चलो अब चलते हैं बच्चे इंतजार कर रहे होंगे। यह हैं पद्मभूषण रस्किन बांड..खुशमिजाज इंसान..जिंदादिल लेखक, जिनकी मौजूदगी ही सकारात्मक ऊर्जा पैदा कर देती है। चंडीगढ़ के सुखना लेक में आयोजित इंटरनेशनल लिट फेस्ट लिट्राटी 2017 में पहुंचे रस्किन बांड का यही अंदाज सभी को लुभा गया।
बड़े बड़े सुपरस्टार के पीछे इतनी जनता नहीं होती जितनी उनके पीछे थी। रस्किन बांड यहां मौजूद बच्चों को देखकर काफी खुश थे और कहा कि बड़े होकर माता पिता का ख्याल रखना। उन्होंने कहा कि वक्त बदलता रहता है, जब वह पहली बार चंडीगढ़ आए थे तो यहां पेड़ ही पेड़ थे।
फिर कुछ समय बाद आए तो कुछ बिल्डिंग दिखीं उसके बाद रॉक गार्डन, रोज गार्डन अस्तित्व में आया। उन्होंने कहा कि उन दिनों सेलिब्रिटी बनना काफी मुश्किल होता था। अब तो लेखक भी नामी हस्ती हो जाते हैं। रस्किन बांड ने कहा कि अब कई स्थानों पर उनको कोई नहीं पहचानता है।
कुछ समय पहले नई दिल्ली एयरपोर्ट पर किसी ने कहा कि आप बेजान दारूवाला हैं तो उनको हंसी आ गई और बोले, नहीं हूं पर अपने अंदाज में बोले, मैं भविष्य देख सकता हूं। उन्होंने बताया कि शुरुआत के दिनों में उनको लगता था कि जब उनकी किताब छपे तो टाप पर रखी हो।
ऐसे ही एक बुक शॉप में वह गए तो देखा कि उनकी किताब नीचे रखी थी उन्होंने किताब उठाई और टॉप पर रख दी, इसे दुकानदार ने देख लिया और बोला, ऐसा नहीं चलता है। रस्किन बांड ने बताया जल्द ही उनकी एक किताब पर मूवी तैयार होने वाली है।
उन्होंने कहा कि ज्यादातर किताबों से प्रेरित होकर मूवी बनाई जाती हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि हरेक घर में खिड़की का अपना महत्व है। बिना खिड़की का घर नहीं हो सकता है। खिड़की दुनिया को दिखाती है। रस्किन बांड से जब पूछा गया कि आप पालिटिक्स में नहीं आना चाहते हैं तो बोले, मैं पालिटिक्स को फालो करता हूं पर राजनीति में नहीं जाना चाहते हैं।
कंटेंट और क्वालिटी है सबसे महत्वपूर्ण
बच्चों के सवालों पर उन्होंने कहा कि किसी भी साहित्य के लिए कंटेंट सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। जितना अच्छा कंटेंट होगा उतना अच्छा साहित्य होगा। उन्होंने कहा कि साहित्य लिखने के लिए साहित्य पढ़ना भी आवश्यक है। इसके साथ ही आसपास का वातावरण भी उसमें अहम भूमिका निभाता है।
बचपन से ही किताबें पढ़ने का शौकीन था
रस्किन बांड ने बताया कि उनको बचपन से ही किताबें पढ़ने का शौक था। अक्सर स्कूल में टीचरों को उनके पास किताबें मिलती थीं। जब बड़े हुए तो मां ने पूछा कि क्या बनना चाहते हो तो बोले, लेखक...मां ने कहा कि सेना में जाओ...लेखक क्यों बनोगे। उस समय उनको यह नहीं मालूम था कि लेखक भी सेलिब्रेटी बन सकता है। रस्किन बांड ने कहा कि जब शुरुआत की थी तो कुछ आय नहीं था। उसको पब्लिश करवाना भी काफी मुश्किल होता था।
साहित्य कैसे लिख सकता है अकेला इंसान
एक स्कूली बच्चे द्वारा पूछे गए सवाल पर रस्किन बांड ने कहा कि जब इंसान अकेला होता है तो वह किसी भी बात को गहराई से सोच सकता है। कई बार वह खुद से ही सवाल जवाब करने लगेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि लिखना अकेलेपन का काम नहीं, इसके लिए ट्रेवलिंग और लोगों से मिलना जुलना और आसपास के माहौल का अनुभव भी आवश्यक है।
आपके साहित्य को कोई बिगाड़ता तो नहीं
एक स्कूल की स्टूडेंट्स ने रस्किन बांड से सवाल किया कि कभी आपने लिखा हो और आपके साहित्य को किसी ने बिगाड़ दिया हो ऐसा तो नहीं हुआ। इस पर रस्किन बांड हंसे और बोले, अब तक ऐसा नहीं हुआ, हां, ऐसा लगता है कि आपके साथ कुछ ऐसा हो चुका है।
सौ से ज्यादा बच्चों ने की शिरकत
अलग अलग स्कूलों के सौ से ज्यादा बच्चों ने सुखना लेक पर आयोजित इंटरनेशनल लिट फेस्ट लिट्राटी 2017 के दौरान मौजूद रहे। मैं अपने आप को एक अकेले लोन फाक्स के रूप में आइडेंटिफाई करता हूं।
