हरियाणा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले जींद विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का परिणाम सभी दलों की सियासी हवा का रुख तय करेगा। इसलिए कोई भी सियासी दल इस उपचुनाव को हलके में नहीं लेना चाहते। भाजपा के लिए तो यह उपचुनाव जहां पहले ही एक बड़ी परीक्षा है, वहीं सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस और इनेलो को भी इस चुनाव में अपना दम दिखाना होगा। इनलो से अलग हुई जजपा के लिए भी ये चुनाव खुद को साबित करने जैसा होगा।
इनेलो के विधायक हरिचंद मिड्डा के निधन के बाद खाली हुई जींद विधानसभा सीट पर 28 जनवरी को चुनाव होना है।
लिहाजा सभी सियासी दल अपनी कमर कसे हुए हैं। चूंकि चुनाव पूरी गंभीरता से लड़ना है, इसलिए अभी तक दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। फिलहाल देखा जए तो भाजपा की ओर से चुनाव लड़ने वाले दावेदारों की फेहरिस्त लंबी है। भाजपा के दावेदारों में पूर्व सांसद सुरेंद्र बरवाला, कृष्ण मिड्डा, आवास बोर्ड के चेयरमैन डा. ओपी पहल, खाप नेता टेकराम कंडेला, मास्टर गोगल, सज्जन गर्ग, लीलाधर मित्तल व बलकार डहोला, सीएम के ओएसडी राजेश गोयल शामिल हैं। कांग्रेस में अशोक तंवर और पूर्व सीएम हुड्डा के समर्थक दावेदार अपनी-अपनी ताल ठोक रहे हैं।
चूंकि यह सीट पहले से ही इनेलो के ही पास थी, मगर इनेलो विधायक हरिचंद मिड्डा के निधन के बाद उनके बेटे कृष्ण मिड्डा ने भाजपा ज्वाइन कर इनेलो का तो गणित ही बिगाड़ दिया है। दरअसल, इनेलो कृष्ण मिड्डा को ही पिता की सीट पर उतारक र सहानुभूति जीत हासिल करना चाहती थी। लेकिन अब इनेलो नए और मजबूत प्रत्याशी की तलाश में हैं। इनेलो से अलग होकर जजपा ने भी इस सीट से चुनाव लड़ने का एलान तो कर दिया है, लेकिन इनेलो के साथ-साथ जजपा के लिए भी मुश्किल यह होगी कि इस सीट पर दोनों ही दल अपनी ‘बंटी’ हुई ताकत के साथ लड़ेंगे।
दूसरी ओर, कांग्रेस भी यदि इस सीट पर गुटबाजी के साथ ही लड़ती है, तो जाहिर है इसका फायदा भाजपा को ही मिलेगा। मगर अब देखना यह होगा कि सभी दल इस सीट पर अपने किस मजबूत चेहरे पर दांव खेलते हैं। राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर जेएस नैन कहते हैं कि ये उपचुनाव ऐसे समय में है, जबकि हरियाणा में लोकसभा और विधानसभा इसी साल होने हैं। ऐसे में इस उपचुनाव परिणाम आगामी चुनावों के लिए दलों के लिए उनकी सियासी हवा का रुख तय करेंगे।