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35 साल से थियेटर से जुड़े हैं, इन्होंने कमर्शियलाइजेशन को लेकर खोले कई राज

Wed, 14 Sep 2016 10:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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थियेटर आर्टिस्ट मुजीब खान का स्पेशल इंटरव्यू - फोटो : अमर उजाला
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35 साल से थियेटर से जुड़े हैं और लिम्का बुक में इनका नाम दर्ज है, लेकिन ये शख्स कमर्शियलाइजेशन पर खुलकर बात करते हैं। आर्ट हो या एंटरटेनमेंट, हर जगह कमर्शियलाइजेशन हो चुकी है। जो बिकता है, वहीं दिखाया जाता है। अब सीरियस आर्ट को देखने वाली ऑडियंस नहीं है। यह कहना है जाने माने निर्देशक और नाटककार मुजीब खान का, वे एक कार्यक्रम के सिलसिले में यहां आए थे।
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एक खास बातचीत के दौरान उन्होंने थिएटर के अपने 35 वर्षों के अनुभवों को साझा किया। खान बताते हैं कि कबीर दास, मिर्जा गालिब, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह जैसी प्रतिभाओं के आदर्श, विचार और उनका दृष्टिकोण हर पीढ़ी तक पहुंचना चाहिए। क्योंकि ऐसी प्रतिभाएं युवा पीढ़ी के  लिए प्रेरणा स्रोत हैं और यह युवाओं का मार्गदर्शन करती हैं। यहीं कारण है कि मैं एंटरटेनमेंट से जुड़े विषयों पर नाटक निर्देशन करने की बजाय ऐसे मुद्दों को उठाता हूं, जिनका हमारे इतिहास या देश में अहम रोल रहा हो।

स्क्रिप्ट तैयार करने में लगे आठ महीने
मुजीब खान बताते हैं कि स्वामी विवेकानंद पर नाटक लिखने में उर्दू के लेखक सैयद हामिद को आठ महीने का वक्त लगा। स्वामी विवेकानंद पर कई पुस्तकों और पत्रों को पढ़ने के बाद नाटक लिखा गया, लेकिन स्क्रिप्ट 10-12 घंटे का समय मांग रही थी। हमने काफी मुश्किल से स्वामी विवेेकानंद के जीवन के जरूरी और अनछुए पहलुओं को 45 मिनट के नाटक में समेटा।
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प्रेमचंद की 311 कहानियों पर नाटक का निर्देशन
मुजीब खान एकलौते ऐसे शख्स हैं जो मुंशी प्रेमचंद की 315 में से 311 कहानियों पर नाटक का निर्देशन कर चुके हैं। उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में भी दर्ज है। जब वह 18 साल के थे, तब मुंबई ड्रामा कंपटीशन में उनका ‘लाचार-ए-माई’ नाटक चौथे स्थान पर रहा था।

लेखक को नहीं मिलती आजादी
कई टीवी सीरियलों की स्क्रिप्ट लिख चुके मुजीब खान बताते हैं कि एक ऐसा समय भी आया जब मुझे लगा कि फिल्मों का भी निर्देशन किया जाना चाहिए। लेकिन जिन फिल्मों का मैं निर्माण करना चाहता हूं, उसके लिए इंवेस्टर्स नहीं मिलते। कमर्शियलाइजेशन इतनी हो चुकी है कि लोग आर्ट फिल्मों से नहीं जुड़ रहे हैं। दूसरा हम कोई दूसरी फिल्म भी बनाते हैं तो उसमें भी पूरी तरह से एक लेखक को आजादी नहीं मिलती। उसे प्रोड्यूसर के हिसाब से लिखना पड़ता हैै।

गांधी और टैगोर के रिश्तों पर बनाना चाहते हैं नाटक
मुजीब खान बताते हैं कि इस समय में रश्मिरथी नाटक पर काम कर रहा हूं जिसमें संवाद कविता की फॉर्म में होंगे। पात्र एक दूसरे से बात कविता में करेंगे। इसके अलावा महात्मा गांधी और गुरु रवींद्रनाथ टैगोर के संबंधों पर नाटक बनाने की मेरी इच्छा शुरू से रही है।
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