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जीटी बेल्ट का दंगल: भाजपा के लिए गढ़ बचाना, कांग्रेस के लिए किला भेदना चुनौती

Sat, 27 Apr 2019 05:19 AM IST
देव कश्यप मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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लोकसभा चुनाव में हरियाणा की जीटी रोड बेल्ट का मुकाबला इस बार दिलचस्प रहेगा।  इस बेल्ट पर कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी चुनौती देते हुए अपने धुरंधरों को मैदान में उतारा है। उधर, भाजपा भी कांग्रेस की इस चुनौती स्वीकार करते हुए अपनी रणनीति को धार देने में जुटी हुई है।

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दरअसल, जीटी रोड बेल्ट पर वर्ष 2014 के लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव में भाजपा का काफी बेहतर प्रदर्शन था।  भाजपा ने पहले जीटी बेल्ट की चारों लोकसभा सीटें जीतीं और फिर इसके अंतर्गत पड़ने वाले अधिकतर विधानसभा हलकों में अपने विधायक भी जितवाकर इसे अपना गढ़ बनाया।  लेकिन अब कांग्रेस इस गढ़ में सेंधमारी को बेकरार दिख रही है।  कांग्रेस को इस बात का अहसास है कि लोकसभा चुनाव में यदि जीटी बेल्ट पर जीत का करिश्मा हो जाता है, तो इसका बड़ा असर करीब चार महीने बाद होने वाले हरियाणा के विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा।

जीटी बेल्ट इस तरह बना भाजपा का गढ़
अप्रैल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जीटी बेल्ट पर पड़ने वाली चारों लोकसभा सीटें अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल और सोनीपत जीती थी। उसके बाद अक्टूबर 2014 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा का जलवा कायम रहा। नतीजतन जीटी रोड बेल्ट पर चारों लोकसभा क्षेत्रों की 34 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 22 सीटें, इनेलो ने 2 , कांग्रेस ने 6 और आजाद प्रत्याशियों ने 4 सीटें जीती थीं। इस तरह वर्ष 2014 के लोकसभा और विधानसभा जीटी बेल्ट पर भाजपा का गढ़ बन गया।

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कांग्रेस ने यूं बनाया मुकाबला कड़ा

कांग्रेस ने पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा की परफारमेंस को देखते हुए अपनी खास रणनीति के तहत मुकाबले को कड़ा और रोचक बना दिया है। सोनीपत की सीट से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भाजपा के सांसद रमेश कौशिक केसामने खड़ा कर दिया है। इसी तरह पिछली बार राज्यसभा में गई पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा को इस बार फिर अंबाला में भाजपा सांसद रतनलाल कटारिया के सामने बतौर लोकसभा प्रत्याशी उतार दिया है।

करनाल सीट से भाजपा के नए प्रत्याशी संजय भाटिया के सामने दो बार के विधायक व पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा पर दांव खेला गया है। जबकि कुरुक्षेत्र में भाजपा के अंबाला निवासी राज्यमंत्री नायब सैनी के सामने कांग्रेस ने अंबाला के ही निवासी चार बार के विधायक व पूर्व मंत्री निर्मल सिंह को मुकाबले में उतारा है। बहरहाल भाजपा की फुलप्रूफ रणनीति को कांग्रेस ने भी अपने दिग्गज धुरंधरों के साथ इस बार कड़ी चुनौती दी है। अब देखना यह है कि जीटी बेल्ट पर भाजपा अपना जलवा कायम रख पाती है या कांग्रेस भाजपा के गढ़ में सेंधमारी कर पाती है।

इस बेल्ट पर कांग्रेस का रहा दबदबा
जीटी रोड बेल्ट के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो 1952 से लेकर अब तक अंबाला लोकसभा सीट पर कांग्रेस का 9 बार, जनसंघ-जनता पार्टी-भाजपा का 6 बार और बसपा का 1 बार सांसद जीता। कुरुक्षेत्र सीट पर भारतीय लोकदल-जनता पार्टी का 4 बार, कांग्रेस का 4 बार, इनेलो का 2 बार और हविपा का 1 बार सांसद जीता। करनाल सीट पर कांग्रेस का 11 बार, जनसंघ-जनता पार्टी-भाजपा का 5 बार सांसद जीता। सोनीपत से कांग्रेस का 3 बार, भारतीय लोकदल-जनता पार्टी (एस)-जनता दल का 3 बार, इनेलो का 1 बार, भाजपा ने 3 बार व आजाद 1 बार सांसद जीता।
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