इस वजह से इस गठबंधन को बहुत कम वोट मिले। उन्होंने दावा किया कि इसमें से सबसे अधिक वोट बसपा के ही थे, मुश्किल से एक हजार के करीब वोट ही इनेला को मिला होगा। उन्होंने कहा कि इस उपचुनाव के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने इनेलो को फिर से एक होने पर विचार करने को कहा था। लेकिन अब इस तरह की संभावनाएं नहीं दिखीं, तो बसपा को इनेलो का साथ छोड़ना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि ये गठबंधन आगामी दोनों लोकसभा-विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अभय चौटाला का मायावती से राखी का बंधन अपनी जगह है, लेकिन जनहित में सियासी फैसले अपनी जगह हैं।
एक साल से चल रहे थे प्रयास, अब सफल हुए : सैनी
भाजपा के बागी सांसद और लोसुपा के संस्थापक राजकुमार सैनी ने कहा कि यह गठबंधन दिलों का रिश्ता है और इसके लिए पिछले एक साल से प्रयास चल रहे थे। लेकिन अब ये कोशिशें सफल हुई हैं। उन्होंने कहा कि मैने भाजपा छोड़ दी है। अब भाजपा मेरी सदस्यता क्यों खत्म नहीं कर रही, यह भाजपा ही बता सकती है।
मेरी ओर से भाजपा को पहले ही तलाक दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि मैं सत्ता छोड़ सकता हूं, सिद्धांत नहीं। कौन कहां से लड़ेगा, इस पर सैनी ने कहा कि अभी सीटों का बंटवारा हुआ है, कौन सा दल किस विधानसभा व लोकसभा सीट पर लड़ेगा। इसका फैसला बाद में होगा। जाटों का टिकट मिलेगा या नहीं, इस पर सैनी ने कहा कि टिकट बंटवारे में परिस्थितियों के हिसाब से सभी वर्ग का ध्यान रखा जाएगा।
गुल खिला सकता है अजा-पिछड़ा समीकरण
हरियाणा में इस गठबंधन के बाद सियासत में अनुसूचित जाति-पिछड़ा एकजुटता का समीकरण बनेगा। लोसुपा पिछले काफी समय से प्रदेश में पिछड़ों की राजनीति कर रही है। जबकि हरियाणा में बसपा लगातार अजा को अपने साथ जोड़ने में लगी रहती है।