कोरोना ने हजारों बसे बसाए घर उजाड़ दिए। चंडीगढ़ में काम कर रहे 29,290 प्रवासी यहां से जा चुके हैं। यूटी प्रशासन प्रवासियों को ट्रेनों और बसों के जरिए घर भेज रहा है। अब तक चंडीगढ़ से स्पेशल श्रमिक ट्रेनों के जरिए 27,313 और बसों के जरिए 1977 प्रवासियों को घर भेजा जा चुका है।
लॉकडाउन 3.0 के बाद से ही प्रवासियों के जाने का सिलसिला शुरू है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन 4.0 की अवधि को बढ़ाकर 31 मई कर दिया। इसके बाद जो भी प्रवासी चंडीगढ़ में रह रहे थे यूटी प्रशासन उनको स्पेशल श्रमिक ट्रेन और बसों के जरिए घर रवाना कर रहा है। रविवार तक चंडीगढ़ से 29290 प्रवासियों की घर वापसी हो चुकी है।
प्रशासन की ओर से 31 मई तक प्रवासियों को लेकर जाने वाली ट्रेनों का शेड्यूल बना दिया है। एक दिन पहले ही पंजीकृत श्रमिकों को कॉल करके सेक्टर-26 सीसीईटी सेंटर बुलाकर मेडिकल स्क्रीनिंग कर घर भेजा जा रहा है।
1600 मजदूरों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन हरदोई रवाना
कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन में कामकाज नहीं मिलने से प्रवासी मजदूरों का पलायन जारी है। रविवार को चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से उत्तर प्रदेश के हरदोई के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन रवाना हुई है। इसमें 1600 मजदूर सवार थे। यह ट्रेन चंडीगढ़ के रेलवे स्टेशन से दिन में 2 बजे अपने निर्धारित समय पर रवाना हुई है। चंडीगढ़ से जाने से पहले सभी प्रवासियों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई।
इसके बाद बस में बैठाकर सभी को चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन लाया गया। यहां से सभी को रात्रि भोजन और पानी की बोतल देने के बाद उन्हें सीट नंबर के हिसाब से कोच में बैठाया गया। इस दौरान रेलवे के मुलाजिमों की ओर से रेलवे स्टेशन पर आने वाले श्रमिकों को सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने और मास्क पहनने के लिए बार-बार अपील भी की जा रही थी।
गर्मी के कारण मास्क लटकाए गले में
बता दें कि ट्रेन में बैठने वाले अधिकतर श्रमिकों ने मास्क तो लगाए थे, लेकिन वह नॉक और फेस कवर नहीं थे, वे गले में लटकाए घूम रहे थे। इस संबंध में प्रवासियों का कहना था कि गर्मी इतनी है कि ट्रेन के चलने से दो-तीन घंटे पहले लोग ट्रेन में बैठना शुरू कर देते हैं, जिससे वहां सांस लेने मेें दिक्कत होती है। जब तक ट्रेन प्लेटफार्म पर खड़ी रहती है, ट्रेन की बोगियों में लगे फैन नहीं चलते। ऐसे में मुंह पर मास्क वे कब तक लगाएं। गर्मी के कारण उनका सांस फूलने लगता है। इसलिए मजबूरी में कभी-कभी मास्क चेहरे से नीचे करना पड़ता है।
मोतिहारी के लिए 866 मजदूरों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन मोहाली से रवाना
कोरोना महामारी के बीच लगे कर्फ्यू में दिन में ढील और लॉकडाउन में राहत मिलने पर काम धंधे शुरू होने के बाद अब कई प्रवासी मजदूरों ने अपने गृह राज्य में वापस जाने का फैसला टाल दिया है। इतना ही नहीं रजिस्ट्रेशन होने के बाद भी लोग वापस नहीं जा रहे हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक जिला मोहाली से रविवार तक 55 हजार से अधिक लोगों ट्रेन से जाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था। जिनमें से अब तक केवल 26 हजार 239 लोग वापस गए हैं।
इस पर डीसी मोहाली गिरीश दियालन ने कहा है कि यह अच्छे संकेत हैं कि अब लॉकडाउन में राहत देने के बाद से काम धंधे शुरू हो गए हैं और प्रवासी मजदूरों ने अपने गृह राज्य जाने से इनकार करना शुरू कर दिया है।
डीसी ने बताया कि मोहाली रेलवे स्टेशन से रविवार को 866 प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्य के लिए वापस गए हैं। इस दौरान ट्रेन बिहार के मोतिहारी स्टेशन के लिए गई है। हालांकि इससे पहले वापस जाने वाले प्रवासी मजदूरों की औसत संख्या हर ट्रेन में 1300-1600 के बीच में थी। लेकिन काम धंधे शुरू होने से लोगों ने वापस जाने के फैसले को टाल दिया है। रजिस्ट्रेशन करवाने वाले लोगों में से आधे ही वापस गए हैं। डिसी ने अपील की है कि जो प्रवासी वापस यहीं जिले में रहना चाहते हैं, उनका स्वागत है।
इसके अलावा जो जाना चाहते हैं उन्हें उनके राज्यों में वापस भेजा जाएगा। बता दें कि कोरोना महामारी के चलते लगे लॉकडाउन में कई काफी संख्या में प्रवासी लोग मोहाली में फंस गए थे। काम धंधे बंद होने के बाद कई लोग वापस जाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने रजिस्ट्रेशन तक करवाया हुआ था। इसी बीच कर्फ्यू और लॉकडाउन में ढील हुई और लोगों का रोजगार शुरू हो गया। जिसके बाद उन्होंने जाने का फैसला टाल दिया है।