पंजाब में जून में धान की रोपाई शुरू होने के आसार हैं, लेकिन इस बार धान की रोपाई के लिए श्रमिक कहां से आएंगे। इसको लेकर किसान अभी से परेशान हैं। गेहूं की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है और सरकार द्वारा 15 जून के बाद धान की रोपाई के आदेश जारी किए जा सकते हैं। इस बार धान की रोपाई के लिए बिहार से श्रमिक नहीं आने वाले हैं, उल्टा पंजाब से बड़ी संख्या में श्रमिक बिहार लौट रहे हैं। बिहार वापस जाने के लिए 3 लाख 51 हजार 256 लोगों ने पंजाब सरकार के पास अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है।
इनमें अधिकतर लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और नवांशहर से हैं। पंजाब में गैर-बासमती धान का रकबा 57.27 लाख एकड़ है। 2018 में यह रकबा 64.80 लाख एकड़ था। पिछले साल पंजाब के किसानों को धान की रोपाई के लिए लेबर के जबरदस्त संकट का सामना करना पड़ा था। रेलवे स्टेशनों पर किसान बिहार से आने वाले श्रमिकों को अपने वाहनों में ले जाने के लिए इंतजार करते दिखाई देते थे। पिछले साल तो प्रति एकड़ रोपाई की मजदूरी बढ़कर 3000-3200 रुपये तक कर दी गई जो पहले 1500 रुपये प्रति एकड़ के आसपास होती थी।
इसके अलावा मजदूरों को रहना, खाना पीना फ्री होता था। इस बार लॉकडाऊन और ट्रेनों की आवाजाही बंद होने का जबरदस्त असर देखने को मिलेगा। अभी पंजाब का किसान इस बात तो लेकर आश्वस्त था कि पंजाब में लेबर काफी फ्री बैठी है क्योंकि उद्योग चल नहीं रहे हैं। बिहार के श्रमिक उनको आसानी से इस बार मिल जाएंगे लेकिन बिहार के लोगों ने वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन करवाकर किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शाहकोट के किसान तजिंदर सिंह का कहना है कि इस बार धान की रोपाई की जाये या नहीं, यह अभी से सोचने पर मजबूर है। श्रमिक तो पंजाब से निकल रहा है, हम रोपाई कैसे करेंगे।