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लोकसभा चुनाव 2019: ओपनिंग में ही लड़खड़ा गए 'आप' के हरमोहन धवन, फीकी रह गई पहली रैली

Mon, 25 Feb 2019 10:03 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरमोहन धवन
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लोकसभा चुनाव 2019 के लिए उम्मीदवार बनाए गए 'आप' के हरमोहन धवन ओपनिंग में ही लड़खड़ा गए। क्योंकि उनकी पहली रैली का रंग फीका पड़ गया। जब किसी बल्लेबाज की बहुत दिनों बाद मैदान में वापसी होती है तो उससे आस रखी जाती है कि वह अच्छे शॉट लगाएगा और लंबी पारी खेलेगा। हरमोहन धवन से भी शायद ऐसी उम्मीद रखी जा रही थी, लेकिन वह ओपनिंग में ही लड़खड़ा गए।
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आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद धवन की पहली रैली का रंग थोड़ा फीका रहा। जितना धवन का अनुभव है, उसके मुताबिक वह रैली को मैनेज नहीं कर पाए। रैली मैनेजमेंट में कहीं न कहीं कमी रह गई। रैली में जितने लोगों के आने की संभावना जताई गई थी, उतने लोग नहीं पहुंचे। करीब 40 फीसदी कुर्सियां खाली रहीं। धवन का दावा है कि आठ हजार कुर्सियां लगाई गई थीं और सिर्फ पीछे की ही कुर्सियां खाली थीं।

वो भी इसलिए, क्योंकि लोग समय पर नहीं पहुंच पाए। यह भी बताया जा रहा था कि रैली में कम से कम दस हजार लोग आएंगे, लेकिन बमुश्किल से चार हजार लोग ही पहुंच सके थे।
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टाइमिंग पर मिस मैनेजमेंट हावी रहा

फिलहाल दावे जो भी हों, लेकिन रैली के आयोजन से लेकर अतिथियों के आने की टाइमिंग पर मिस मैनेजमेंट हावी रहा। लोगों ने सबसे ज्यादा सवाल रैली के तारीख पर खड़े किए। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी लोग चुनावी मोड में नहीं हैं, क्योंकि अब तक लोस चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं हुई है। दूसरा, जो लोग आ रहे थे, उनके आने का समय तय नहीं था।

रैली में आने वाले लोगों को जो मैनेज कर रहे थे, वे हर मोर्चे पर फेल दिखे। लोगों को रैली शुरू होने से पहले मैदान में पहुंच जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। केजरीवाल आए और भाषण देकर चले गए, लेकिन लोगों का आना जारी रहा। केजरीवाल के जाने के बाद भी लोग समूह में आते रहे। रैली का वक्त एक बजे था मगर डेढ़ बजे तक आधी से ज्यादा कुर्सियां खाली थीं।

केजरीवाल के जाने के बाद आए शत्रुघ्न सिन्हा
रैली में अतिथियों के आने की टाइमिंग में भी मिस मैनेजमेंट दिखा। रैली का वक्त एक बजे था, लेकिन केजरीवाल आए पूरे ढाई बजे और सिर्फ आठ मिनट का भाषण देकर चलते बने। केजरीवाल जब चले गए तब शत्रुघ्न सिन्हा की फ्लाइट ने लैंड किया। यानी दोनों नेता एक दूसरे से मिल भी नहीं पाए। केजरीवाल के बाद भगवंत मान आए, लेकिन आधे घंटे तक स्थानीय नेता ही भाषण देते रहे। उसके बाद भगवंत मान बोलने आए। केजरीवाल के जाते ही लोग जाने लगे।

जब शत्रुघ्न सिन्हा आए तो उस दौरान मात्र डेढ़ से दो हजार लोग ही मौजूद रहे थे। रैली में यशवंत सिन्हा को भी आना था, लेकिन बताया गया कि उनका एक्सीडेंट हुआ है और दिल्ली में ही हैं। उन्होंने फोन पर धवन को एक दिन पहले सूचना दे दी थी कि वह नहीं आ पाएंगे। इस दौरान यह भी देखने को मिला कि रैली में आरडब्ल्यूए, व्यापारी और ट्रेडर्स, जिनके बीच धवन की अच्छी पकड़ बताई जाती है, वो समूह रैली से गायब रहा।
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बहुत ज्यादा कार्यक्रम होने से भी पड़ा फर्क

रैली में लोगों के नहीं पहुंचने की एक वजह यह भी बताई जा रही है कि रविवार को शहर में आधा दर्जन बड़े कार्यक्रम थे। शहर का सबसे बड़ा कार्यक्रम रोज फेस्टिवल था। रविवार को यहां पर हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी। दूसरा अरबन फेस्टिवल। यहां भी अच्छी-खासी भीड़ दिखाई। इसके रविवार को ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का शुभारंभ हुआ। इसमें चंडीगढ़ के 200 किसानों को लाभ दिया गया है। ये सभी लोग सेक्टर -10 में इकट्ठा थे। रविवार को कांग्रेसी नेता नवजोत कौर व मनीष तिवारी के भी कार्यक्रम थे। यहां भी लोग जुटे थे। इस वजह से भी लोग कम आए।

केजरीवाल की चमक भी हुई फीकी
साल 2014 में जब केजरीवाल गुल पनाग के चुनाव प्रचार के लिए चंडीगढ़ आए थे, तो उस दौरान लोगों में जबरदस्त क्रेज था। कई लोग ऐसे थे, जो अपने बच्चों को लेकर रोड शो में पहुंचे थे। उस दौरान लोगों का कहना था कि केजरीवाल एक क्रांति हैं, जो इस देश की राजनीति बदल को बदल देंगे, लेकिन चार साल बाद केजरीवाल की चमक फीकी पड़ गई है।

उस दौरान वे राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर बोलते थे, मगर रविवार को उनका फोकस सीवरेज, गलियां, स्कूलों के एडमिशन और बिजली पर रहा। उन्होंने न तो पुलवामा में हुई चूक के बारे में कुछ बोला और न ही राफेल जैसे मुद्दे को छुआ। आठ मिनट के भाषण में वह चार मिनट सिर्फ किरण खेर पर बोलते दिखे। किरण खेर पर जो कुछ उन्होंने बोला, उससे लग रहा था कि उनकी तैयारी अधूरी है।

 
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