फिल्म ‘अ बिलियन कलर स्टोरी’ की हुई स्क्रीनिंग
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अदब फाउंडेशन द्वारा आयोजित पांचवां चंडीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल का रविवार को चंडीगढ़ क्लब में समापन हो गया। दिन की शुरूआत कवि निराला की कथात्मक आत्मकथा ‘अ लाइफ मिसस्पेंट’ पर अनुवादक सत्ती खन्ना और समीक्षक अक्षय कुमार की बातचीत से हुई। सत्ती खन्ना ने लिटरेचर फेस्टिवल में लेखकों के साथ-साथ अनुवादकाें और समीक्षकों को भी बराबर स्थान देने की बात कही।
दूसरे सत्र में जाने-माने पंजाबी लेखक एवं प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित मनमोहन सिंह की किताब ‘निर्वाण’ पर समीक्षक देशराज काली ने बातचीत की। मनमोहन का कहना था कि पंजाबी के पाठकों की कमी नहीं है। सीएलएफ-2016 का अंतिम सत्र बहुत ही दिलचस्प रहा। ‘अ बिलियन कलर स्टोरी’ फिल्म के प्रदर्शन के पश्चात, इसके निर्देशक एन पद्मकुमार और सह-निर्माता सतीश कौशिक के साथ फिल्म समीक्षक भारद्वाज रंगन ने बातचीत की। कौशिक ने युवा फिल्मकारों की दिक्कतों का जिक्र छेड़ते हुए कहा कि निर्माताओं को व्यापार से ऊपर उठकर भी सोचना चाहिए। आज के फिल्मकार निर्भीक होकर काम करते हैं, जबकि पहले कई तरह की सीमाएं थीं।
‘अ बिलियन कलर स्टोरी’ के बारे में एन पद्मकुमार ने कहा कि यह फिल्म ब्लैक एंड व्हाइट में बनाई गई है, क्योंकि एक बच्चा हर तरह के पूर्वाग्रह से मुक्त होता है और उसकी सोच रंगहीन होती है। यह भारत में मौजूद रंगों को हटाने की एक प्रक्रिया थी। वे बोले कि ‘मैं चाहता था कि दर्शक रंगों की कल्पना स्वयं करें।’