बचपन से ही हर तरह की मशीन खोलकर उसके पुर्जों को देखने और उनकी कार्यप्रणाली को परखने की ललक रहती थी। एक बार पिता जी घर में कंप्यूटर लाए और आदत के मुताबिक त्रिषनीत अरोड़ा ने उसे खोल दिया, लेकिन बाद में वह फिर से ठीक न हो सका। घर में पापा की डांट भी पड़ी, पापा कंप्यूटर को मकैनिक के पास सही कराने ले गए और त्रिषनीत भी उनके साथ चला गया।
वहां पर उसने मकैनिक को कंप्यूटर को सही करते देखा और उसके पूरे सिस्टम और उसकी नेटवर्किंग को समझ लिया। इसके बाद से कंप्यूटर पर रोजाना नए प्रयोग करके त्रिषनीत ने उसकी बारीकि यां समझीं और साइबर सुरक्षा एवं एथिकल हैकिंग में महारत हासिल की। माइक्रोसॉफ्ट ने त्रिषनीत को भारत के तीसरे एथिकल हैकर का दर्जा दिया है।
त्रिषनीष की अब तक की उपलब्धि में गुगल और यू-ट्यूब उसके गुरु रहे। हालत यह है कि आज महज 20 साल की उम्र में ही त्रिषनीत गुजरात पुलिस और पंजाब पुलिस के अलावा हैदराबाद स्थित नेशनल पुलिस अकादमी में आईपीएस से लेकर एसचओ तक के अधिकारियों को साइबर सिक्योरिटी पर ट्रेनिंग दे रहा है। साइबर सिक्योरिटी में अहम योगदान करने के लिए उनको वर्ष 2013 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पंजाब का स्टेट अवॉर्ड भी हासिल हो चुका है।
अब तक त्रिषनीत मनी, सोशल मीडिया, बैंकिंग और ऑनलाइन फ्राड से जुड़े बीस से अधिक पुलिस केसों को हल करने में पंजाब पुलिस को सहयोग दिया है। अभी भी पुलिस साइबर क्राइम से जुड़े कई मामलों में उससे सहयोग ले रही है।
त्रिषनीत को कंप्यूटर सीखने का जुनून इस कद्र था कि वह आठवीं कक्षा में फेल हो गया। इसके बाद दसवीं, बारहवीं कौर्सपोडेंस कोर्स से पूरी की और अब वह बीसीए के अंतिम वर्ष में है। बीसीए भी वह कोर्सपोंडेंस ही कर रहा है।
वर्ष 2012-13 में उसने कॉलेज एवं विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को साइबर सिक्योरिटी पर वर्कशॉप लगाना शुरू कर दिया। वर्ष 2013 में त्रिषनीत गुजरात के जामनगर में बिजनेस रिलेशन कांफ्रेंस में हिस्सा लेने गया। वहां पर उसका वार अगेंस्ट साइबर क्राइम पर लेक्चरर था। इस कॉन्फ्रेंस में पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिंहा ने भी लेक्चर किया। कांफ्रेंस में मौजूद गुजरात के आईपीएस अफसर उसके लेक्चरर से प्रभावित हुए और उन्होंने भी टिप्स मांगे।
उसी दिन रात को और फिर अगले दिन दो कॉलेजों में उसने लेक्चरर देकर अपनी छाप छोड़ दी। वापस पंजाब आकर उसने पंजाब पुलिस के आईजी, डीआईजी डीएसपी और एसएचओ समेत कई अधिकारियों को साइबर सिक्योरिटी, डाटा प्रोटेक्शन पर बराबर ट्रेनिंग दी। दोबारा गुजरात जाकर वहां के साइबर क्राइम सेल को बकायदा ट्रेनिंग दी। पहले साल डेढ़ साल तक त्रिषनीत ने सभी को मुफ्त में ट्रेनिंग दी। फिलहाल वह पंजाब पुलिस अकादमी फिल्लौर में आईजी एवं डायरेक्टर के आईटी एडवाइजर हैं। वहां पर साइबर सेल में पूरा सिस्टम तैयार करने में सहयोग दे रहे हैं।
