लोकसभा चुनाव-2019 में चंडीगढ़ से बीजेपी के कई सांसदों का टिकट कट सकता है। दरअसल, पार्टी आलाकमान ने सभी सांसदों का रिपोर्ट कार्ड मांगा है। पार्टी की ओर से जारी फरमान में सभी सांसदों को 20 फरवरी से अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करने को कहा गया है। पार्टी के अलावा प्रशासन और संघ के स्तर पर भी सभी का फीडबैक लिया जा रहा है। अगर सांसदों के रिपोर्ट कार्ड को आधार माना गया तो चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के कई सांसदों का टिकट कट सकता है। दिल्ली में बीते जनवरी माह में हुई बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में टिकट बंटवारे को लेकर बीजेपी में गहन मंत्रणा हुई थी। इसमें पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने सांसदों के कामकाज को लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण का आधार बताया था। आलाकमान ने लोकसभा के प्रभारियों और संगठन के पदाधिकारियों को सांसदों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने का जिम्मा सौंपा है।
सांसद तैयार करने में लगे रिपोर्ट कार्ड
पता चला है कि दो दिन पूर्व सांसद किरण खेर ने डिप्टी कमिश्नर के साथ बैठक कर एमपी लैड का पूरा खाका तैयार करने को कहा था। इसके साथ ही सांसद ने रुके हुए कामों को तत्काल पूरा करने की बात भी कही थी। सांसद के आग्रह पर प्रशासन एमपी लैड की कामों को अंतिम रूप देने में जुट गया है।
इस बार लोगों में नाराजगी
अगर लोकसभा चुनाव 2014 की बात करें तो भाजपा ने टिकट देने से पहले एक बाहरी एजेंसी से प्रत्याशियों का फीडबैक लेकर रिपोर्ट कार्ड तैयार कराया था। टिकट मिलने के बाद भाजपा को इसका लाभ भी मिला था। पार्टी के ज्यादातर सांसद जीते। इस बार सांसदों के कामकाज को लेकर शिकायतें भी अधिक हैं। पार्टी के पदाधिकारियों की ओर इनका फीडबैक ठीक नहीं आ रहा है। लोग अपने सांसदों से नाराज भी हैं।
संघ की रिपोर्ट रहेगी अहम
भाजपा मिशन 2019 को सफल बनाने के लिए संघ भी अपने स्तर से सांसदों के कामकाज की समीक्षा कर रहा है। संघ के पदाधिकारी आम स्वयंसेवकों से फीडबैक ले रहे हैं। इसके अलावा सरकार भी अपने मंत्रियों के साथ ही सांसदों के कामकाज की समीक्षा कर रही है। सूत्रों की मानें तो भाजपा टिकट बंटवारे में अपने सांसदों के कार्यों की जानकारी खुफिया तंत्र के जरिए भी ले रही है। इसी को आधार बनाकर सांसद का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा रहा है। इसके बाद टिकट का निर्धारण किया जाएगा।
सांसदों का रिपोर्ट कार्ड लिया ही जाता है
अपने कार्यकाल के दौरान सांसदों ने अपने क्षेत्रों में कितना काम किया है। इसका लेखा जोखा तो हर चुनाव में पार्टी के सामने रखा जाता है। पार्टी आलाकमान अपने स्तर से भी सांसदों के कार्यों की प्रगति जानते हैं।
--दिनेश कुमार, संगठन मंत्री भाजपा चंडीगढ़