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Chandigarh News: हंस कर जियो क्योंकि हंसने पर टैक्स नहीं लगता...

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चंडीगढ़। सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में रविवार को इंपैक्ट आर्ट मोहाली के कलाकारों ने नाटक टैक्स फ्री का मंचन किया। नाटक में दिखाया गया है कि दृष्टिहीन व्यक्ति भी हंस कर जीवन जी सकते हैं। क्योंकि हंसने में टैक्स नहीं लगता। दृष्टिहीन हैं तो क्या हुआ। इसमें हास्य भी है। नाटक को चंद्रशेखर फंसालकर ने लिखा है। इसका विदुला गोरे ने रूपांतरण किया है। नाटक को बनिंदरजीत सिंह बन्नी ने निर्देशित किया है।
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इस नाटक में चार दृष्टिहीन लोगों की कहानी है। ये चारो जन्मांध नहीं हैं। उन्होंने दुनिया अपनी आखों से देखी है। किसी कारणवश उनकी आंखों में रोशनी नहीं है। उन्हीं में से एक केंजल मास्टर आंखों से दिव्यांग लोगों के मनोरंजन के लिए क्लब खोलते हैं।
नाटक में यह दिखाया गया कि दृष्टिहीन व्यक्ति का जीवन कठिन होता है। खासकर तब जब, वह जन्म से अंधा नहीं है। उन्होंने जीवन के विविध रंग देखे हैं। अचानक अंधेरा बहुत निराश करता है।
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टैक्स फ्री यानि बिना कर या मूल्य के यह नाटक समझाना चाहता है कि जीवन में बहुत संघर्ष है। यह आप पर निर्भर है कि आपको इसे कैसे जीना है। तो क्यों न हम हंसी-मजाक के साथ जीएं और हंसने पर कोई टैक्स नहीं लगता।
हल्के-फुल्के हास्य नाटक में मानवता की दुर्दशा पर व्यंग्यपूर्ण दृश्य प्रस्तुत किया गया। इसमें केंजल और उनके दो साथी पंदरपुर और जगताप और काले हैं। सदाशिव काले नया व्यक्ति है जो अभी क्लब में आया है।
अंकुश राणा ने सदाशिव काले की भूमिका निभाई है। जबकि सिद्धार्थ कौशिक ने केंजल मास्टर, अजय चौधरी ने पंदरपुर, गुरविंदर निंह ने रघुनाथ जगपात और रजत सचदेवा ने सोनावने की भूमिका निभाई है। मोहित हट्टा ने लाइट और पुष्पिंदर बग्गा ने म्यूजिक पर काम किया है। इसके अलावा सौरभ शर्मा, जसनदीप सिंह, सुमित, कमलदीप कौर, नेहा धीमान, अमृतपाल सिंह, जतिन सचदेवा, रूपिंदर कौर और दीदार वर्मा ने बैक स्टेज काम किया।
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