चंडीगढ़। जिला उपभोक्ता आयोग ने समय पर पैसे भरने के बावजूद सिबिल स्कोर कम करने के मामले में एसबीआई (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) और ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड को सेवा में कोताही का दोषी करार दिया है। आयोग ने शिकायतकर्ता का सिबिल स्कोर तत्काल ठीक करने का भी आदेश दिया है। इसके साथ मानसिक उत्पीड़न के लिए दस हजार रुपये और केस में खर्च हुए सात हजार देने के आदेश दिए हैं।
सेक्टर-34 निवासी अनुज दीवान ने जिला उपभोक्ता आयोग को दी शिकायत में कहा कि उन्होंने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से लोन लिया और फिर लोन को एसबीआई में ट्रांसफर कर लिया। 10 वर्ष के लिए गए 10.50 लाख रुपये लोन की ईएमआई 12,200 रुपये तय की गई। इसके साथ आश्वासन दिया गया कि ऋण अवधि के दौरान शिकायतकर्ता की मृत्यु हो जाती है तो ऋण खाता बंद कर दिया जाएगा और कुछ भी देय नहीं होगा। शिकायतकर्ता के खाते से हर महीने की 20 तारीख को किस्त कट जाती थी। शिकायतकर्ता ने पूर्ण और अंतिम भुगतान 4 अगस्त 2022 को कर ऋण खाता बंद करवा दिया। इसके बाद जब शिकायतकर्ता ने नई कार खरीदनी चाही और बैंक से संपर्क किया तो क्रेडिट रिपोर्ट में पता चला कि जनवरी से जुलाई 2022 के बीच सात किस्तें नहीं भरी गई हैं। इसके बाद शिकायतकर्ता ने बैंक को इसे ठीक करने के लिए कहा लेकिन फिर भी सिबिल स्कोर ठीक नहीं किया गया। अब मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने एसबीआई और ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड को शिकायतकर्ता का सिबिल स्कोर तत्काल ठीक करने का आदेश दिया है। वहीं, मानसिक उत्पीड़न के लिए दस हजार और केस में खर्च सात हजार देने के आदेश दिए हैं।