खुद के अनुभवों और सकारात्मक सोच हो तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं है।
खुद की सोच को विकसित करें, ताकि अनुभवों की बदौलत समाज और साहित्य के विकास में युवाओं की भूमिका और भी बढ़ सके।
मैंने भी अपनी पहली कविता महज 15 वर्ष की आयु में लिखी थी। सेक्टर-चार के सतलुज पब्लिक स्कूल में आयोजित लिट फेस्ट के मौके पर बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद पद्मश्री सरदार अंजुम ने युवा लेखकों, साहित्यकारों व अन्य क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल करने वालों की कुछ इसी तरह हौसलाफजाई की।
कार्यक्रम का उद्घाटन पंचकूला नगर निगम की मेयर उपन्दिर कौर अहलूवालिया ने किया।
इस दौरान दीप प्रज्ज्वलन किया गया, जिसमें मेयर के साथ सरदार अंजुम, स्कूल के प्रिंसिपल कृत सेराय और सीबीएसई के क्षेत्रीय निदेशक आरजे खांडेराव भी शामिल हुए।
तीन सत्रों में आयोजित परिचर्चा के दौरान सरदार अंजुम ने जहां सामाजिक बदलाव और युवा पीढ़ी को लेखन से रूबरू कराते हुए नजर आए। तो दूसरे सत्र में बिट्टू संधू ने भी वहां मौजूद प्रबुद्ध युवा लेखकों से स्टोरी टेलिंग और इससे संबंधित विषयों पर चर्चा की।
इस दौरान सरदार अंजुम ने महंगाई की काली पट्टियां पहनकर... चुनिंदा शब्द कहे और खूब तारीफें बटोरी।
‘लिट फेस्ट- 2013’ के तीसरे सत्र में विवेक अत्रे के साथ युवा लेखक रूबरू हुए और उन्होंने अपनी लिखी हुई किताबों से संदर्भ जोड़ते हुए कहा कि सकारात्मक सोच और दृढ़ इच्छा के साथ अनुभवों को शामिल कर कहानी की शक्ल दी जा सकती है।
इस मौके पर एक ही प्लेटफॉर्म पर युवा लेखक, ब्लॉगर्स और कंपनी के आला अधिकारियों ने जीवन में सफलता के राज लोगों के सामने रखे।
युवा प्रतिभाएं एक मंच पर
इस मौके संचित गर्ग, रोहित गोर, सुदीप नागरकर, अंशुल खडवालिया, फराज काजी, राधिका पानिकर, रीकृत सेराय, राहुल सैनी, पायल धर अभिनव पांडेय और आईएएस अधिकारी शेरोन शेफाली गुप्ता, अनुप्रीत सिद्धू, ललित शर्मा, हार्दिक धमीजा सहित देश के अलग अलग शहरों से आए दर्जनों लेखक, स्टाइलिस्ट, ब्लॉगर्स ने अपने अनुभवों को भावी लेखकों के समक्ष रखे।
इमपल्स में हैं 17 बेहतरीन कहानियां
रीकृत सेराय की लिखित पुस्तक ‘इमपल्स’ को भी इस मौके पर लांच किया जाएगा। रीकृत की लिखित यह दूसरी किताब है, जिसमें 17 कहानियों का संग्रह है। इस किताब की सभी कहानियों की थीम अलग है। रीकृत ने बातचीत में कहा कि उनकी कोशिश है कि हर कहानी में वास्तविक अनुभवों को शामिल किया जाए। लेकिन, कहानियों में अगर ह्यूमर जरूरी है तो इसे भी शामिल करते हैं ताकि पाठकों को लेखन के हर रंग से रूबरू कराया जा सके।
लेखन में भाषा की नहीं है बाध्यता: राधिका
कार्यक्रम के आयोजन में पिछले दो महीने से भी अधिक वक्त से जुड़ी रही र्यूमर ग्रुप की सीईओ एवं संस्थापक राधिका पानिकर ने कहा कि पहली बार पंचकूला में इस तरह के लिट फेस्ट का आयोजन किया गया है। इसमें हिन्दी, अंग्रेजी सहित अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी अपनी कहानियां या कविताएं लिखने वालों को एक प्लेटफॉर्म पर अपने अनुभव बांटने का मौका मिला। उनकी कोशिश है कि पंचकूला में भी लेखन और साहित्य को युवाओं के बीच इस तरह प्रोत्साहित किया जाए, ताकि देश के अन्य शहरों के तरह यहां की युवा प्रतिभाओं को बराबरी से आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।