परमानेंट लोक अदालत ने एक व्यक्ति को पूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी लोन न देने के मामले में यूको बैंक के खिलाफ फैसला सुनाया है। अदालत ने बैंक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं, बैंक को दस हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में उपभोक्ता को देने होंगे। वहीं, बैंक को तीस दिनों में शिकायकर्ता को लोन देने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अगर तय समय में भुगतान नहीं किया गया तो बैंक को पूरी रकम पर नौ प्रतिशत ब्याज भी चुकाना होगा। यह फैसला जज जगरूप सिंह महल की अदालत ने सुनाया। इस संबंधी रूपनगर निवासी अमरजीत सिंह ने केस दायर किया था।
अमरजीत सिंह ने अदालत में दायर की गई याचिका में बताया था कि वह छोटे स्तर पर डेयरी का काम करता है। वह अपने बिजनेस को आगे बढ़ाना चाहता थे। इसके लिए उन्होंने यूको बैंक से लोन के लिए आवेदन किया। लोन लेने के लिए उसने अपनी तरफ से सारी औपचारिकताएं पूरी की। इसके बाद वह बैंक के पास कई बार गए। लेकिन बैंक की तरफ से उन्होंने कोई सही जवाब नहीं मिला। फिर उन्होंने डीसी रूपनगर के आफिस में यूको बैंक के खिलाफ शिकायत दायर की।लेकिन उन्हें बैंक की तरफ से कोई सही जवाब नहीं मिला।
इसके बाद उन्होंने आरटीआई डाली तो पता चला कि 15 फरवरी 2012 को उसका लोन मंजूर हो गया था। इसके बाद वह फिर से लोन के लिए बैंक गया। लेकिन बैंक द्वारा फिर उनकी नहीं सुनी गई। साथ ही उन्हें लोन देने से मना कर दिया गया। लोन की प्रक्रिया को पूरा करने के चक्कर में उसको एक लाख का नुकसान हो चुका था। जबकि समय की बर्वादी अलग से हुई। इसके बाद उन्होंने अदालत में याचिका दायर की थी। साथ ही हुए नुकसान के लिए पांच लाख का मुआवजा दिया जाए।
साथ ही अदालत से मांग की कि पांच लाख का लोन मंजूर किया जाए। इसके बाद अदालत की तरफ से बैंक को नोटिस जारी किया गया। अदालत में बैंक ने माना कि लोन जोनल आफिस से मंजूर हुआ था। लेकिन लोन को कैंसिल करने का अधिकारी उनके पास है। हालांकि अदालत ने माना कि तीन साल तक बैंक ने शिकायकर्ता को अंधेरे में रखा। उसे कोई भी सही तरीके से जवाब नहीं दिया गया। ऐसे में इसके लिए बैंक पूरी तरह से जिम्मेदार है।