इसी ने मुझको लोन फाक्स डासिंग लिखने को प्रेरित किया। यह एक सच्चाई है और इसमें कोई भी फिक्सन नहीं है। जलद् ही मैं इसका एक सीक्वल लिखने की कोशिश करूंगा। उन्होंने लेखन के बारे में कहा कि एक लेखक को भाषा और व्याकरण का ज्ञान होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि मैं एक लेखक नहीं होता तो एक सूमो रेसलर होता या फिर फुटबाल खिलाड़ी होता।
इस मौके पर काउंसल जनरल आफ कनाडा डा. क्रिस्ट्रोफर गिबिंस, सीएलएस के वाइस चेयर माधव कौशिक और चेयरपर्सन सुमिता मिश्रा भी मौजूद थे। यह त्रिभाषीय मुशायरा था। जिसमें हिंदी, उर्दू और पंजाबी के शायर मौजूद थे। इसमें असीम बरेलवी, कुमार बेचैन, नसीम निखत, ज्ञान प्रकाश, विवेक त्रिलोचन, लोची महक, भारती, चंदर त्रिखा मौजूद थे।
रस्किन बांड को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड
इंटरनेशनल लिट फेस्ट लिट्राटी 2017 के दौरान रस्किन बांड को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। रस्किन बांड ने इस अवार्ड को ग्रहण करते हुए कहा कि लेखक भी एक सेलिब्रेटी हो सकता है यह उन्होंने कभी सोचा नहीं था। उन्होंने कहा कि लिखना उनका शौक था और शौक को ही उन्होंने प्रोफेशन बना लिया।
प्लीज सर एक आटोग्राफ दे दीजिए
मशहूर लेखक रस्किन बांड जैसे ही समारोह स्थल से निकलने लगे तो वहां पर महिलाएं और बच्चे उनके पीछे पड़ गए। यूं तो वह यहां पर करीब तीन सौ से ज्यादा किताबों पर अपने आटोग्राफ दे चुके थे पर कुछ लोग उस समय समारोह स्थल पर नहीं मौजूद थे। यह लोग बाद में आए और लगातार उनसे यही अनुरोध करते रहे कि सर प्लीज आटोग्राफ दे दीजिए। आखिरकार डा. सुमिता मिश्रा के आग्रह पर रस्किन बांड रुके और गाड़ी पर बैठने के पहले मुस्कराते हुए किताब हाथ में ली और आटोग्राफ दे दिए।
अब तक लिख चुके हैं सैकड़ों पुस्तकें
रस्किन बांड अब तक सौ से ज्यादा पुस्तक, लघु कहानियां, एंथालॉजी लिख चुके हैं। उनके उपन्यास सुसैनाज सेवन हजबेंड पर विशाल भारद्वाज ने सात खून माफ फिल्म बनाई और श्याम बेनेगल ने हिंदी सीरियल एक था रस्टी बनाया गया।
अंग्रेजी के जाने-माने उपन्यासकार रस्किन बांड का बचपन शिमला, जामनगर और देहरादून में बीता। लेकिन देहरादून में बिताए गए दिनों की यादें उनके जेहन में तरोताजा है। और लेखक बनने का सपना ही उन्होंने देहरादून में बुना था। बांड बताते है कि उनके दादा देहरादून में ही रहते थे। उनकी मां की शादी यही देहरादून में हुई थी। वे बताते हैं कि देहरादून में एस्ले हॉल मुख्य बाजार होता था।
क्लेमेंटाउन में खूब चहल-पहल होती थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के युद्धबंदियों को जिनमें जर्मन और अमेरिकन होते थे। उन्हें क्लेमेंटाउन में रखा जाता था। और वे लोग सिनेमा देखने के लिए बाजार आते थे। कई बार पैदल दोस्तों के साथ आए तब बाजार में खूब रौनक लगी रहती थी।
रस्किन बांड की प्रसिद्ध रचनाएं
रूम ऑफ द रूफ, द ब्लू अंब्रेला, द हिडेन पूल, द एडवेंचर ऑफ रस्टी, रोड्स टू मसूरी, मसूरी एंड लंढौर, डेज ऑफ वाइन एंड रोजेज, अ पैसेज थ्ररू इंडिया, हिमालयन लीफ एंड फ्लॉवर, मसूरी ज्वैल ऑफ द हिल्स, एंग्री रिवर, हनुमान टू द रेस्क्यू, स्ट्रेंज मैन-स्ट्रेंज प्लेसेज, टेल्स एंड लीजेंड्स ऑफ इंडिया, द इंडिया आई लव, द रोड टू द बाजार।
रस्किन बांड से संबंधित कुछ खास बातें
1-मशहूर लेखक रस्किन बॉन्ड का जन्म 1934 में 19 मई को जामनगर कसौली, हिमाचल प्रदेश में हुआ।
2- 19 साल की उम्र में उन्होंने पहला उपन्यास द रूम ऑन द रूफ लिखा जो वर्ष 1956 में प्रकाशित हुआ।
3- उनके नाम 23 से ज्यादा उपन्यास और 41 से ज्यादा संकलन दर्ज हैं।
4- शिक्षा-दीक्षा-जॉन विशप कॉटन शिमला में हासिल की।
5- उनके कई उपन्यासों के आधार पर बॉलीवुड में जुनून, सात खून माफ और द ब्लू अम्ब्रैल बनी।
6. 1992 में उन्हें साहित्य अकादमी, 1999 में पद्म श्री और 2014 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।