हरियाणा के गृह मंत्री एसईटी को जो शक्तियां प्रदान करवाना चाहते थे। महाधिवक्ता के यहां से आई टिप्पणी ने उन्हें निराश कर दिया है। लिहाजा अब उन्हे एसईटी की जांच के भरोसे ही बैठना पड़ेगा। एसईटी अब पूछताछ की पावर के बगैर ही इस पूरे प्रकरण की जांच करेगी। लिहाजा अब नजर एसईटी की रिपोर्ट पर टिकी है।
एसईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही यह कहा जा सकेगा कि इतनी लंबी चली कसरत के बाद नतीजा क्या निकला है। खरखौदा शराब मामले में जांच के लिए एसईटी के बारे पूछे जाने पर गृहमंत्री अनिल विज ने कहा कि इस मामले में उन्होंने एसईटी के स्थान पर एसआईटी (विशेष जांच दल) के गठन की मांग की थी।
साथ ही एलआर व महाधिवक्ता हरियाणा से राय मांगी थी तथा दोनों ने अपनी राय नेगेटिव दी, लेकिन महाधिवक्ता हरियाणा की राय है कि एसईटी मामले में पूरी जांच कर सकती है तथा उसकी रिपोर्ट के आधार पर दर्ज एफआईआर तथा जिस भी एजेंसी से सरकार चाहे जांच करवा सकती है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में सीआरपीसी की धारा-32 में भी यह प्रावधान है। उन्होंने कहा कि एसईटी अपनी रिपोर्ट में शिकायत क्या है, क्या यह आपराधिक मामला है या क्या विभागीय जांच का मामला है, इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही जांच आरंभ होगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एसईटी को पूछताछ की पावर नहीं मिलने के मामले में गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि इस मामले में उन्होंने एसईटी के स्थान पर एसआईटी के गठन की मांग की थी। साथ ही इस मामले में महाधिवक्ता से राय मांगी गई थी। अभी जब तक एसईटी की रिपोर्ट नहीं आती वे इस मामले में कुछ ज्यादा नहीं कह सकते।
- अनिल विज, गृह मंत्री हरियाणा