पुलिस ट्रेनिंग के अलावा कारपोरेट सेक्टर में भी पसारे पैर
पुलिस की ट्रेनिंग के अलावा त्रिषनीत ने कारपोरेट क्षेत्र में भी पैर पसारना शुरू किया। करीब दो साल पहले उन्होंने टीएसी सिक्योरिटी सोल्यूशन के नाम से अपनी कंपनी मात्र डेढ़ लाख रुपये में शुरू की। आज कंपनी का सालाना कारोबार 20 लाख से अधिक का है। उनकी कंपनी रिलायंस, आईसीआईसीआई बैंक, पंजाब पुलिस, गुजरात पुलिस और आईआईटी रोपड़ समेत कई कंपनियों को अपनी सेवाएं दे रही है।
वन मैन आर्मी से अब बनी आठ लोगों की टीम
त्रिष्भनानीत ने 16 साल की उम्र में अकेले ही इस सफर को शुरू किया था। सभी चुनौतियों को पार करते हुए उनको कामयाबी मिली और आज उनकी टीम में आठ लोग शामिल हैं।
साइबर सिक्योरिटी पर लिखी अब तक तीन पुस्तकें
16 साल की उम्र से ही त्रिषनीत हैकिंग पर ब्लॉग लिखता था, विदेशी लेखक भी उसके लेखन की तारीफ करते थे, लेकिन तब गुगल ने उसका ब्लॉग भी बंद कर दिया। त्रिषनीत ने हार नहीं मानी और हैकिंग पर एक पुस्तक वायस ऑफ हेकर्स लिखी, लेकिन वह भी छप नहीं पाई। इसके बाद उन्होंने दूसरी पुस्तक द हैकिंग इरा लिखी और वह पुस्तक प्रकाशित हुई और काफी सराहना मिली।
त्रिषनीत की तीसरी पुस्तक हैकिंग टॉप विद त्रिषनीत अरोड़ा अक्तूबर में लांच हो जाएगी। इसमें उन्होंने वेब एप्लिकेशन, सिक्योरिटी एवं नेटवर्क सिक्योरिटी के अलावा सामान्य ज्ञान के टिप्स दिए हैं। त्रिषनीत ने एथिकल हैकिंग पर शुरुआती दौर में अपना सिलेबस खुद तैयार किया। उस पर खुद टेस्ट दिए और स्वयं आंकलन करके आगे बढ़ता गया, आज भी वह साइबर सिक्योरिटी की चुनौतियों, समाधान और तरीकों पर लगातार रिसर्च कर रहा है।
क्या है एथिकल हैकिंग
एथिकल हैकिंग के बारे में त्रिषनीत ने कहा कि इसमें कंपनी के साथ मिलकर उसके कंप्यूटर नेटवर्क की वलभनेरेबिलिटीज (लूपोल) को एसेस किया जाता है। पेनिट्रेशन टेस्टिंग करके उसकी कमियां तलाश की जाती हैं। यह सारी हैकिंग कंपनी की मंजूरी के बाद की जाती है। उन कमियों को कंपनी की आईटी टीम के साथ बैठकर उनको सलाह दी जाती है, जिससे भविष्य में कंपनी का सिस्टम हेक न हो सके।
माता पिता का सपना था कि वकील बने
त्रिषनीत के माता-पिता का सपना था कि वह वकील बने, लेकिन उसके दिमाग में कंप्यूटर और इससे जुड़ा तंत्र ही घूम रहा था, दिन रात कंप्यूटर से जूझते रहकर कुछ नया करने की तमन्ना ने ही उसे आज छोटी सी उम्र में ही इस मुकाम तक पहुंचा दिया कि आज उससे पुलिस और कारपोरेट सेक्टर भी सहयोग ले रहा है।