हरियाणा के मुख्य विपक्षी दल इनेलो में दरार बढ़ती जा रही है। सांसद दुष्यंत चौटाला व इनसो अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने के बाद इस्तीफों का दौर जारी है। इनेलो महासचिव अजय चौटाला, उनकी पत्नी नैना चौटाला और उनके दोनों बेटों के समर्थकों के खुलकर पार्टी के फैसले के विरोध में आने से हरियाणा की राजनीति में सियासी गर्माहट बढ़ गई है। इनेलो ने अनेक नेताओं ने भाजपा का दामन थामना भी शुरू कर दिया है, अनेक नेता अब भी भाजपा और कांग्रेस के संपर्क में हैं।
सत्तारूढ़ भाजपा इनेलो की टूट का फायदा उठाने में सबसे आगे है। जींद के दिवंगत विधायक डॉ. हरिचंद मिड्ढा के बेटे को भाजपा में ज्वाइन कराकर टीम मनोहर ने इनेलो को करारा झटका दिया है। कांग्रेस भी पूरी तरह इनेलो के भीतर और बाहर चल रहे घटनाक्रम पर नजरें गड़ाए है। कांग्रेस एकजुट रही तो चुनाव में फायदा हो सकता है। भाजपा तो पहले ही ड्राइविंग सीट पर है। इनेलो के किले में भाजपा-कांग्रेस ने सेंधमारी कर दी तो मुख्य विपक्षी दल के लिए सत्ता पाना आसान नहीं होगा। वैसे भी पार्टी 14 साल से सत्ता से बाहर चल रही है।
सबकी निगाहें पांच नवंबर को पैरोल पर आ रहे इनेलो महासचिव अजय चौटाला के रुख पर टिकी हैं। नैना और दोनों बेटों की तरह ही अजय के तेवर भी कड़े रहे तो इनेलो में सियासी भूचाल आना तय है। इससे जहां रार और बढ़ेगी, वहीं इनेलो के लिए नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो जाएगा। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि अगर अजय और नैना अपने बेटों के समर्थन में खुले तौर पर आवाज बुलंद करते हैं तो क्या इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला उन पर भी कार्रवाई करेंगे। अगर नहीं तो दुष्यंत-दिग्विजय पर की गई कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।
नागेंद्र के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं
दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला के समर्थक यह सवाल भी उठा रहे हैं कि पार्टी ने अब तक फरीदाबाद एनआईटी के विधायक नागेंद्र भड़ाना के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की। चूंकि, वे पार्टी के खिलाफ लंबे समय से बगावती सुर अपनाए हुए हैं। उससे बड़ी अनुशासनहीनता क्या हो सकती है। चूंकि, वह मुख्यमंत्री की जनसभाएं तक करा चुके हैं।
अजय और अभय इनेलो न बन जाए
अगर पार्टी में चल रहा घमासान खत्म नहीं हुआ तो आने वाले समय में कोई दोराय नहीं कि इनेलो दो भागों में बंट जाए। अजय चौटाला अगर नया दल भी बनाते हैं तो दल भी अजय चौटाला इनेलो और अभय चौटाला इनेलो होकर रह जाएगा। पैरोल पर जेल से बाहर आ रहे अजय का रुख ही अब तक चली आ रही उठापटक का पूरी तरह पटाक्षेप करेगा।