही उनके सामने विकल्प था। देश को तोड़ने वालों का डट कर मुकाबला करेंगे। लोकसभा व विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए काम किया जाएगा।