देश के मशहूर शायर वसीम बरेलवी नज्म पढ़ रहे थे। अदब की महफिल सुरों से सराबोर थी। गजलों नज्मों में लोग डूबे हुए थे। इतने में ही पुलिस अचानक वहां पहुंची और स्पीकर बंद करा दिया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से श्रोता चकित रह गए।
पुलिस ने वजह बताई कि चंडीगढ़ लेक क्लब साइलेंस जोन के दायरे में आता है। यहां पर स्पीकर का इस्तेमाल नहीं हो सकता। इसके बाद वसीम बरेलवी ने बिना माइक और स्पीकर के नज्म पेश कीं। गौरतलब है कि लिटफेस्ट 2017 के कुछ आयोजनकर्ता हरियाणा के बडे़े अधिकारी हैं।
चंडीगढ़ लिट फेस्ट के को चेयर माधव कौशिक ने बताया कि चंडीगढ़ लेक क्लब में लिटफेस्ट आयोजित कराता रहा है। इसमें देश भर से नामचीन हस्तियां शामिल होती हैं। शनिवार को सबसे अंत में मशहूर शायर वसीम बरेलवी का प्रोग्राम रखा गया था।
वसीम साहब ने माइक संभाला और नज्में पढ़ने शुरू कर दीं। स्पीकर बजने की शिकायत किसी ने की तो पुलिसकर्मी वहां पहुंच गए और स्पीकर बंद करा दिया। इस पर वहां मौजूद श्रोत्राओं ने आपत्ति की तो पुलिस ने लिटफेस्ट के आयोजकों से साउंड परमिशन की मंजूरी दिखाने को कहा।
पहले तो आयोजकों ने आनाकानी की लेकिन बाद में वह कोई भी साउंड परमिशन का दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए। नतीजा, चंडीगढ़ पुलिस ने मुशायरे में इस्तेमाल होने वाले साउंड सिस्टम को बंद करवा दिया। पुलिस कर्मचारियों ने चंडीगढ़ लिटरेरी सोसायटी के सदस्यों को कहा कि साइलेंस जोन में किसी भी तरह का ध्वनि प्रदूषण कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसलिए ध्यान रखा जाए कि नियमों का उल्लंघन न हो।
पुलिस कर्मचारियों के मुताबिक वह लेक क्लब अथॉरिटी के खिलाफ पर सख्त कार्रवाई करेंगे क्योंकि यह लेक क्लब अथॉरिटी का जिम्मा है कि वह सभी मंजूरी के बाद ही किसी कार्यक्रम को अनुमति दें लेकिन अथॉरिटी ने ऐसा नहीं किया। इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जाएगी ताकि जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। बता दें कि 16 नवंबर को पर्यावरण विभाग ने लेक क्लब को इसे लेकर नोटिस भी भेजा था, फिर भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
बरेलवी ने बिना स्पीकर के ही सुनाए शेर
साउंड सिस्टम बंद होने के कारण वसीम बरेलवी को बिना माइक व स्पीकर के ही अपनी नज्म सुनानी पड़ी। हुआ यूं कि साउंड सिस्टम बंद होने पर श्रोता मुशायरे से उठकर जाने लगे तो आयोजकों ने वसीम बरेलवी को बिना माइक के ही नज्म व शेयर सुनाने का आग्रह किया। वसीम बरेलवी ने भी उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए बिना माइक के ही शेयर व नज्म सुनाए। इसके बाद उन्होंने माहौल पर तंज करते ऐसे ऐसे शेर पढ़े कि लोग वाह वाह कर उठे। कुछ शेरों की बानगी देखिए।
सफर पर आज वही कश्तियां निकलती हैं, जिन्हें खबर है कि हवाएं भी तेज चलती हैं।
मेरी हयात से शायद वो मोड़ छूट गए, बगैर सिमतों के राहें जहां निकलती हैं।
हमारे बारे में लिखना तो बस यही लिखना, कहां की शम्में हैं किन महफिलों में जलती हैं।
वसीम आओ इन आंखों को गौर से देखो, यही तो हैं, जो मेरे फैसले बदलती हैं।
चला है सिलसिला कैसा, ये रातों को मनाने का।
अरे तुम्हें हक दे दिया किसने, दीयों के दिल दुखाने का।
इरादा छोड़िए अपनी हदों से दूर जाने का, जमाना है जमाने की निगाहों में ना आने का
कहां की दोस्ती, किन दोस्तों की बात करते हो, मियां दुश्मन नहीं मिलता अब तो कोई ठिकाने का
निगाहों में कोई भी दूसरा चेहरा नहीं आया, अरे भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का
ये मैं ही था बचा के खुद को ले आया किनारे तक, अरे समंदर ने बहुत मौका दिया था डूब जाने का।