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लोकसभा चुनाव 2019: 'आप' के केजरीवाल फरवरी में करेंगे हरमोहन धवन का शंखनाद, ये है कार्यक्रम

Wed, 23 Jan 2019 02:47 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरमोहन धवन
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आम आदमी पार्टी (आप) से लोकसभा प्रत्याशी घोषित होने के बाद हरमोहन धवन चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। अरविंद केजरीवाल जल्दी ही चंडीगढ़ आ सकते हैं। जगह-जगह स्वागत के बहाने वे जनसंपर्क कर रहे हैं, लेकिन उनकी चुनावी यात्रा को पंख आप प्रमुख व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगाएंगे। आप से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि फरवरी के आखिरी हफ्ते में केजरीवाल चंडीगढ़ सेक्टर 25 में रैली करेंगे। तारीख लगभग फाइनल हो चुकी है। अगर सब कुछ चुनावी रणनीति के तहत तय रहा तो 24 फरवरी को अरविंद केजरीवाल शहर में होंगे। यह भी बताया गया है कि पहले उनकी रैली जनवरी में रखी गई थी। तब माना जा रहा था कि दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आना है, लेकिन उनका कार्यक्रम बन नहीं पाया। आप की रणनीति थी कि मोदी से बड़ी रैली करे और जनता तक बात पहुंचाए कि मोदी का जादू फीका पड़ रहा है और केजरीवाल का जलवा आज भी कायम है।
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दिल्ली के विकास कार्यों को बनाएंगे मुद्दा
रैली के दौरान अरविंद केजरीवाल दिल्ली में किए गए कार्यों को मुद्दा बनाएंगे। दिल्ली में उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रामिकों और डोर स्टेप डिलीवरी योजना में कई कार्य किए हैं। चंडीगढ़ में स्वास्थ्य व शिक्षा की खामियों और तुलनात्मक रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे जनता के बीच ले जाया जाएगा। रैली से पहले आप की कोशिश रहेगी कि पूरे शहर को पार्टी के कार्यकर्ता कवर कर लें। पार्टी ने 596 बूथ तैयार कर लिए हैं। अब पार्टी के पदाधिकारियों को अलग-अलग इलाके की जिम्मेदारी सौंपी जानी है। अगले एक हफ्ते के भीतर यह भी कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

गुल पनाग के चुनाव में किया था रोड शो
पंजाब के दौरे पर तो केजरीवाल जाते रहे हैं। इस दौरान वे कभी एयरपोर्ट पर तो कभी यूटी रेस्ट हाउस में चंडीगढ़ के कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी लेते रहे हैं। लेकिन रैली नहीं की। साल 2014 के चुनाव में केजरीवाल ने आप की प्रत्याशी गुल पनाग के पक्ष में रोड शो किया था। चुनाव में गुल पनाग को एक लाख आठ हजार 679 वोट मिले थे। कुल वोट का करीब 23.97 प्रतिशत। जबकि चुनाव जीतने वाली किरण खेर को एक लाख 91 हजार 362 वोट मिले थे। कुल वोट का 42.20 प्रतिशत।
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क्या है मजबूत पक्ष

- पिछले लोकसभा चुनाव के बाद भले ही आप के कई नेता अलग-थलग पड़ गए हों, लेकिन अच्छी बात यह है कि आप के साथ आज भी जमीनी कार्यकर्ता जुड़े हैं।
-इस बार चुनाव से करीब ढाई महीने पहले आप के प्रत्याशी की घोषणा कर दी गई है। पिछली बार चुनाव तारीख घोषित होने के बाद प्रत्याशी घोषित हुआ था। गुल पनाग से पहले सविता भट्टी को प्रत्याशी बनाया गया था।
- पिछले चुनाव में एक ठप्पा लगा था कि गुल पनाग बाहरी हैं। वे ज्यादातर मुंबई में रहती हैं। विरोधियों ने इसको चुनावी मुद्दा भी बनाया था, लेकिन इस बार उस शख्स को प्रत्याशी बनाया है, जिसे शहर की नब्ज पता है। धवन 70 के दशक से शहर में सक्रिय हैं।
- हरमोहन धवन ने भले ही कई बार पार्टी बदली हो, लेकिन शहर में उनका अपना एक वोट बैंक हैं। कालोनियों के साथ सेक्टर में भी उनकी अच्छी पकड़ है। उनके पुराने कामों को आज भी याद किया जाता है।
- दिल्ली में पार्टी ने कुछ टारगेट काम किए हैं, जबकि चंडीगढ़ उन्हीं कामों में पिछड़ता गया। मसलन सरकारी स्कूल और मोहल्ला क्लीनिक।

क्या है कमजोर पक्ष
- पिछले लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी कमजोर हुई है। चंडीगढ़ से जुड़े पंजाब विधानसभा में 20 विधायक थे, जो अब 17 बचे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कई नेता छोड़कर चले गए जिससे पार्टी की छवि खराब हुई है।
- पिछला लोकसभा चुनाव हारने के साढ़े तीन साल तक पार्टी  की कार्यकारिणी गठित नहीं हो पाई। करीब डेढ़ साल पहले आप के कन्वीनर नियुक्त किए गए।
- जमीनी कार्यकर्ता तो थे, लेकिन वे एकजुट नहीं हो पाए।  पार्टी कोई भी कार्यक्रम रखती थी, तो उसमें मुश्किल से भीड़ जुटती थी।
- पिछले चुनाव में पार्टी को करीब एक लाख आठ हजार वोट मिले थे। चुनाव के बाद आप का नकारात्मक प्रचार ज्यादा हुआ है। पार्टी मानती है कि वो वोट आज भी उसके पास है। लेकिन जानकार मानते हैं कि जिस तरह से चुनाव के बाद आप की तस्वीर बदली है, उन वोटों में सेंध लग चुकी है।
- दिल्ली में जो काम हुए हैं, उसे यहां की जनता तक नहीं पहुंचा पाए। नकारात्मक छवि लोगों तक ज्यादा पहुंची है।

 
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